प्रगति

एशिया-प्रशान्त देशों से, इनसानों व पृथ्वी को प्राथमिकता देने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एशिया व प्रशान्त क्षेत्र के देशों का आहवान किया है कि वो कोविड-19 महामारी से उबरने के अपने प्रयास व रणनीति, पुराने पड़ चुके और अरक्षणीय आर्थिक ढाँचों पर आधारित ना करें. उन्होंने साथ ही ये पुकार भी लगाई  है कि विश्व की सबसे ज़्यादा आबादी वाले इस क्षेत्र में, पर्यावरण का संरक्षण हो और सभी को अवसर मिलें.

सामाजिक न्याय दिवस: एक नज़र महिलाओं के साथ भेदभाव पर...

20 फ़रवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है. इस वर्ष, इस दिवस के साथ ही, दुनिया एक नए दशक में क़दम रख रही है, और इसका अर्थ है कि हमारे पास, टिकाऊ विकास लक्ष्यों का लैंगिक समानता पर वैश्विक लक्ष्य #5, हासिल करने के लिये केवल 10 वर्ष का समय बचा है. दुख के साथ कहना पड़ता है कि हमें अभी लम्बा रास्ता तय करना है. यहाँ तक कि भोजन जैसी बुनियादी आवश्यकता पूरी करने के लिये भी, विश्व के लगभग दो तिहाई देशों में, ऐसी अधिक सम्भावना है कि पुरुषों की तुलना में ज़्यादा महिलाएँ, भूख और खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगी.

संयुक्त राष्ट्र कैसे करता है संघर्ष रोकथाम व निवारण

जब सदस्य देशों ने 75 वर्ष पहले यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किये थे, इसका मक़सद आने वाली पीढ़ियों को तीसरे विश्व युद्ध से बचाना था. इसका मक़सद संघर्ष टालना व रोकना भी था. इसलिये संयुक्त राष्ट्र के लिये संघर्ष निवारण अब भी एक केन्द्रीय प्राथमिकता है. फिर भी, सम्बन्ध पक्षों को शान्ति के लिये राज़ी करना बहुत कठिन काम है, ख़ासतौर से तब, जब वो शान्ति नहीं चाहते हों.

सरकारी शिक्षा ख़र्च में 'शर्मनाक विषमताओं" को दूर करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़रीब परिवारों की एक तिहाई किशोरी लड़कियों को कभी स्कूली शिक्षा की सुविधा हासिल नहीं हुई और शिक्षा पर ख़र्च धनी परिवारों की तरफ़ भारी रूप में झुका हुआ है.

जलवायु संकट से जीवन की गुणवत्ता प्रभावित, बढ़ रहा है असंतोष

जलवायु संकट, दुनिया भर में लगातार जारी गंभीर विषमताएँ, खाद्य असुरक्षा के बढ़ते स्तर और कुपोषण जैसी स्थितियाँ बहुत से समाजों में लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं जिनके कारण असंतोष भी बढ़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र की विश्व आर्थिक स्थिति व संभावनाओं पर वर्ष 2020 की रिपोर्ट में ये आकलन पेश किया गया है. रिपोर्ट के लेखकों ने संकट का सामना करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव करने का आहवान किया है.  

भ्रष्टाचार का दानव लील रहा है विकास की संभावनाएँ, एकजुटता की ज़रूरत

विश्व भर में हर साल खरबों डॉलर की रक़म या तो रिश्वतख़ोरी या फिर भ्रष्ट तरीकों की भेंट चढ़ जाती है जिससे क़ानून के शासन की अहमियत तो कम होती ही है, साथ ही मादक पदार्थों, हथियारों और लोगों की अवैध तस्करी को भी बढ़ावा मिलता है. हर साल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाली खरबों डॉलर की ये रक़म वैश्विक घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 5 फ़ीसदी के बराबर है. भ्रष्टाचार से एक बेहतर दुनिया बनाने के प्रयासों के रास्ते में भारी रुकावट पैदा होती है.

गहराई से जुड़े हैं आपदा जोखिम प्रबंधन और जलवायु कार्रवाई के तार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि आपदा जोखिम को कम करने और जलवायु आपदा के नुक़सानों के ख़िलाफ़ मज़बूती हासिल करने के बीच बहुत दमदार आर्थिक दलील है. महासचिव ने आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ये संदेश दिया है. ये दिवस सोमवार 14 अक्तूबर मनाया जा रहा है.