पोषण

कोविड-19: खाद्य असुरक्षा और विस्थापन बढ़े

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के समय ही रिकॉर्ड स्तर पर रही वैश्विक भुखमरी और आबादी के विस्थापन की स्थिति और ज़्यादा ख़राब हो सकती है क्योंकि प्रवासी जन व बाहर से भेजी जाने वाली रक़म पर निर्भर लोगों को अपने परिवारों की गुज़र-बसर चलाने की ख़ातिर कामकाज पाने के लिये मजबूर होना पड़ रहा.

करोड़ों को भरपेट भोजन मयस्सर नहीं, कोविड-19 बना मुसीबतों का पहाड़

वर्ष 2020 के दौरान भी दुनिया भर में करोड़ों लोगों को जीने के लिये काफ़ी बुनियादी भोजन ख़ुराक भी मयस्सर नहीं है क्योंकि जलवायु परिवर्तन और आर्थिक समस्याओं ने विश्व भर में भुखमरी का स्तर बढ़ा दिया है, और कोविड-19 महामारी ने तो ग़रीबी में मुसीबतों का पहाड़ ही खड़ा कर दिया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की एक ताज़ा रिपोर्ट में ये चिन्ता ज़ाहिर की गई है.

गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिये पोषक पदार्थ

Take home rations ऐसे ऊर्जावान खाद्य पदार्थ होते हैं, जो पोषण सुनिश्चित करने के मक़सद से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को खिलाए जाते हैं.

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शिक्षा: गर्म भोजन और कुछ ‘पौष्टिक पाउडर’

विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme) भारत में एक ऐसा अनूठा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके तहत स्कूल के बच्चों को सरकारी अपरान्ह भोजन योजना के साथ-साथ, पूर्ण पोषण सुनिश्चित करने के लिये विटामिन और खनिजों से भरपूर पोषक सहायक ख़ुराक दी जाती है. बच्चे प्यार से इसे ‘जादुई बुरादा’ कहते हैं. 

नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान है सर्वोत्तम आहार

शनिवार, 1 अगस्त, को ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ की शुरुआत हुई है जिसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक साझा अपील जारी करके स्तनपान से होने वाले फ़ायदों और उसके सही तरीक़ों से जुड़ी अहम जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिये परामर्श सेवाएँ सुनिश्चित किये जाने की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसी के मुताबिक नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह महीनों में सिर्फ़ स्तनपान कराना चाहिये और उसके बाद भी लगभग दो साल तक स्तनपान जारी रखने के प्रयास करने चाहिये.

भुखमरी के बढ़ते दायरे से टिकाऊ विकास लक्ष्य के लिए गहराती चुनौती

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बीते पाँच वर्षों में भुखमरी व कुपोषण के विभिन्न रूपों का शिकार लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है और कोविड-19 महामारी से यह समस्या और भी ज़्यादा विकराल रूप धारण कर सकती है. मौजूदा  हालात में टिकाऊ विकास एजेण्डा के तहत भुखमरी का अन्त करने का लक्ष्य पाने का रास्ता और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक सेहतमन्द आहार को किफ़ायती बनाने और करोड़ों लोगों तक उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने से स्वास्थ्य ख़र्चों को घटाने में मदद मिल सकती है. 

कोविड-19: खाद्य असुरक्षा का गहराता साया, तत्काल उपायों की पुकार

वैश्विक महामारी कोविड-19 से पहले ही लाखों-करोड़ों लोग भुखमरी और कुपोषण का शिकार थे लेकिन कोरोनावायरस संकट से हालात और बदतर हो सकते हैं, तत्काल कार्रवाई की नहीं की गई तो वैश्विक खाद्य आपात स्थिति पैदा हो सकती है.  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति पर गहरी चिन्ता जताते हुए मंगलवार को एक नीति-पत्र जारी किया है जिसमें इस चुनौती से निपटने के नीतिगत रास्ते सुझाए गए हैं. 

कोविड-19: स्कूली आहार बंद होने से 37 करोड़ बच्चों पर संकट

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने की आशंका से चिंता व्याप्त है. तालाबंदी के कारण स्कूल भी बंद हैं जिसके कारण करोड़ों बच्चे प्रभावित हुए हैं, ख़ासकर वो बच्चे जो अपने भोजन के लिए स्कूलों में मिलने वाले आहार पर निर्भर थे. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सरकारों से ऐसे 37 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य व पोषण संबंधी ज़रूरतों का ध्यान रखे जाने की अपील की है जिसके अभाव में उनके भविष्य पर हानिकारक असर होगा. 

सब-सहारा अफ़्रीका में भुखमरी का विकराल रूप

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि सब-सहारा देशों में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है और आगामी महीनों में ज़िम्बाब्वे, दक्षिण सूडान, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित अन्य देशों में लाखों लोगों का जीवन बचाने के लिए खाद्य सहायता की ज़रूरत होगी.

कुपोषण से निपटने का अनोखा नुस्ख़ा

भारत के मध्य प्रदेश में महिलाओं ने कुपोषण से निपटने का एक अनोखा तरीक़ा अपनाया है. ये महिलाएँ अपने बाग़ीचों में सात अलग-अलग सब्ज़ियाँ उगाते हैं जिससे उन्हें पूरे सप्ताह खनिज और विटामिनों से भरपूर ताज़ा सब्ज़ियाँ मिलती हैं और बीमारियाँ दूर रहती हैं...