महिला अधिकार

आसमाँ छूना अभी बाक़ी है...

संयुक्त राष्ट्र में संसदों के अन्तरराष्ट्रीय संगठन, अन्तर-संसदीय संघ यानि आईपीयू की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर की संसदों में, महिला सांसदों की भागेदारी 25 प्रतिशत से अधिक पहुँच गई है. यह आँकड़ा ऐतिहासिक है, लेकिन संसदों में लैंगिक समानता हासिल करने का लक्ष्य अभी भी दूर है. 

कोविड-19: एक लड़की की नज़र में असमानता

कोविड-19 महामारी के बढ़ते फैलाव के बीच, लड़कियाँ महिला ख़तना (FGM) से मुक्ति पाने का अधिकार पाने और सुरक्षा व कल्याण के लिये समान अवसरों का उपयोग करने के लिये आवाज़ उठा रही हैं.

निजेर में 15 साल की एस्टा पूछती हैं, "अगर कोई इलाज मिल भी गया, तब भी क्या क्या हमारे जैसे देशों को वो हासिल हो पाएगा?" 

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में व्यक्त किये हैं. (देखिये वीडियो)...

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का मुद्दा – पुरुषों और लड़कों के नाम यूएन उपप्रमुख की अपील

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं पर आँखें मूँद लेने लेने वाले पुरुषों और लड़कों को यह स्वीकार करना होगा कि वे भी इस हिंसा में भागीदार हैं.  विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने पाया है कि वैश्विक स्तर पर घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है. तालाबन्दी और अन्य पाबन्दियों के कारण ज़्यादा सँख्या में महिलाओं को घर में ही रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. बहुत सी महिलाएँ तो उनके साथ दुर्व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार साथी के साथ ही अपने घरों में सीमित हो गई हैं.

'वैश्विक प्रगति के लिए अहम है' महिला सशक्तिकरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने संदेश में कहा है कि महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता, वैश्विक प्रगति के लिए आवश्यक हैं.  महिलाओं और लड़कियों द्वारा किए जाने वाले अभिनव प्रयास लैंगिक समानता हासिल करने के लक्ष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.