मातृत्व

एशिया प्रशान्त में बड़ी आबादी सामाजिक संरक्षा से वंचित

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में आधी से ज़्यादा आबादी को किसी तरह का सामाजिक संरक्षण हासिल नहीं है जिसके कारण बहुत बड़ी आबादी ख़राब स्वास्थ्य, ग़रीबी, असमानता और सामाजिक बहिष्करण का सामना करने को मजबूर है.

भारत में कोरोना योद्धा - महामारी के दौरान मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल

कोविड-19 महामारी के कारण हुई तालाबन्दी से स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे  यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. इन ठोस चुनौतियों के बावजूद, कई साहसी महिलाओं ने आगे आकर ये सुनिश्चित किया कि महामारी के दौरान महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य व अधिकारों की उपेक्षा न हो पाए. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर, भारत की ऐसी ही कुछ महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ सेवाओं की झलक, जो संकट के समय पूरी प्रतिबद्धता से अपना कर्तव्य निभा रही हैं. 
 

स्वास्थ्य संकट में जच्चा-बच्चा के लिए गंभीर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अनुमान ज़ाहिर किया है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 11 करोड़ 60 लाख बच्चों का जन्म हुआ है. संगठन ने इस संदर्भ में तमाम देशों की सरकारों से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायी सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने का आहवान किया है क्योंकि उनके लिए पहले से ही दबाव में काम कर रही स्वास्थ्य सेवाओं और बाधित आपूर्ति श्रंखला के माहौल में ज़्यादा ख़तरा दरपेश है.

प्रसव के दौरान महिलाओं के साथ हुआ दुर्व्यवहार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि निम्न आय वाले चार देशों में कराए गए सर्वे में शामिल लगभग एक तिहाई महिलाओं ने बताया कि प्रसव के दौरान उनके साथ दुर्यवहार किया गया. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए रणनीति का ख़ाका भी साझा किया है. घाना, गिनी, म्यांमार और नाईजीरिया से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह अध्ययन ‘द लांसेट’ सायंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है.