पारिस्थितिकी तन्त्र

विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति के घावों पर मरहम लगाने का समय

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, ‘पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के यूएन दशक' की शुरुआत की घोषणा की है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया, जैव-विविधता की क्षति, जलवायु व्यवधान और बढ़ता प्रदूषण, तीन पर्यावरणीय संकटों का सामना कर रही है, जिसके मद्देनज़र, यह प्रकृति को पहुँचाये गए नुक़सान की भरपाई करने का समय है.

दक्षिण एशिया में नाइट्रोजन प्रदूषण की रोकथाम ज़रूरी

नाइट्रोजन एक दोधारी तलवार है. यह उर्वरकों का एक प्रमुख तत्व है और गेहूँ व मक्का जैसी आवश्यक फ़सलों के विकास में मदद देता है. मगर, बहुत अधिक नाइट्रोजन से वायु प्रदूषित हो सकती है, मिट्टी नष्ट हो सकती है और समुद्र में बेजान "मृत क्षेत्र" पैदा हो सकता है. पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद शहर के कृषि विश्वविद्यालय में खेती में नाइट्रोजन उपयोग के प्रमुख विशेषज्ञ तारिक़ अज़ीज, 'दक्षिण एशिया नाइट्रोजन हब' के मुख्य भागीदार भी हैं, जो आठ देशों में नाइट्रोजन के टिकाऊ उपयोग का समर्थन करता है. यूएन पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने तारिक़ अज़ीज से इस दिशा में उनके प्रयासों और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के विषय में विस्तार से बातचीत की.

प्रकृति पर तीन बड़े ख़तरे - एक अरब हैक्टेयर क्षरित भूमि की बहाली पर बल

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण – तीन बड़े ख़तरों से निपटने के लिये, अगले एक दशक में चीन के आकार के बराबर क्षेत्र को बहाल किये जाने की आवश्यकता है. खाद्य एवँ कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए सचेत किया है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढँग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका करीब डेढ़ गुना इस्तेमाल कर रही है.

पाकिस्तान: आर्थिक और पारिस्थितिकीय लाभ के लिये मैन्ग्रोव की बहाली

पाकिस्तान में 5 जून को 'विश्व पर्यावरण दिवस' मनाने की तैयारियों के तहत मैन्ग्रोव वन सहित अन्य महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों को बहाल किये जाने पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है. जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में मैन्ग्रोव को एक महत्वपूर्ण औज़ार के रूप में देखा जाता है, और ये करोड़ों लोगों के लिये आजीविका का साधन भी है.

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रगति, मगर जैवविविधता की रक्षा ज़रूरी

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने पर्यावरण संरक्षण प्राप्त क्षेत्रों के विषय में तय लक्ष्यों पर व्यापक प्रगति दर्ज की है, मगर इन क्षेत्रों की गुणवत्ता के सम्बन्ध में निर्धारित संकल्पों को साकार नहीं किया जा सका है, और जैवविविधता की रक्षा पर भी ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और उसके साझीदार संगठनों द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है.   

अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस – ग्रह की पुनर्बहाली के संकल्प की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार, 22 अप्रैल, को ‘अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस’ (International Mother Earth Day) के अवसर पर जारी अपने सन्देश में ज़ोर देकर कहा है कि पृथ्वी के संसाधनों के लापरवाह दोहन को रोका जाना होगा. महासचिव गुटेरेश ने प्रकृति के साथ शान्तिपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने, वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को सीमित करने और जैव-विविधता की रक्षा करने का आहवान किया है.

वनों की बहाली के लिये प्रयास, यूएन की अग्रणी भूमिका

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (FAO) अगले दशक के दौरान भूदृश्य (Landscapes) और वनों को बहाल करने के प्रयास आगे बढ़ाने में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इन प्रयासों के तहत क्षरण का शिकार और वनों से वंचित 35 करोड़ हैक्टेयर भूमि को उबारने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा – यह क्षेत्र भारत के क्षेत्रफल के आकार से भी बड़ा है.