महिला

लैंगिक समानता पर दुनिया भर में सुस्त रफ़्तार

महिलाओं की स्थिति व अधिकारों के बारे में 1995 में हुए बीजिंग सम्मेलन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई है जिसमें लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘बीजिंग प्लैटफ़ॉर्म फ़ॉर एक्शन’ को विभिन्न देशों में किस तरह लागू किया जा रहा है. साथ ही रिपोर्ट में पुरुषों और महिलाओं के बीच ज़्यादा समानता और न्याय सुनिश्चित करने का भी आहवान किया गया है.

'अच्छा स्वास्थ्य सबका मानवधिकार, केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं'

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अच्छा स्वास्थ्य पाने का अधिकार सभी लोगों को है और ये केवल धनी लोगों का विशेषाधिकार नहीं हो सकता. यूएन एड्स ने सरकारों का आहवान किया है कि तमाम लोगों के अच्छा स्वास्थ्य रखने के अधिकार को वास्तविक रूप देने के लिए स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सरकारी धन निवेश को प्राथमिकता देनी होगी.

प्लास्टिक से बन रही हैं सड़कें भी

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भारत के अनेक इलाक़ों में प्लास्टिक को री-सायकल यानी फिर से इस्तेमाल करने की परियोजनाओं में सक्रिय योगदान कर रहा है. लोग प्लास्टिक को फेंकने के बजाय उसे कई तरह से इस्तेमाल में ला रहे हैं जिससे रोज़गार भी मिल रहा है. बेकार समझे जाना वाला प्लास्टिक अब बहुत सी महिलाओं में आत्मविश्वास भरने के साथ-साथ उनकी आजीविका का भी साधन बन रहा है. एक झलक...

आधुनिक दासता को सभी रूपों में ख़त्म करने की सख़्त ज़रूरत

दासता अतीत की बात नहीं है, बल्कि ये आज भी दुनिया भर में कई रूपों में मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ लोग आज भी आधुनिक दासता के चंगुल में फँसे हुए हैं.

खुले में शौच से गरिमा और जीवन पर मंडराता है ख़तरा

शौच के बाद और भोजन करने से पहले साबुन से हाथ नहीं धोने जैसी स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई की आदतें न होने से सालाना 8 लाख से ज़्यादा लोग मौत का शिकार हो जाते हैं – जोकि मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या  से भी अधिक है. खुले में शौच करना मनुष्य की गरिमा, स्वास्थ्य और कल्याण का अपमान है – ख़ासतौर पर लड़कियों और महिलाओं का.

छोटी सी लागत से महिलाओं का बढ़ता हौसला

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम - यूएनडीपी ने भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएँ चलाई हुई हैं. इनके ज़रिए कुछ वित्तीय मदद, तकनीकी सहायता व कारोबार करने का प्रशिक्षण देकर महिलाओं का हौसला बढ़ाया जा रहा है. दिल्ली से एक रिपोर्ट...

विधवाओं को क़तई बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस के अवसर पर कहा है कि विधवाओं के नाज़ुक हालात के बारे में सभी को संवेदनशील तरीक़े से सोचना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि उनकी आर्थिक व भावनात्मक मुश्किलें कहीं उनके लिए और ज़्यादा मुश्किलें ना पैदा कर दें. अंतरराषट्रीय विधवा दिवस हर वर्ष 23 जून को मनाया जाता है. इस मौक़े पर महासचिव ने सभी का आहवान करते हुए कहा कि ये सभी इंसानों की ज़िम्मेदारी है कि विधवाएं कहीं अकेली और बेसहारा ना रह जाएँ और उन्हें पीछे ना छोड़ दिया जाए.

'महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा समाज के लिए ‘शर्म की बात’ है'

महिलाओं और बच्चियों के ख़िलाफ़ हिंसा न सिर्फ मानवाधिकार का मुद्दा है, बल्कि यह ‘नैतिक रूप से उनका तिरस्कार’ भी है और सभी समाजों के लिए ‘शर्म की बात’. महिलाओं विरुद्ध हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने यह बात कही. उन्होंने इस उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए दुनिया भर के देशों का आह्वान किया.  

सेहत के लिए घातक है तम्बाकू सेवन

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