परिधान

नो नेशन फ़ैशन द्वारा निर्मित 'ब्लैक स्वान' पोशाक, जिसे न्यूयॉर्क फ़ैशन वीक में प्रस्तुत किया गया.
IOM/ Rahma Soliman

न्यूयॉर्क फ़ैशन सप्ताह में प्रवासन व समावेशन थीम की धूम

इस वर्ष न्यूयॉर्क में फ़ैशन सप्ताह’ के दौरान विविधता और समावेशन आकर्षण का केन्द्र रहे. संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘नो नेशन’ (No Nation) फ़ैशन पहल के अन्तर्गत, डिज़ाइनर्स ने अपने रचनात्मक परिधानों का प्रदर्शन किया.

पाकिस्तान के मुल्तान शहर में, महिलाकर्मी कपास की सफ़ाई करते हुए.
© FAO/Aamir Qureshi

कपास है 10 करोड़ से भी ज़्यादा परिवारों की आय का सहारा

कपास (कॉटन) की एक मीट्रिक टन मात्रा, औसतन पाँच लोगों को रोज़गार मुहैया कराती है, अक्सर दुनिया के सबसे ज़्यादा हाशिये वाले क्षेत्रों में; इस तरह कपास से, दुनिया भर में, कुल मिलाकर, लगभग 10 करोड़ परिवारों की आजीविका चलती है.

वियत नाम के हाय फोन्ग की एक परिधान फ़ैक्ट्री में काम कर रही महिला.
© ILO

एशिया-प्रशान्त: कोरोनावायरस संकट का परिधान उद्योग पर भारी असर

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण आर्थिक गतिविधियों में आए व्यवधान से एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में परिधान सैक्टर (Garment sector) बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि मुख्य निर्यात बाज़ारों में उपभोक्ता माँग में तेज़ गिरावट, तालाबन्दी उपायों और कच्चे माल के आयात में कठिनाइयों के कारण आपूर्ति श्रृंखला, बड़ी संख्या में कामगार और उद्यम प्रभावित हुए हैं. 

रूना रे ने न्यूयॉर्क फ़ैशन वीक 2016 में अपने टिकाऊ परिधान पेश किए.
Runa Ray

टिकाऊ फ़ैशन है मौजूदा दौर की ज़रूरत

कपड़े बनाने में बहुत सारे रसायनों और पानी का इस्तेमाल होता है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है. फ़ैशन उद्योग क़रीब 10 फ़ीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार है. “सस्टेनेबेल फ़ैशन” यानी टिकाऊ फ़ैशन, एक उभरती हुई अवधारणा है जिसके तहत परिधान इस तरह से डिज़ाइन किए जाते हैं ताकि पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक हितों का ख़याल रखा जा सके. सस्टेनेबल फ़ैशन डिज़ाइनर रूना रे ‘ग्रीन फ़ैशन’ की एक बड़ी पैरोकार हैं और परिधानों के कार्बन फ़ुटप्रिंट घटाने व टिकाऊ फ़ैशन के लिए अपने अनुभव संयुक्त राष्ट्र में भी साझा कर चुकी हैं. पेश है यूएन हिन्दी न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत.