रोहिंज्या

कोविड-19: रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में घनी आबादी है चिन्ता का सबब

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में घनी आबादी वाले रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में कोरोवनावायरस संक्रमण के फैलाव के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर चार हो गई है जिससे चिन्ताएँ बढ़ गई हैं. यूएन एजेंसियों ने आठ लाख 60 हज़ार से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों को पनाह देने वाले इन शिविरों में कोविड-19 से बचाव के लिए स्वास्थ्य तैयारियाँ और बचाव उपाय तेज़ कर दिए हैं. 

बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थी शिविर में कोरोनावायरस की दस्तक

बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों वाले इलाक़ों में वैश्विक महामारी कोविड-19 के मामले की पुष्टि होने के बाद संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसियों ने राहत और ऐहतियात के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है. साथ ही बीमारी के व्यापक फैलाव को रोकने के लिए 32 करोड़ डॉलर की धनराशि की अपील की है. 

रोहिंज्या शिविरों में ऐहतियाती तैयारियाँ

म्याँमार में 2017 में भड़की हिंसा व सुरक्षा बलों के दमन से बचकर भागे लगभग साढ़े सात लाख रोहिंज्या शरणार्थी बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. वहाँ पहले से लाखों अन्य रोहिंज्या शरणार्थी भी रहे हैं जिन्हें मिलाकर ये विशालतम शरणार्थी बस्ती बन गई है. यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने इस भीड़ भरी बस्ती में कोविड-19 महामारी के फैलने की आशंका के बीच यूएन ख़ास तैयारियाँ की हैं. देखें वीडियो फ़ीचर...

रोहिंज्या पर समुद्री मुसीबत, हमदर्दी और दयालुता दिखाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR आश्रय स्थल के ज़रूरतमन्दों के प्रति हमदर्दी और दयालुता दिखाने की पुकार लगाई है. एजेंसी ने ये आहवान उस घटना के बाद किया है जिसमें म्याँमार से सुरक्षा के लिए निकले कम से कम 30 रोहिंज्या लोगों की बंगाल की खाड़ी में डूब जाने से मौत हो गई. ये लोग उस नाव में सवार थे जो लगभग दो महीने से समुद्र में ही ठहरी हुई थी क्योंकि उसे किसी देश में किनारे पर पहुँचने की इजाज़त नहीं मिली थी.

म्यांमार में लोकतंत्र है 'ढलान' पर, मानवाधिकार विशेषज्ञ की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ यैंगही ली ने कहा है कि म्यांमार में हर दिन हो रही लड़ाई, इंटरनेट पर नियंत्रण की घटनाएं और रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदियां दर्शाती है कि देश में लोकतांत्रिक शासन ढलान के रास्ते पर है.  

'म्याँमार की तरफ़ से रोहिंज्या शरणार्थियों की वापसी के लिए समुचित प्रयास नहीं'

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों व साझेदार ग़ैर-सरकारी संगठनों ने रोहिंज्या मानवीय संकट से निपटने के प्रयासों के तहत वर्ष ‘2020 साझा कार्रवाई योजना’ (2020 ज्वाइंट रिस्पॉन्स प्लान) पेश किया है. इस अपील में 87 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि म्यांमार से आए आठ लाख 55 हज़ार से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों और उन्हें शरण दे रहे बांग्लादेश में चार लाख स्थानीय लोगों की ज़रूरतें भी पूरी की जा सकें.

रोहिंज्या मामले पर आईसीजे का म्याँमार को 'अस्थाई आदेश'

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने  म्याँमार से देश में अल्पसंख्यक रोहिंज्या समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव क़दम उठाने को कहा है.  कोर्ट ने गुरूवार को एक 'अस्थाई आदेश' जारी करके जनसंहार के अपराधों से संबंधित तथ्यों को नष्ट होने से बचाने की व्यवस्था करने का भी आग्रह किया. उन उपायों के बारे में पहली रिपोर्ट चार महीने के भीतर और फिर इस मामले में कोर्ट का अंतिम फ़ैसला आने तक हर छह महीने में रिपोर्ट जारी करके इन उपायों का ब्यौरा कोर्ट को देने का भी आदेश दिया गया है...

म्याँमार: रोहिंज्या व लोकतांत्रिक बदलावों के लिए उम्मीद बची है

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ यैंगही ली ने कहा है कि म्याँमार को अलबत्ता संभवतः जनसंहार के अपराधों सहित अंतरराष्ट्रीय अपराधों के “गंभीर आरोपों” का समाधान निकालना है, फिर भी उन्होंने देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. इन आरोपों में संभावित जनसंहार के आरोप भी शामिल हैं.  

आँग सान सू ची - आईसीजे में

म्याँमार के रख़ाइन प्रान्त में रोहिंज्या आबादी के जनसंहार करने के कथित अपराधों के आरोप में गांबिया ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में मुकदमा दायर किया. इस मुक़दमे पर दिसंबर 2019 में सुनवाई हुई. म्याँमार की राजनैतिक नेता आँग सान सू ची ने न्यायालय में पेश होकर अपने देश का बचाव किया.

आंग सान सू ची ने जनसंहार के आरोपों में किया म्याँमार का बचाव

म्याँमार की राजनैतिक नेता आँग सान सू ची ने संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पेश होते हुए कहा है कि उनका देश राख़ीन प्रांत में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को क़तई बर्दाश्त नहीं करेगा और अगर युद्धापराध हुए हैं तो सेना पर मुक़दमा चलाया जाएगा. ग़ौरतलब है कि गांबिया ने म्याँमार की सेना पर रोहिंज्या लोगों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार करने और युद्धापराधों के आरोपों में आईसीजे में मुक़दमा दायर किया है.