पत्रकार

2020 में 62 पत्रकारों को, अपने पेशे के कारण खोनी पड़ी अपनी ज़िन्दगी

संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक संगठन – UNESCO के अनुसार, केवल वर्ष 2020 के दौरान ही, 62 पत्रकारों की हत्या, उनके कामकाज के कारण कर दी गई थी. ये संगठन मीडियाकर्मियों की सुरक्षा के लिये भी काम करता है. संगठन के अनुसार वर्ष 2006 और 2020 के बीच, 1200 से भी ज़्यादा मीडियाकर्मियों को, अपना कामकाज करने के लिये अपनी जान गँवानी पड़ी.

कोविड संकटों ने, लोकतंत्र की मज़बूती को उजागर किया है, यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर से, भविष्य में संकटों का सामना करने के लिये, लोकतांत्रिक सहनक्षमता मज़बूत करने की ख़ातिर, पिछले 18 महीनों के दौर व घटनाओं से सबक सीखने का आग्रह किया है.

बेलारूस: विमान को जबरन उतारे जाने व पत्रकार की गिरफ़्तारी पर गहरी चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बेलारूस में एक यात्री विमान को जबरन उतारे जाने और उसके बाद सरकार के विरुद्ध कथित रूप से मुखर पत्रकार को हिरासत में लिये जाने पर गहरी चिन्ता जताई है.

रोहिंज्या द्वारा, रोहिंज्याओं के लिये, एक अनूठा फ़िल्म स्कूल

फ़ारुक़ मोहम्मद एक रोहिंज्या शरणार्थी हैं, और बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में ‘उमर फ़िल्म स्कूल’ के सह-संस्थापक हैं. यह स्कूल, अनौपचारिक रूप से युवा रोहिंज्या शरणार्थियों को फ़ोटोग्राफी और वीडियोग्राफ़ी में प्रशिक्षित करता है, ताकि वे अपनी कहानियों को ख़ुद बयाँ करने में सक्षम हो सकें. कोविड-19 महामारी की शुरूआत से ही, यह फ़िल्म स्कूल, शरणार्थी समुदाय में वायरस के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिशों में जुटा है. 33-वर्षीय फ़ारुक़ मोहम्मद ने यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के साथ अपने सफ़र और भविष्य के लिये उम्मीदों को साझा किया है...

अफ़ग़ानिस्तान: तीन वर्षों में 65 मीडियाकर्मियों व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गँवानी पड़ी ज़िन्दगी

हाल के वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मीडियाकर्मियों पर हमलों और उनके मारे जाने की घटनाओं में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2018 से अब तक देश में 65 पत्रकार, मीडियाकर्मी और मानवाधिकार कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं. सितम्बर 2020 में अफ़ग़ान शान्ति प्रक्रिया की शुरुआत के बाद से 31 जनवरी 2021 तक कम से कम 11 मानवाधिकार कार्यकर्ता और मीडियाकर्मी लक्षित हमलों में मारे गए हैं. 

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन 24 दिसम्बर 2020

इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ.

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पत्रकारों पर हमलों में दण्ड निडरता

वर्ष 2020 में पत्रकारों के ख़िलाफ़ अपराधों के मामलों में दण्ड निडरता की दर में मामूली गिरावट तो आई है लेकिन अब भी विश्व भर में ऐसे 87 फ़ीसदी मामले अनसुलझे हैं. प्रैस स्वतन्त्रता की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाने वाली यूएन एजेंसी - संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. 

'पत्रकारों पर हमलों की क़ीमत समाजों को चुकानी पड़ती है'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि जब पत्रकारों को हमलों को निशाना बनाया जाता है तो समूचे समाजों को क़ीमत चुकानी पड़ती है. यूएन प्रमुख ने सोमवार को 'पत्रकारों के ख़िलाफ़ दण्ड निडरता का अन्त' करने के लिये मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ये बात कही है. 

पाकिस्तान: पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काये जाने पर चिन्ता 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने पाकिस्तान में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, विशेषत: महिलाओं व अल्पसंख्यकों, के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काये जाने के बढ़ते मामलों पर चिन्ता जताई है. यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कथित ईशनिन्दा के आरोपों को ख़ास तौर पर चिन्ताजनक क़रार दिया है और हिंसा के लिये ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय किये जाने का आग्रह किया है. 

महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ लैंगिक हिंसा का ख़ात्मा ज़रूरी

महिला पत्रकारों को अपने कामकाज के दौरान विशेष ख़तरों का सामना करना पड़ता है, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया है कि सरकारों को महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए और अधिक क़दम उठाने की ज़रूरत है.