रोहिंज्या

म्याँमार  में ‘शान्तिपूर्ण, व्यवस्थित व विश्वसनीय’ चुनावों की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में 8 नवम्बर को होने वाले चुनाव को स्थानीय जनता के लिये एक अहम पड़ाव बताते हुए उम्मीद ज़ाहिर की है कि इससे देश में समावेशी टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. यूएन प्रमुख ने भरोसा जताया है कि सफलतापूर्वक चुनाव सम्पन्न होने से रोहिंज्या शरणार्थियों की सुरक्षित और गरिमामय ढँग से वापसी का रास्ता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी. 

म्याँमार में चुनाव से पहले मानवाधिकारों की स्थिति पर ‘गम्भीर चिन्ता’

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने म्याँमार में मानवाधिकार हनन के मामलों और अल्पसंख्यक समुदायों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे सन्देश फैलने पर गहरी चिन्ता जताई है. मंगलवार को यूएन कार्यालय की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब म्याँमार में अगले महीने 8 नवम्बर को होने वाले आम चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं. 

रोहिंज्या संकट – सम्मेलन में वित्तीय मदद का संकल्प, दीर्घकालीन समाधान ढूँढने पर ज़ोर   

म्याँमार के विस्थापित रोहिंज्या समुदाय की मदद के लिये अन्तरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र की मेज़बानी में हुए एक दानदाता सम्मेलन में 60 करोड़ डॉलर की धनराशि के चन्दे का संकल्प लिया गया है. गुरुवार को यह सम्मेलन इस वादे के साथ समाप्त हो गया कि रोहिंज्या की पीड़ाओं का दीर्घकालीन समाधान निकालने के लिये सम्बद्ध देशों के साथ सम्वाद जारी रखा जाएगा. 

म्याँमार में दो लड़कों की मानव ढाल बनाए जाने के दौरान जघन्य मौत, यूएन एजेंसियों ने की तीखी आलोचना

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने उन दो लड़कों की जघन्य मौत पर गहरा शोक और सदमा प्रकट किया है जिन्हें उत्तरी प्रान्त राख़ीन में अक्टूबर के शुरुआती दिनों में सुरक्षा बलों ने कथित रूप में मानव ढाल (Human Shield)  के तौर पर इस्तेमाल किया था. 

म्याँमार: राख़ीन प्रान्त में हमलों में बच्चों की मौतों को रोकना होगा - मानवाधिकार विशेषज्ञ

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने मंगलवार को कहा है कि देश के राख़ीन प्रान्त में गाँवों पर सुरक्षा बलों के हमले तुरन्त रोकने होंगे, और तुरन्त संघर्षविराम घोषित होना चाहिये.

राहत का अभाव 'घातक' साबित हुआ - समुद्र में फँसे अनेक रोहिंज्या शरणार्थियों की मौत

अंडमान सागर में छह महीने से ज़्यादा समय तक फँसे रहने के बाद तीस से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों की मौत होने की आशंका जताई गई है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा है मुश्किल हालात से जूझ रहे लोगों को शरण देने के लिये देशों की सामूहिक अनिच्छा के परिणामस्वरूप यह घटना हुई है. 

म्याँमार: आगामी चुनाव समावेशी व लोकतान्त्रिक रास्ता अपनाने का एक अवसर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि म्याँमार की सरकार को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिये जिससे एक पूर्ण समावेशी लोकतान्त्रिक मार्ग प्रशस्त हो, और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे तकलीफ़देह बर्ताव और उनके मानवाधिकार उल्लंघन के मूलभूत कारणों का हल निकाला जा सके.

रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

रोहिंज्या शरणार्थी, 3 साल बाद, पहले से कहीं ज़्यादा असहाय

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों का कहना है कि तीन साल पहले म्याँमार में रहने वाले रोहिंज्या लोगों को उनके घरों से बाहर निकाल दिया गया था जिसके बाद उन्हें सीमा पार बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी थी. रोहिंज्या शरणार्थी संकट के तीन वर्ष गुज़र जाने के बाद भी बेघर रोहिंज्या महिलाएँ, पुरुष और बच्चे पहले से कहीं ज़्यादा असहाय हालात में हैं.

रोहिंज्या संकट का स्थायी समाधान ढूँढने की आवश्यकता पर बल

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने विस्थापित और राष्ट्रविहीन रोहिंज्या समुदाय के लिये अपील जारी करते हुए कहा है कि म्याँमार और अन्य देशों में रह रहे रोहिंज्या समुदाय के लोगों की पीड़ाओं को ना भुलाकर उनकी मुश्किलों का स्थायी हल निकाला जाना होगा. तीन वर्ष पहले अगस्त 2017 में म्याँमार में दमनकारी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण ली थी. लेकिन उनके समक्ष आज भी चुनौतियाँ हैं जिन्हें कोविड-19 महामारी ने और भी गम्भीर बना दिया है.