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पानी

युगांडा में एक प्राइमरी स्कूल में, बच्चे नल के पानी से हाथ धोते हुए.
© UNICEF/Proscovia Nakibuuka

यूएन सम्मेलन में, 'वैश्विक जल संकट' के समाधानों पर नज़र

दुनिया भर के अमूल्य जल संसाधन, “गहरे संकट में” हैं और विश्व भर के नेतागण, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, ‘इस बहुकोणीय वैश्विक संकट’ के समाधानों पर विचार करने के लिए इस सप्ताह यूएन मुख्यालय में एकत्र हो रहे हैं.

पाकिस्तान में आई अभूतपूर्व बाढ़ से बड़ी संख्या में परिवार विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं.
© UNICEF/Malik

पाकिस्तान बाढ़: छह महीने के दौरान, यूएन एजेंसियों की सहायता सक्रियता

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा है कि पाकिस्तान में वर्ष 2022 के दौरान आई विनाशकारी बाढ़ के बाद छह महीनों के दौरान, यूएन एजेंसियों और उसके साझीदार संगठनों ने, 70 लाख से ज़्यादा लोगों तक खाद्य और अन्य ज़रूरी चीज़ों व सेवाओं के साथ पहुँच बनाई है.

हेती में एक बच्चे को, हैज़ा की रोकथाम करने वाली वैक्सीन की ख़ुराक पिलाए जाते हुए.
© PAHO-WHO

WHO: 43 देशों में हैज़ा फैलाव से, एक अरब लोगों के लिए जोखिम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि हैज़ा फैलाव के मामलों में वैश्विक बढ़त ने,43 देशों में एक अरब लोगों के लिए जोखिम खड़ा कर दिया है.

सभी के लिए सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है.
© WHO/Rob Holden

सर्वजन के लिये जल एवं स्वच्छता की सुलभता, निवेश बढ़ाने पर बल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और साझेदार संगठनों ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2030 तक, सर्वजन के लिये सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता एवं साफ़-सफ़ाई (WASH) प्रदान करने के लिए देशों को निवेश में तेज़ी लानी होगी.

मिस्र की राजधानी काहिरा की एक निर्धन बस्ती में एक लड़की, नल से पानी पीते हुए.
© UNICEF/Shehzad Noorani

सबको सुरक्षित पेजयल उपलब्धता की ख़ातिर, संसाधन निवेश वृद्धि पर बल

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों और साझीदारों की सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देशों की सरकारों को, जल उपलब्धता सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की ख़ातिर, सुरक्षित पेयजल प्रणालियों के निर्माण में और ज़्यादा संसाधन निवेश करने होंगे.

पाकिस्तान में बाढ़ के पानी से गुज़रती एक युवती.
UNICEF/Asad Zaidi

पाकिस्तान में भीषण बाढ़ से भारी तबाही

पाकिस्तान में भीषण बाढ़ शुरू होने के महीनों बाद भी, लाखों लोग व्यापक दायरे में प्रभावित हैं, और ये बाढ़ अभी अपना आकार कम करती नज़र नहीं आ रही है. एक वीडियो रिपोर्ट..

पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में भीषण बाढ़ से जलमग्न एक गाँव.
© UNICEF/Asad Zaidi

पाकिस्तान बाढ़: ‘पानी उतरने में लग सकते हैं छह महीने'

संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसियों ने मंगलवार को कहा है कि पाकिस्तान में अब भी लाखों लोग भीषण बाढ़ से प्रभावित हैं, जो अभी अपना आकार कम करती नज़र नहीं आ रही है.

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता एजेंसी - WFP, पाकिस्तान के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में सहायता पहुँचाने की मुहिम के तहत, बलूचिस्तान प्रान्त में खाद्य वितरण से पहले आकलन में जुटी हुई है.
WFP Pakistan

पाकिस्तान: ‘नवीनतम जलवायु आपदा’ के बाद, यूएन एजेंसियों द्वारा मदद में तेज़ी

संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत कोष (CERF) ने शुक्रवार को 70 लाख डॉलर की रक़म जारी करने की घोषणा करते हुए कहा है कि इस राशि से पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़ का मुक़ाबला करने के प्रयासों को मज़बूती मिलेगी, जोकि लगभग एक दशक में बहुत भीषण बाढ़ है.

बांग्लादेश में बच्चों को तैराकी सिखाए जाते हुए.
© UNICEF/Munem Wasif

WHO: डूबने से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिये, ‘कम से कम एक चीज़’ करने की पुकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को कहा है कि दुनिया भर में, हर साल पानी में डूबने से, दो लाख 36 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है और ये, एक वर्ष से 24 वर्ष आयु वर्ग में मौत होने के प्रमुख कारणों में से एक है. संगठन ने हर किसी से, ज़िन्दगियाँ बचाने की ख़ातिर, “कम से कम एक चीज़” अवश्य करने की पुकार लगाई है. 

स्वीडन के स्टॉकहोम में Fridays for Future वैश्विक हड़ताल में, युवा जलवायु कार्यकर्ता शिरकत करते हुए.
© UNICEF/Christian Åslund

पर्यावरण के लिये ज़्यादा कार्रवाई हो, वरना पृथ्वी के 'मानव बलिदान का क्षेत्र' बन जाने का जोखिम

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि वातावरण को एक प्रमुख मुद्दा बनाने के लिये, विश्व का पहला सम्मेलन, पाँच दशक पहले स्वीडन में हुआ था, तब से ये समझ बढ़ी है कि अगर इनसानों ने पृथ्वी की देखभाल करने में कोताही बरती, तो ये ग्रह मानव बलिदान का क्षेत्र बनकर रह जाएगा. पृथ्वी की रक्षा के लिये आगे की कार्रवाई पपर चर्चा करने के लिये, इस सप्ताह स्टॉकहोम में ताज़ा विचार-विमर्श शुरू होने वाला है, उस सन्दर्भ में सोमवार को, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ऐसे कहीं ज़्यादा विशाल प्रयासों की आवश्यकता है जिनके ज़रिये हर साल लाखों ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकें.