पृथ्वी

भावी पीढ़ियों के लिए मूल भाषाओं में प्राण फूंकने की पुकार

हाल के दशकों में पुरखों के ज़माने से चली आ रही सैंकड़ों भाषाएं धीरे धीरे शांत होने लगी हैं. उन्हीं के साथ विलुप्त हो गई है उन्हें बोलने वाले लोगों की संस्कृति, ज्ञान और परंपराएं. जो भाषाएं बच गईं हैं उन्हें संरक्षित रखने और नए प्राण फूंकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने मूल भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष की आधिकारिक शुरुआत की है.