पृथ्वी

तापमान 3 डिग्री के उछाल की राह पर, जलवायु लक्ष्य हासिल हुए तब भी

वर्ष 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों और संकल्पों को हासिल भी कर लिया जाए तो भी दुनिया तापमान में 3.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी की राह पर आगे बढ़ रही है.  जिसका मतलब होगा कि दुनिया में जलवायु परिवर्तन के और भी ज़्यादा व्यापक व विनाशकारी प्रभाव होंगे, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने ये चेतावनी वार्षिक कार्बन अंतर रिपोर्ट में मंगलवार को जारी की है.

जलवायु परिवर्तन का असर बहुत तेज़ और गहरा - सम्मेलन से पहले विशेषज्ञों की चेतावनी

शीर्ष वैज्ञानिकों ने रविवार को एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान समद्रों का बढ़ता जल स्तर, गरम होती ज़मीन, सिकुड़ती बर्फ़ चादरें और कार्बन प्रदूषण ने विश्व के राजनैतिक नेताओं से जलवायु कार्रवाई की पुकार को और ज़्यादा ज़ोरदार बना दिया है.

'अगर पृथ्वी को बचाना है तो भूमि को बचाएं, अर्थव्यवस्था में जान फूँकें'

भूमि को बंजर होने से बचाकर उपजाऊ बनाने में ज़्यादा संसाधन निवेश करने से ना सिर्फ़ पृथ्वी ग्रह को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी, बल्कि वर्तमान के कुछ सबसे बड़े मुद्दों का समाधान तलाश करने की भी शुरुआत हो सकती है. दुनिया भर में मरुस्थलीकरण के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहीम चियाओ ने नई दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के ज़रिए पत्रकारों से बातचीत में ये बात कही है. इस विषय पर 14 वां वैश्विक सत्र 2 से 13 सितंबर तक राजधानी दिल्ली में हो रहा है.

 

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास पर ज़ोर

अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया में सभी के लिए टिकाऊ और न्योयचित भविष्य के निर्माण का सर्वश्रेष्ठ रास्ता तलाशने पर चर्चा हुई. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए शिक्षा और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देने अहम माना गया है. जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए इस साल सितंबर में न्यूय़ॉर्क में अंतरराष्ट्रीय शिखर वार्ता होनी है.

भावी पीढ़ियों के लिए मूल भाषाओं में प्राण फूंकने की पुकार

हाल के दशकों में पुरखों के ज़माने से चली आ रही सैंकड़ों भाषाएं धीरे धीरे शांत होने लगी हैं. उन्हीं के साथ विलुप्त हो गई है उन्हें बोलने वाले लोगों की संस्कृति, ज्ञान और परंपराएं. जो भाषाएं बच गईं हैं उन्हें संरक्षित रखने और नए प्राण फूंकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने मूल भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष की आधिकारिक शुरुआत की है.