मरुस्थलीकरण

सूखे व मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए प्रकृति के साथ नए रिश्ते की दरकार

संयुक्त राष्ट्र ने मरुस्थलीकरण व सूखे से निपटने और प्रकृति की रक्षा के लिए एक ऐसा नया सम्बन्ध स्थापित करने की पुकार लगाई है जिससे भूमि क्षरण के कारण उत्पन्न होने वाली जबरन विस्थापन, भुखमरी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का असरदार ढँग से मुक़ाबला किया जा सके. मरुस्थलीकरण व सूखा से निपटने के लिए मनाए जाने वाले विश्व दिवस (World Day to Combat Desertification and Drought) के अवसर पर इस वर्ष टिकाऊ उत्पादन और खपत की अहमियत पर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है. 

मरुस्थलीकरण व सूखा विरोधी दिवस

मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का स्वास्थ्य भी ख़राब चल रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी की तकलीफ़ों में और इज़ाफ़ा हुआ है. मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

भूमि की उर्वरता बहाल करने की योजना पर सहमति

मरुस्थलीकरण रोकने और भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने के प्रयासों को मज़बूती देने के इरादे से कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 सम्मेलन में ठोस कार्रवाई की पहल की गई है. सम्मेलन के अंतिम दिन शुक्रवार को ‘दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया जिसके तहत वर्ष 2030 तक ‘लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी’ हासिल करना यानी भूमि क्षय के स्तर को स्थिर रखना अब देशों की राष्ट्रीय कार्ययोजनाओं में शामिल होगा.

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वैश्विक कार्रवाई की पुकार

भारत की राजधानी नई दिल्ली में कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 में सोमवार को उच्च-स्तरीय खंड का आयोजन हुआ जिसमें भूमि के मरुसस्थलीकरण से बचाकर उसे उपजाऊ बनाने के उपाय करने में तेज़ी लाने का आहवान किया गया.

भूमि को बंजर होने से बचाने के लिए मंथन

6 सितंबर 2019 के इस साप्ताहिक अंक में...

भूमि प्रबंधन पर कॉप 14 सम्मेलन दिल्ली में, ज़मीन को बंजर होने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंथन,

अनेक स्थानों पर अशांति और युद्ध के हालात में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता

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'अगर पृथ्वी को बचाना है तो भूमि को बचाएं, अर्थव्यवस्था में जान फूँकें'

भूमि को बंजर होने से बचाकर उपजाऊ बनाने में ज़्यादा संसाधन निवेश करने से ना सिर्फ़ पृथ्वी ग्रह को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी, बल्कि वर्तमान के कुछ सबसे बड़े मुद्दों का समाधान तलाश करने की भी शुरुआत हो सकती है. दुनिया भर में मरुस्थलीकरण के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहीम चियाओ ने नई दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के ज़रिए पत्रकारों से बातचीत में ये बात कही है. इस विषय पर 14 वां वैश्विक सत्र 2 से 13 सितंबर तक राजधानी दिल्ली में हो रहा है.

 

जलवायु परिवर्तन के असाधारण प्रभाव से खाद्य सुरक्षा पर मंडराता ख़तरा

विश्व में 50 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जहां जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्यावरण क्षरण हो रहा है जिससे वहां जीवन प्रभावित हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए सभी देशों से अपील की है कि भूमि के टिकाऊ इस्तेमाल के लिए संकल्प लिए जाने चाहिए ताकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित किया जा सके, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए.

उपजाऊ भूमि का मरुस्थल में बदलना बड़ी समस्या

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने सोमवार को 'विश्व मरुस्थलीकरण रोकथाम दिवस' पर अपने वीडियो संदेश में सचेत किया है कि दुनिया हर साल 24 अरब टन उपजाऊ भूमि खो देती है. उन्होंने कहा कि भूमि की गुणवत्ता ख़राब होने से राष्ट्रीय घरेलू उत्पाद में हर साल आठ प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. भूमि क्षरण और उसके दुष्प्रभावों से मानवता पर मंडराते जलवायु संकट के और गहराने की आशंका है.