प्रवासन

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 13 नवम्बर 2020

इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

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कोविड-19: खाद्य असुरक्षा और विस्थापन बढ़े

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के समय ही रिकॉर्ड स्तर पर रही वैश्विक भुखमरी और आबादी के विस्थापन की स्थिति और ज़्यादा ख़राब हो सकती है क्योंकि प्रवासी जन व बाहर से भेजी जाने वाली रक़म पर निर्भर लोगों को अपने परिवारों की गुज़र-बसर चलाने की ख़ातिर कामकाज पाने के लिये मजबूर होना पड़ रहा.

शरणार्थी पुनर्वास: अभी कम हैं मददगार हाथ!

दुनिया भर में वैसे तो लगभग 14 लाख शरणार्थी ऐसे हैं जिन्हें पुनर्वास की तुरंत ज़रूरत है मगर केवल 63 हज़ार 696 को ही वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के ज़रिए फिर से ज़िन्दगी शुरू करने का मौक़ा मिला. ये शरणार्थियों की कुल संख्या का केवल साढ़े चार प्रतिशत हिस्सा है. कारण है कि दुनिया भर में सरकारों की तरफ़ से इन शरणार्थियों को पुनर्वास की समुचित पेशकश नहीं हो रही है.

भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम के 'भेदभावपूर्ण होने की चिंता'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने भारत के नए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 पर चिंता जताते हुए कहा है कि ये बुनियादी तौर पर भेदभावपूर्ण है. ग़ौरतलब है कि ये अधिनियम भारतीय संसद द्वारा हाल ही में पारित हुआ और राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के बाद क़ानून बना है.

ख़तरनाक समुद्री यात्राएं फिर करने से नहीं हिचकेंगे अफ़्रीकी प्रवासी

जोखिम भरे समुद्री मार्गों से होकर अफ़्रीका से यूरोप तक की ख़तरों भरी यात्राओं में अब तक हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के एक नए अध्ययन के अनुसार 93 फ़ीसदी अफ़्रीकी प्रवासियों का कहना है कि अगर ज़रूरत हुई तो अपनी जान को जोखिम में डाल कर वे ऐसी यात्राएं फिर करने के लिए तैयार हैं.

प्रवासी संख्या में जनसंख्या वृद्धि की गति से भी तेज़ बढ़ोत्तरी

दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 27 करोड़ 20 लाख हो गई है जिसने विश्व  की जनसंख्या वृद्धि की दर को भी पीछे छोड़ दिया है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) की नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर क्षेत्र में प्रवासियों की संख्या बढ़ने का रुझान सामने आ रहा है.

चार करोड़ लोग दासता के दंश का शिकार

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ उर्मिला भूला ने जिनीवा में मानवाधिकार परिषद में सोमवार को आगाह किया कि दासता के आधुनिक स्वरूप के मामलों के आने वाले दिनों में बढ़ने की संभावना है. इस संबंध में परिषद को एक रिपोर्ट सौंपते हुए उन्होंने कहा कि कामकाज के क्षेत्र में आ रहे बदलावों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के परिणामस्वरूप ऐसा होगा.

कोलंबिया में वेनेज़ुएला के बच्चों को मिला नागरिकता अधिकार

संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी (IOM) ने कोलंबिया के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें वहां जन्म लेने वाले वेनेज़ुएला के 24 हज़ार से ज़्यादा बच्चों को कोलंबिया की नागरिकता का अधिकार दिए जाने की घोषणा की गई है. वेनेज़ुएला में राजनैतिक संकट की वजह से लाखों लोगों ने कोलंबिया में शरण ली हुई है और इस क़दम से उन माता-पिता को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है जिनके बच्चे कोलंबिया में पैदा हुए हैं.  

प्रवासन व जलवायु संकट: टिकाऊ समाधान की तलाश

पूरे मानव इतिहास पर नज़र डालें तो प्रवासन और जलवायु को हमेशा एक दूसरे से जुड़ा हुआ पाएंगे लेकिन आधुनिक दौर में मानव निर्मित जलवायु संकट के गंभीर प्रभाव पूरी मानव जाति के रहन-सहन का सिलसिला व्यापक रूप से बदलने वाले हैं.

'प्रवासन और टिकाऊ विकास में निकट संबंध'

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फ़र्नान्डा एस्पिनोसा ने कहा है कि प्रवासन और टिकाऊ विकास के मुद्दे गहराई तक आपस में जुड़े हुए हैं.. ऐसे में टिकाऊ विकास लक्ष्यों से जुड़ा संयुक्त राष्ट्र का 2030 एजेंडा तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक उसमें व्यापक रूप से प्रवासियों को सम्मिलित न किया जाए.