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2020: प्रवासियों और शरणार्थियों पर, कोरोनावायरस की घातक मार

वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी का प्रभाव शरणार्थियों और प्रवासियों पर भी बहुत व्यापक रूप में पड़ा; भीड़ भरे शिविरों में, वायरस की चपेट में आने के बहुत बड़े जोखिम से लेकर, यात्राओं पर लगी पाबन्दियों के कारण फँस जाने, और आपराधिक गुटों का निशाना बनने तक... 

बोसनिया हरज़ेगोविना: 'प्रवासियों के जीवन को तत्काल ख़तरा'

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और मानवीय सहायता साझीदार संगठनों ने बोसनिया हरज़ेगोविना में, बर्फ़ीले तापमान और कड़ाके की सर्दी के मौसम में फँसे और आश्रय हीन सैकड़ों प्रवासियों की मदद करने के लिये, देश के प्रशासन से तुरन्त कार्रवाई करने का आहवान किया है.

शरणार्थी उच्चायुक्त की चुनौती: अन्तरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें 'बेकार' करके दिखाए तो मानें

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रमुख फ़िलिपो ग्रैण्डी ने विश्व नेताओं को चुनौती देने के अन्दाज़ में कहा है कि अगर वो चाहें तो, युद्ध और असुरक्षा के कारण, करोड़ों लोगों को अपने घर छोड़कर दर-दर भटकने के लिये मजबूर करने वाले कारणों के हल निकालकर, शरणार्थी एजेंसी के कामकाज को बेमानी साबित कर सकते हैं.

आप्रवासी कामगारों को, स्थानीय लोगों की तुलना में, बहुत कम मेहनताना

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा है कि आप्रवासियों और स्थानीय या राष्ट्रीय कामगारों को मिलने वाले वेतन या मेहनताना के बीच काफ़ी बड़ा अन्तर है और ये अन्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, यहाँ तक कि कोविड-19 महामारी के प्रभावों के कारण ये अन्तर और भी ज़्यादा बड़ा हो सकता है.

कोविड के दौर में, प्रवासियों की चुनौतियों के बीच मददगार चलन भी बढ़ा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन के बारे में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के लिये जो एक व्यापक फ्रेमवर्क – प्रवासियों के लिये ग्लोबल कॉम्पैक्ट के रूप में, देशों ने 2018 में अपनाया था, वो बहुत शानदार तरीक़े से अपनी जड़ें जमा रहा है.

वैश्विक संकट से उबरने के लिये ज़्यादा समानता बहुत ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि पार-अटलाण्टिक दास व्यापार के प्रभावों की स्वीकार्यता, लोगों को दास बनाए जाने के चलन व उपनिवेशवाद की समीक्षा और मूल्याँकन के सन्दर्भ में बात करें तो नस्लवाद, पूर्वाग्रह व नफ़रत और असहिष्णुता के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2001 में हुआ डर्बन विश्व सम्मेलन एक मील का पत्थर साबित हुआ है.

फँसे हुए प्रवासियों को सुरक्षित व गरिमामय वतन वापसी की दरकार – यूएन समिति

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक आयोग ने गुरुवार को आग्रह किया है कि सरकारों को उन प्रवासी कामगारों की मुश्किलों का तत्काल समाधान करना होगा जिन्हें अमानवीय परिस्थितियों में हिरासत में रखा गया है. इन प्रवासी कामकारों पर कोरोनावायरस फैलाने का दोष भी मढ़ा गया है.

कोविड-19: महामारी के बाद की दुनिया में प्रवासी श्रमिकों का अनिश्चित भविष्य

कोविड-19 महामारी के कारण प्रवासन पर बड़े पैमाने पर रोक लग गई है, लेकिन क्या मौजूदा संकट ख़त्म होते ही लोगों का आवागमन फिर शुरू हो जाएगा? संयुक्त राष्ट्र श्रम एजेंसी (ILO) के एक वरिष्ठ अधिकारी गैरी रिनहार्ट यूएन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में बताते हैं कि अभी क्यों "सामान्य" हालात बहाल होने की सम्भावना नहीं है. साथ ही, हो सकता है कि प्रवासियों को एक बहुत ही अलग तरह के श्रम बाज़ार का सामना करना पड़े.

ग्रीस द्वीप में नई आग लगने से बचे-कुछे आवास भी नष्ट, हज़ारों लोग बेघर

ग्रीस के एक द्वीपीय केन्द्र लेसबॉस में नए सिरे से लगी आग ने वहाँ ठहराए गए हज़ारों शरणार्थियों व प्रसावियों के लिये आवासों को नष्ट कर दिया है. इससे पहले मंगलवार शाम को भी वहाँ आग लग चुकी है जिसमें बड़ी संख्या में इन शरणार्थियों व प्रवासियों के आवासों को नुक़सान पहुँचा था.

कोविड-19: वर्तमान स्थिति पर चिन्तन और भविष्य के आकलन का समय

जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भारत भी कोविड संकट से जूझ रहा है. अपनी विशिष्ट संस्कृति और जनसंख्या समूहों के कारण यहाँ की चुनौतियाँ भी अभूतपूर्व हैं. एक अरब 37 करोड़ की आबादी वाला ये देश दुनिया की सबसे युवा आबादी का भी प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में, कोविड-19 के ख़त्म होने के बाद देश के सकारात्मक पहलुओं को समन्वित करके, किस तरह चुनौतियों से निपटा जाए – 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' पर इन्हीं मुद्दों पर प्रकाश डालता भारत में यूएनएफ़पीए की प्रतिनिधि, अर्जेंटीना मातावेल का ब्लॉग.