प्लास्टिक

प्लास्टिक के विकल्प की तलाश

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रयासों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिये विभिन्न देशों के 17 युवाओं को एसडीजी चैम्पियन घोषित किया है. इन्हीं में से एक हैं, बांग्लादेश के ज़हीन रज़ीन. टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अपना योगदान देने के बारे में उनके काम, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में उनके विचार, उन्हीं की ज़ुबानी... (वीडियो)

'यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ' के फ़ाइनलिस्ट - पूरव देसाई

पर्यावरण को बेहतर बनाने के क्षेत्र में नवाचार वाले समाधान तलाश करने के लिये 2020 के 'यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ' की अन्तिम सूची में दुनिया भर से 35 युवा होनहार चुने गए हैं जिनमें भारत के पूरव देसाई भी हैं.  क्या है उनका असाधारण व नवाचार वाला काम, जानिये इस वीडियो में...

कोविड-19: पर्यटन सैक्टर की बेहतर पुनर्बहाली के लिये सिफ़ारिशें पेश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से पर्यटन सैक्टर पर भारी असर हुआ है और 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों के रोज़गारों के पर संकट मँडरा रहा है. कोरोनावायरस संकट से बेहतर ढँग से उबरने के लिये संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने नई सिफ़ारिशें जारी की हैं जिनमें पर्यटन क्षेत्र की मज़बूत पुनर्बहाली के लिये प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ाई को तेज़ी से आगे बढ़ाना होगा.  

प्लास्टिक से बन रही हैं सड़कें भी

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भारत के अनेक इलाक़ों में प्लास्टिक को री-सायकल यानी फिर से इस्तेमाल करने की परियोजनाओं में सक्रिय योगदान कर रहा है. लोग प्लास्टिक को फेंकने के बजाय उसे कई तरह से इस्तेमाल में ला रहे हैं जिससे रोज़गार भी मिल रहा है. बेकार समझे जाना वाला प्लास्टिक अब बहुत सी महिलाओं में आत्मविश्वास भरने के साथ-साथ उनकी आजीविका का भी साधन बन रहा है. एक झलक...

अनप्लास्टिक इंडिया-बढ़ती मुहिम

जलवायु संकट का मुक़ाबला करने के लिए दुनिया भर में युवाओं ने भी कमर कस ली है. ऐसे ही एक युवा शैलेश सिंघल ने भारत में प्लास्टिक के ख़िलाफ़ अनोखी मुहिम छेड़ी है जिसका नाम है - अनप्लास्टिक इंडिया. यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने शैलेश के साथ ख़ास बातचीत की.

हर मिनट एक ट्रक प्लास्टिक समुद्र में फेंक दिया जाता है

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने कहा है कि हर साल लगभग 80 लाख टन प्लास्टिक कूड़ा-कचरा समुद्रों में फेंका जाता है - इसका मतलब इस तरह भी समझा जा सकता है कि एक बड़े ट्रक में समाने वाले कूड़े-कचरे के बराबर ये हर मिनट समुद्र में फेंका जाता है.