मौसम विज्ञान

केवल एक तिहाई लघु द्वीपीय विकासशील देशों में ही समय पूर्व चेतावनी प्रणाली की व्यवस्था है. सबसे कम विकसित देशों में यह आँकड़ा 50 फ़ीसदी है.
UNDRR/Chris Huby

2027 तक सर्वजन के लिये समय पूर्व चेतावनी की व्यवस्था, 3.1 अरब डॉलर की योजना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ख़तरनाक चरम मौसम घटनाओं से बचाव पर केन्द्रित, समय पूर्व चेतावनी प्रणाली को अगले पाँच वर्षों में सर्वजन तक पहुँचाने के इरादे से, तीन अरब 10 करोड़ डॉलर की एक नई योजना प्रस्तुत की है. महासचिव गुटेरेश ने सोमवार को मिस्र के शर्म अल-शेख़ में यूएन जलवायु सम्मेलन - कॉप27 के दौरान अनुकूलन व सहनक्षमता प्रयासों में समान रूप से निवेश किये जाने का आग्रह किया है.

मंगोलिया के उलानबाटर में कोयला-चालित बिजली संयंत्रों में उत्सर्जन से वायु प्रदूषण
ADB/Ariel Javellana

प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की दोहरी चुनौती, ‘जलवायु दण्ड’ के जोखिम में वृद्धि

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में आगाह किया है कि ताप लहरों की आवृत्ति, गहनता और अवधि बढ़ने से ना केवल इस सदी में जंगलों में आग लगने की घटनाएँ बढ़ेंगी, बल्कि वायु गुणवत्ता भी बद से बदतर हो जाने की आशंका है. यूएन एजेंसी बुधवार, 7 सितम्बर, को ‘नीले आकाश के लिये स्वच्छ वायु का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्रों के लिये बढ़ते जोखिम के प्रति ध्यान आकृष्ट किया है. 

पराबैंगनी प्रकाश में ज़्यादा देर तक रहने से त्वचा का कैंसर होने का जोखिम बढ़ता है.
© Unsplash/Ferran Feixas

क्या आप धूप में सुरक्षित हैं? त्वचा कैंसर से बचाव के लिये यूएन ऐप

वैज्ञानिक तथ्य दर्शाते हैं कि पराबैंगनी विकिरण (UV radiation) के सम्पर्क में अधिक रहने से त्वचा कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के समूह ने उपयुक्त बचाव उपायों के इरादे से, मंगलवार को एक नया ऐप (सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम) पेश किया है, जिससे हर किसी के लिये, कहीं भी यह जानना सरल होगा कि घर से बाहर कितनी देर के लिये, धूप में सुरक्षित रहा जा सकता है.
 

असाधारण और गहन ताप लहरों की वजह से योरोप में तापमान के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं.
WMO Video screen shot

योरोप: गर्मियों की शुरुआत में ही भीषण तापलहर का प्रकोप

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि योरोपीय देशों को इस साल ऐसी अभूतपूर्व और झुलसा देने वाली ताप लहर से जूझना पड़ रहा है, जिसने अपेक्षित समय से पहले ही दस्तक दे दी है. गर्मी के मौसम के शुरुआती दिनों में ही तापमान के इस रुझान ने आगामी दिनों में हालात के प्रति चिन्ता बढ़ा दी है. 

भारत के अनेक हिस्सों में लोग गर्मी से बेहाल हैं. एक महिला तपती धूप में भोजन कर रही है.
© UNICEF/Soumi Das

भारत और पाकिस्तान भीषण गर्मी की चपेट में, जीवनरक्षा के लिये ऐहतियाती उपायों पर ज़ोर

विश्व में घनी आबादी वाले देशों में शुमार होने वाले भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों में इन दिनों करोड़ों लोग भीषण गर्मी में झुलस रहे हैं और तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को छू चुका है. इसके मद्देनज़र, दोनों देशों में मौसम विज्ञान विभाग, स्वास्थ्य व आपदा प्रबन्धन एजेंसियों साथ मिलकर उन उपायों को प्रभावी ढँग से लागू करने में जुटे हैं, जिनकी मदद से अतीत के सालों में ज़िन्दगियों की रक्षा कर पाना सम्भव हुआ है. 

ग्रीनलैण्ड सागर में एक हिमखण्ड के पास एक मछुआरा.
Climate Visuals Countdown/Turpin Samuel

आर्कटिक में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पहुँचने की पुष्टि, नया रिकॉर्ड

संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आर्कटिक क्षेत्र में 38 डिग्री सेल्सियस, यानि क़रीब 100 डिग्री फ़ैरेनहाइट तापमान दर्ज किये जाने की पुष्टि की है. यूएन एजेंसी का कहना है कि चरम मौसम व जलवायु पुरालेख (archives) में दर्ज आँकड़े बदलती हुई जलवायु को परिलक्षित करते हैं. 

पश्चिमी हेती की एक नदी में बाढ़ से पुल के बह जाने के बाद लोग दूसरी तरफ़ जाने की कोशिश कर रहे हैं.
MINUSTAH/Logan Abassi

तापमान में 'ख़तरनाक बढ़ोत्तरी' की ओर बढ़ती दुनिया - महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई की पुकार

कोविड-19 महामारी के बावजूद जलवायु परिवर्तन की रफ़्तार में कोई कमी नहीं आई है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व भर में आर्थिक गतिविधियों में आए ठहराव के कारण, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की मात्रा में अस्थाई तौर पर कुछ कमी आई थी, मगर अब यह फिर तेज़ गति से बढ़ रही है. रिपोर्ट में चेतावनी जारी की गई है कि दुनिया आने वाले वर्षों में, तापमान में ख़तरनाक बढ़ोत्तरी की ओर बढ़ रही है.

कोविड-19 के दौरान लागू हुई तालाबन्दियों से सियोल सहित अनेक शहरों में वातावरण में स्वच्छ हवा देखी गई.
Unsplash/Geonhui Lee

कोविड-19 के दौरान तालाबन्दियों से वायु गुणवत्ता में अल्पकालीन सुधार

कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई तालाबन्दियों से, दुनिया के कुछ हिस्सों में वायु गुणवत्ता में तेज़ी से अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया, मगर वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी की वजह से होने वाले जलवायु परिवर्तन को थामने के लिये ये पर्याप्त नहीं हैं. 

दुनिया भर में, चरम मौसम की घटनाओं की संख्या बढ़ रही है.
WMO/Daniel Pavlinovic

पाँच दशकों में आपदाओं में पाँच गुना वृद्धि, बेहतर चेतावनी प्रणालियों से जीवनरक्षा सम्भव

पिछले 50 वर्षों में जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं से विश्व भर में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या बढ़ रही है, जिसका निर्धन देशों पर विषमतापूर्ण असर हुआ है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये यूएन कार्यालय (UNDRR) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद, बेहतर अग्रिम चेतावनी प्रणालियों से मृतक संख्या में कमी लाने में सफलता मिली है.

चीन के हेनान प्रान्त में, राहतकर्मी, बाढ़ के पानी से लोगों को बचाते हुए.
China Fire and Rescue

आपदाओं से भारी आर्थिक व मानवीय तबाही – जल जोखिम सूची में सबसे ऊपर

संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि पिछले 50 वर्षों के दौरान, व्यापक स्तर पर मानवीय और आर्थिक क्षति का कारण बनने वाली त्रासदियों की सूची में जल-सम्बन्धी संकट सबसे ऊपर हैं.