पेयजल

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ के पानी के नीचे पानी की आपूर्ति लाइन से युवा लड़के पीने का पानी इकट्ठा करते हैं.
© UNICEF/Asad Zaidi

तीव्र बाढ़ से स्वच्छता लक्ष्य पीछे धकेल दिए जाने का ख़तरा

पाकिस्तान, नाइजीरिया और हाल ही में चाड में आई भयंकर बाढ़ ने न केवल फ़सलों, घरों और बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर दिया, बल्कि इससे शौचालयों, सीवरों और खुले स्थानों में शौच स्थलों में भी पानी भर गया, जिससे रोगजनक कीचड़ के पीने के पानी की आपूर्ति में मिलने से बीमारी के प्रकोप भड़के. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप), दुनिया भर में बाढ़ग्रस्त इलाक़ों में लोगों की सहनसक्षम स्वच्छता प्रणालियों व शौचालय सुविधाओं तक पहुँच हासिल कराने हेतु प्रयासरत है.

लेबनान में यूनीसेफ़ कर्मचारी हैज़ा से बचाव के लिये स्थानीय स्तर पर जागरूकता प्रसार अभियान में जुटे हैं.
© UNICEF/Fouad Choufany

लेबनान में हैज़ा संक्रमण का प्रकोप, WHO ने किया सावधान

लेबनान में पिछले तीन दशकों में पहली बार हैज़ा का प्रकोप सामने आया है और ये बीमारी तेज़ी से पूरे देश में फैल रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन - WHO) ने मंगलवार को आगाह किया है कि देश में अब तक एक हज़ार 400 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 17 लोगों की मौत हुई है.

चीन के दक्षिणी पर्वतीय इलाक़े में धान की सीढ़ीदार खेती.
© FAO/ Zhongshan Luo

वैश्विक जल संकट पर पार पाने के लिये, भूजल की अहमियत पर बल

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की एक नई रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि एक अति महत्वपूर्ण संसाधन होने के बावजूद, भूजल (groundwater) अनदेखी, कुप्रबन्धन व अत्यधिक दोहन का शिकार है.

पश्चिमोत्तर सीरिया में विस्थापितों के लिये बनाये गए शिविर में, एक बच्ची टैण्कर से जल भर रही है.
© UNICEF/Khaled Akacha

युद्ध प्रभावित देशों में स्वच्छ जल की क़िल्लत, हिंसा से ज़्यादा घातक

हिंसक संघर्ष से प्रभावित इलाक़ों में, जल आपूर्ति व साफ़-सफ़ाई सेवा केंद्रों पर हमलों और उससे जल सुलभता प्रभावित होने के कारण लाखों बच्चों के जीवन के लिये संकट पैदा हो रहा है. यह ख़तरा इन इलाक़ों में जारी हिंसा व लड़ाई से कहीं अधिक गम्भीर है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट में कड़े शब्दों में कहा है कि जल आपूर्ति पर हमला, बच्चों पर हमला है.

कम्बोडिया के एक स्कूल में लड़कियाँ अपने हाथों को धो रही हैं.
© UNICEF/Bona Khoy

कोविड-19: स्कूलों में स्वच्छ जल व हाथ धोने की सुविधा का प्रबंध ज़रूरी

दुनिया में लगभग 82 करोड़ बच्चों के पास स्कूलों में हाथ धोने की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जिससे उनके कोविड-19 महामारी और अन्य संक्रामक बीमारियों से संक्रमित होने का ख़तरा ज़्यादा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साझा निगरानी कार्यक्रम द्वारा गुरुवार को जारी नई रिपोर्ट के आँकड़े दर्शाते हैं कि विश्व के हर पाँच में से दो स्कूलों में महामारी से पहले ही इन मूलभूत सुविधाओं की कमी थी. यूएन एजेंसियों के मुताबिक साफ़-सफ़ाई का समुचित प्रबंध किया जाना स्कूलों को फिर खोले जाने की एक अनिवार्य शर्त है.