प्राकृतिक आपदा

एशिया-पैसेफ़िक देशों में प्राकृतिक आपदाओं की विकराल चुनौती

एशिया और पैसेफ़िक क्षेत्र में पर्यावरण क्षरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बदलते स्वरूपों और उनके घातक प्रभावों से ऐसी विनाशकारी घटनाओं के बार-बार होने की आशंका बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में स्थित देशों के लिए ऐसी आपदाओं का समय पर अनुमान लगाना और उनसे निपटने के लिए ज़रूरी तैयारी कर पाना मुश्किल साबित हो रहा है जो भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती का संकेत है.

दक्षिण एशिया में बारिश से जीवन अस्त-व्यस्त, अनेक की मौत

भारत, नेपाल और बांग्लादेश में मूसलाधार बारिश, भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक कम से कम 93 बच्चों की मौत हो चुकी है और लाखों लोगों की ज़िंदगियों पर जोखिम मंडरा रहा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावितों तक तत्काल राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.  साथ ही एहतियाती उपाय करने का आग्रह किया गया है.

'नींद से जगाने वाली चेतावनी' हैं मोज़ाम्बिक में तबाही लाने वाले तूफ़ान

मोज़ाम्बिक में ‘इडाई’ और ‘कैनेथ’ नामक चक्रवाती तूफ़ानों से हुई भयंकर तबाही जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से संवेदनशील देशों के लिए नींद से जगाने वाली घंटी है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान संस्था (WMO) ने कहा है कि उच्च तीव्रता वाले तूफ़ानों, तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और भारी बारिश से होने वाले नुक़सान से बचने के लिए सहनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता है.

ओडिशा के पुरी तट से टकराया 'फणी', बांग्लादेश में यूएन एजेंसियां सतर्क

हाल के दशकों में आए सबसे शक्तिशाली चक्रवाती तूफ़ानों में से एक ‘फणी’ ने शुक्रवार सुबह भारत के ओडिशा राज्य के पुरी ज़िले में दस्तक दी जिसके बाद वहां भारी बारिश के साथ 175 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चलीं.  ‘फणी’ चौथी श्रेणी का तूफ़ान है जिस पर यूएन एजेंसियां नज़र रख रही हैं और उसके बांग्लादेश पहुंचने से पहले वहां शरणार्थी परिवारों के लिए राहत इंतज़ामों में जुटी हैं. 

क़ुदरती हादसों से खरबों का नुक़सान

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले क़रीब 20 वर्षों के दौरान भूकम्प और सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से क़रीब 13 लाख लोगों की जान जा चुकी है.

अशान्ति से छिन रहे शिक्षा के अवसर

ये तो हम सभी जानते हैं कि बचपन एक इंसान के वजूद और आकार की बुनियाद होता है. साथ ही बचपन में सही परवरिश और शिक्षा ही उसके भविष्य का रास्ता तय करने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. लेकिन क्या किया जाए जब लड़ाई-झगड़े और प्राकृतिक आपदाएँ करोड़ों बच्चों से उनका बचपन और भविष्य दोनों ही छीन लें.