महिला अधिकार

अफ़ग़ानिस्तान: हिंसा पर विराम, समावेशी शान्ति प्रक्रिया की दरकार

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि डेबराह लियोन्स ने कहा है कि अफ़ग़ान जनता की पीड़ा, विस्थापन और मौतों के सिलसिले पर अब विराम लगाया जाना होगा. उन्होंने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को देश में मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए कहा कि यह समय परिस्थितियों की समीक्षा करने और शान्ति मार्ग पर आगे बढ़ने के लिये ज़रूरी प्रयासों को समर्थन दिये जाने का है.

आसमाँ छूना अभी बाक़ी है...

संयुक्त राष्ट्र में संसदों के अन्तरराष्ट्रीय संगठन, अन्तर-संसदीय संघ यानि आईपीयू की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर की संसदों में, महिला सांसदों की भागेदारी 25 प्रतिशत से अधिक पहुँच गई है. यह आँकड़ा ऐतिहासिक है, लेकिन संसदों में लैंगिक समानता हासिल करने का लक्ष्य अभी भी दूर है. 

कोविड-19: एक लड़की की नज़र में असमानता

कोविड-19 महामारी के बढ़ते फैलाव के बीच, लड़कियाँ महिला ख़तना (FGM) से मुक्ति पाने का अधिकार पाने और सुरक्षा व कल्याण के लिये समान अवसरों का उपयोग करने के लिये आवाज़ उठा रही हैं.

निजेर में 15 साल की एस्टा पूछती हैं, "अगर कोई इलाज मिल भी गया, तब भी क्या क्या हमारे जैसे देशों को वो हासिल हो पाएगा?" 

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में व्यक्त किये हैं. (देखिये वीडियो)...

कोविड-19: महिलाओं व लड़कियों के लिये पीढ़ियों की प्रगति खो जाने का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के विनाशकारी सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से दुनिया भर में महिलाएँ व लड़कियाँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में वर्षों व कई पीढ़ियों से हो रही प्रगति को कोरोनावायरस संकट की भेंट ना चढ़ने देने के लिये व्यापक प्रयास करने की आवश्यकता होगी. 

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का मुद्दा – पुरुषों और लड़कों के नाम यूएन उपप्रमुख की अपील

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं पर आँखें मूँद लेने लेने वाले पुरुषों और लड़कों को यह स्वीकार करना होगा कि वे भी इस हिंसा में भागीदार हैं.  विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने पाया है कि वैश्विक स्तर पर घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है. तालाबन्दी और अन्य पाबन्दियों के कारण ज़्यादा सँख्या में महिलाओं को घर में ही रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. बहुत सी महिलाएँ तो उनके साथ दुर्व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार साथी के साथ ही अपने घरों में सीमित हो गई हैं.

महिलाओं पर हिंसा एक बाधा है शांतिपूर्ण भविष्य के रास्ते में

महिलाओं के प्रति हिंसा के उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिंसा पीड़ितों के प्रति एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए इस मानवाधिकार हनन के अंत की पुकार लगाई है. बलात्कार को मानवाधिकारों का एक ऐसा गंभीर उल्लंघन क़रार दिया गया है जिसके लंबे समय के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं.

महिलाओं व लड़कियों के लिए 'बदलाव की रफ़्तार धीमी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि महिलाएँ, शांति व सुरक्षा पर आधारित एजेंडा यूएन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बने रहना चाहिए. उन्होंने सुरक्षा परिषद में मंगलवार को एक खुली बहस के दौरान दुख ज़ाहिर करते हुए कहा कि संकल्पों के बावजूद दुनिया भर में वास्तविक बदलाव अभी नहीं दिखाई दे रहा है और परिवर्तन की गति धीमी है.

'राजनीतिक ताक़त में कमी' झेल रही हैं महिलाएं

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फ़र्नान्डा एस्पिनोसा ने कहा है कि दुनिया भर में महिलाओं को मिलने वाली राजनीतिक भागीदारी की प्रक्रिया में प्रगति का चक्र हाल के सालों में पीछे खिसक रहा है. न्यूयॉर्क में  महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 63वें सत्र के दौरान सत्ता में महिलाओं की भागीदारी विषय पर चर्चा हुई. 

महिला अधिकारों पर वार्षिक बैठक में बुनियादी सेवाओं पर ज़ोर

लैंगिक समानता और महिला अधिकारों पर चर्चा के नज़रिए से अहम 'कमीशन ऑन द स्टेट्स ऑफ़ वीमेन' का 63वां सत्र न्यूयॉर्क में शुरू हो गया है. पहले दिन हुई चर्चा में महिलाओं और लड़कियों को ज़रूरत पर आधारित और मानवाधिकारों के अनुरूप, मूलभूत सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की गई है.

'वैश्विक प्रगति के लिए अहम है' महिला सशक्तिकरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने संदेश में कहा है कि महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता, वैश्विक प्रगति के लिए आवश्यक हैं.  महिलाओं और लड़कियों द्वारा किए जाने वाले अभिनव प्रयास लैंगिक समानता हासिल करने के लक्ष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.