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कोविड संकटों ने, लोकतंत्र की मज़बूती को उजागर किया है, यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर से, भविष्य में संकटों का सामना करने के लिये, लोकतांत्रिक सहनक्षमता मज़बूत करने की ख़ातिर, पिछले 18 महीनों के दौर व घटनाओं से सबक सीखने का आग्रह किया है.

'मीडिया-लोकतांत्रिक समाजों की आधारशिला'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को तमाम देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि वो स्वतंत्र, निष्पक्ष और विविधतापूर्ण मीडिया को समर्थन व सहयोग देने के लिये, वो सब सुनिश्चित करें, जो उनकी शक्ति के अन्तर्गत किया जा सकता है. यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने भी मीडिया को, “लोकतांत्रिक समाजों की आधारशिला” बताया है.

प्रेस लोकतांत्रिक समाजों की आधारशिला, विश्व दिवस पर यूएन

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को तमाम देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि वो स्वतंत्र, निष्पक्ष और विविधतापूर्ण मीडिया को समर्थन व सहयोग देने के लिये, वो सब सुनिश्चित करें, जो उनकी शक्ति के अन्तर्गत किया जा सकता है. यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने भी मीडिया को, “लोकतांत्रिक समाजों की आधारशिला” बताया है.

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन 24 दिसम्बर 2020

इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ.

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प्रेस आज़ादी पहले से कहीं ज़्यादा अहम, 59 मीडियाकर्मियों की हत्याओं की निन्दा

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन (UNESCO) ने बताया है कि वर्ष 2020 के दौरान, अभी तक कम से कम 59 मीडियाकर्मी मारे गए हैं, जिनमें चार महिलाएँ भी हैं. संगठन ने बुधवार को ये आँकड़े जारी करते हुए, सूचना प्राप्ति और तथ्यात्मक पत्रकारिता को एक सार्वजनिक अच्छाई के रूप में क़ायम रखने के समर्थन में खड़े होने की पुकार भी लगाई.

प्रेस स्वतन्त्रता सम्मेलन: सच को झूठ से अलग दिखाने के ख़तरनाक काम' पर ध्यान

दुनिया भर के प्रख्यात पत्रकार और प्रेस स्वतन्त्रता के पैरोकार (चैम्पियन्स), मीडिया के सामने मौजूद बढ़ती चुनौतियों पर पार पाने के रास्तों की जाँच-पड़ताल, दो दिन के एक सम्मेलन में कर रहे हैं. इस ऑनलाइन सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र सांस्कृतिक और शैक्षणिक एजेंसी – यूनेस्को और नैदरलैण्ड ने किया है.

पत्रकारों के लिए दुनिया में हर स्थान है जोखिम भरा

दुनिया भर में लोक हित के लिए आवाज़ बुलन्द करने वाले पत्रकारों को सभी स्थानों पर बहुत जोखिम का सामना करना पड़ रहा है और पत्रकारों की असुरक्षा के मामले में सबसे ज़्यादा ख़तरनाक़ लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र रहे जहाँ साल 2019 में 22 पत्रकारों की हत्याएँ हुईं. इस तरह प्रेस के लिए ये सबसे ज़्यादा ख़तनाक़ स्थान रहे. उनके बाद एशिया-प्रशांत में 15 ओर अरब देशों में 10 पत्रकारों की हत्याएं हुईं.