मूल भाषाएं

मूल भाषाओं को सहेजना मानव विरासत को सहेजने जैसा

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बांडे ने कहा है कि यूएन के प्रयासों के बावजूद विश्व में आदिवासियों की मूल भाषाएं लुप्त होती जा रही हैं जिसके कारण उनकी पहचान व परंपराओं को ख़तरा पैदा हो रहा है. ‘आदिवासियों की मूल भाषाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय वर्ष' के समापन पर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही है.

भावी पीढ़ियों के लिए मूल भाषाओं में प्राण फूंकने की पुकार

हाल के दशकों में पुरखों के ज़माने से चली आ रही सैंकड़ों भाषाएं धीरे धीरे शांत होने लगी हैं. उन्हीं के साथ विलुप्त हो गई है उन्हें बोलने वाले लोगों की संस्कृति, ज्ञान और परंपराएं. जो भाषाएं बच गईं हैं उन्हें संरक्षित रखने और नए प्राण फूंकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने मूल भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष की आधिकारिक शुरुआत की है.