फ़सल

कृषि जैवविविधता की सफलता की कहानी

चावल का 90 फ़ीसदी से ज़्यादा उत्पादन और खपत एशिया में है. भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति शुरू होने से पहले धान की एक लाख से ज़्यादा क़िस्में थी जिनमें स्वाद, पोषण, कीट-प्रतिरोधक क्षमता के विविध गुणों का मिश्रण होने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार ढलने की भी क्षमता भी नीहित थी. जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौती के मद्देनज़र ऐसी क़िस्मों को फिर से बढ़ावा देने के प्रयासों में सफलता मिल रही है.