रोहिंज्या

म्यांमार की सेना पर सुनियोजित ढंग से यौन हिंसा और प्रताड़ना के आरोप

संयुक्त राष्ट्र के ‘इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग मिशन’ ने कहा है कि म्यांमार की सेना ने देश के जातीय अल्पसंख्यकों को आतंकित और दंडित करने के लिए यौन और लिंग आधारित हिंसा का सहारा लिया है जिसे रोका जाना होगा. अपनी नई रिपोर्ट में मिशन ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 में राखीन प्रांत में हिंसा का क्रूर स्वरूप दर्शाता है कि सेना की मंशा रोहिंज्या समुदाय को बर्बाद करने की थी.

रोहिंज्या शरणार्थियों की एक 'पूरी पीढ़ी की आशाएं दांव पर'

म्यांमार से भागकर बांग्लादेश आने वाले रोहिंज्या शरणार्थी दैनिक जीवन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं जिस वजह से एक पूरी पीढ़ी में हताशा घर कर रही है और आशाएं धूमिल हो रही हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है कि इस पीढ़ी की उम्मीदों पर खरा उतरने के काम में विफल होने का जोखिम कोई विकल्प नहीं है.

बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थियों को बायोमैट्रिक पहचान-पत्र

बांग्लादेश में रह रहे रोहिंज्या शरणार्थियों के लिए बायोमैट्रिक पंजीकरण अभियान के तहत स्थानीय प्रशासन और यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की ओर से पहचान-पत्र जारी किए गए हैं. उम्मीद जताई गई है कि शरणार्थियों पर सटीक जानकारी एकत्र करने से उन्हें लक्षित ढंग से मदद मुहैया कराई जा सकेगी.

म्यांमार की सेना की व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक की माँग

म्यांमार की सेना पर आरोप लगा है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर व्यापार के ज़रिए सेना जो धन एकत्र कर रही है उसका इस्तेमाल मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को अंजाम देने में किया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के स्वंतत्र समूह की एक नई रिपोर्ट में म्यांमार में सेना के व्यापारिक हितों को गहराई से परखा गया है और ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है.