पोषण

नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान है सर्वोत्तम आहार

शनिवार, 1 अगस्त, को ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ की शुरुआत हुई है जिसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक साझा अपील जारी करके स्तनपान से होने वाले फ़ायदों और उसके सही तरीक़ों से जुड़ी अहम जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिये परामर्श सेवाएँ सुनिश्चित किये जाने की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसी के मुताबिक नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह महीनों में सिर्फ़ स्तनपान कराना चाहिये और उसके बाद भी लगभग दो साल तक स्तनपान जारी रखने के प्रयास करने चाहिये.

भुखमरी के बढ़ते दायरे से टिकाऊ विकास लक्ष्य के लिए गहराती चुनौती

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बीते पाँच वर्षों में भुखमरी व कुपोषण के विभिन्न रूपों का शिकार लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है और कोविड-19 महामारी से यह समस्या और भी ज़्यादा विकराल रूप धारण कर सकती है. मौजूदा  हालात में टिकाऊ विकास एजेण्डा के तहत भुखमरी का अन्त करने का लक्ष्य पाने का रास्ता और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक सेहतमन्द आहार को किफ़ायती बनाने और करोड़ों लोगों तक उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने से स्वास्थ्य ख़र्चों को घटाने में मदद मिल सकती है. 

कोविड-19: खाद्य असुरक्षा का गहराता साया, तत्काल उपायों की पुकार

वैश्विक महामारी कोविड-19 से पहले ही लाखों-करोड़ों लोग भुखमरी और कुपोषण का शिकार थे लेकिन कोरोनावायरस संकट से हालात और बदतर हो सकते हैं, तत्काल कार्रवाई की नहीं की गई तो वैश्विक खाद्य आपात स्थिति पैदा हो सकती है.  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति पर गहरी चिन्ता जताते हुए मंगलवार को एक नीति-पत्र जारी किया है जिसमें इस चुनौती से निपटने के नीतिगत रास्ते सुझाए गए हैं. 

कोविड-19: स्कूली आहार बंद होने से 37 करोड़ बच्चों पर संकट

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने की आशंका से चिंता व्याप्त है. तालाबंदी के कारण स्कूल भी बंद हैं जिसके कारण करोड़ों बच्चे प्रभावित हुए हैं, ख़ासकर वो बच्चे जो अपने भोजन के लिए स्कूलों में मिलने वाले आहार पर निर्भर थे. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सरकारों से ऐसे 37 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य व पोषण संबंधी ज़रूरतों का ध्यान रखे जाने की अपील की है जिसके अभाव में उनके भविष्य पर हानिकारक असर होगा. 

सब-सहारा अफ़्रीका में भुखमरी का विकराल रूप

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि सब-सहारा देशों में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है और आगामी महीनों में ज़िम्बाब्वे, दक्षिण सूडान, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित अन्य देशों में लाखों लोगों का जीवन बचाने के लिए खाद्य सहायता की ज़रूरत होगी.

कुपोषण से निपटने का अनोखा नुस्ख़ा

भारत के मध्य प्रदेश में महिलाओं ने कुपोषण से निपटने का एक अनोखा तरीक़ा अपनाया है. ये महिलाएँ अपने बाग़ीचों में सात अलग-अलग सब्ज़ियाँ उगाते हैं जिससे उन्हें पूरे सप्ताह खनिज और विटामिनों से भरपूर ताज़ा सब्ज़ियाँ मिलती हैं और बीमारियाँ दूर रहती हैं...

विश्व भर में 82 करोड़ लोग भुखमरी से पीड़ित

दुनिया भर में पिछले तीन वर्षों में भुखमरी का शिकार लोगों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है – वर्तमान में हर नौ में से एक व्यक्ति भुखमरी से पीड़ित है. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) ने सोमवार को एक नई रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ़ फ़ूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड 2019’ जारी की है जिसमें यह जानकारी सामने आई है.

कम वज़नी बच्चों का जन्म बना बड़ी समस्या

एक नए शोध के अनुसार 2015 में विश्व भर में दो करोड़ से ज़्यादा कम वज़नी बच्चे पैदा हुए जिनका वज़न ढाई किलो से भी कम था. हर सात में से एक नवजात शिशु के अल्पवज़नी पैदा होने संबंधी तथ्य पहली बार सामने आए हैं जो एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती की ओर इशारा करते हैं. इससे निपटने के लिए और निवेश किए जाने सहित व्यापक पैमाने पर प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है.

 

11 करोड़ से ज़्यादा लोगों को नहीं मिला पर्याप्त भोजन

दुनिया के 53 देशों में पिछले साल 11 करोड़ से ज़्यादा लोगों को ज़रूरत के अनुसार पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाया जिससे उनकी जान पर ख़तरा मंडराता रहा. 2017 में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 12 करोड़ थी. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और यूरोपीय संघ की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में ये तथ्य उभरकर सामने आए हैं.

कुपोषण से लड़ाई में मिला निजी क्षेत्र का समर्थन

भारत में बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के लिए निजी क्षेत्र के समर्थन को जुटाने के लक्ष्य से एक नई पहल 'इम्पैक्ट फॉर न्यूट्रिशन' की शुरुआत हुई है. यह एक ऐसे मंच के तौर पर काम करेगा जिससे निजी कंपनियों के पास पोषण अभियान का हिस्सा बनने और परिवारों को कुपोषण से मुक्ति दिला कर बदलाव लाने का अवसर होगा.