पारिस्थितिकी तंत्र

भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव, खाद्य सुरक्षा के लिये हालात जोखिम भरे

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले एक दशक में, मृदा, भूमि और जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ा है और अब स्थिति एक नाज़ुक पड़ाव पर पहुँच गई है. रिपोर्ट के मुताबिक़, मौजूदा हालात, पारिस्थितिकी तंत्रों की सेहत के नज़रिये से चिन्ताजनक हैं, जिससे बढ़ती विश्व आबादी की खाद्य सुरक्षा के लिये ख़तरा उत्पन्न हो सकता है.

रूपान्तरकारी बदलाव के वाहक – 2021 ‘चैम्पियंस ऑफ़ द अर्थ’ विजेताओं की घोषणा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने वर्ष 2021 के लिये ‘चैम्पियंस ऑफ़ द अर्थ’ पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की है. पर्यावरण के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की ओर से दिये जाने वाले इस सर्वोच्च सम्मान से नवाज़े जाने वालों में, एक कैरीबियाई देश की प्रधानमंत्री, एक महिला वैज्ञानिक, आदिवासी महिलाओं के एक समूह और एक महिला उद्यमी शामिल हैं. 

स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार: छह अहम बातें

8 अक्टूबर को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद सभागार का करतल ध्वनि से गूंजना, एक असाधारण अनुभव था. यह, दशकों से पर्यावरण संरक्षण और अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा किये जा रहे अथक प्रयासों के फलीभूत होने का अवसर था.  

आपदाओं से रक्षा में, विकासशील देशों के लिये अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर बल

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार, 13 अक्टूबर, को ‘अन्तरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस’ के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, प्राकृतिक आपदाओं के ख़तरों का सामना कर रहे विकासशील देशों की रक्षा के लिये वैश्विक एकजुटता की पुकार लगाई है. 

‘प्रकृति के साथ आत्मघाती युद्ध का अन्त करने के लिये’ निडर कार्रवाई का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘यूएन जैवविविधता सम्मेलन’ (कॉप15) को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि विश्व में दस लाख से अधिक प्रजातियों के लुप्त होने का जोखिम मण्डरा रहा है. इसके मद्देनज़र, देशों को एक साथ मिलकर पृथ्वी व मानवता के लिये एक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करना होगा.

समुद्री तापमान में वृद्धि - एक दशक में 14 फ़ीसदी मूँगा चट्टानों को नुक़सान

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2009 और 2018 के बीच, समुद्री तापमान में बढ़ोत्तरी जारी रहने की वजह से विश्व की 14 फ़ीसदी प्रवाल भित्तियाँ या मूंगा चट्टानें (coral reefs) ख़त्म हो गई हैं. 

मरुस्थलीकरण और सूखा – मानव कल्याण के लिये ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि मानवता ने प्रकृति के विरुद्ध एक आत्मघाती, निर्मम युद्ध छेड़ा हुआ है जिसे रोका जाना होगा. उन्होंने गुरुवार, 17 जून, को मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हुए भूमि क्षरण और कृषि, शहरों व बुनियादी ढाँचे के विस्तार से, तीन अरब से अधिक लोगों के जीवन व आजीविका के लिये चुनौती खड़ी हो गई है.