मानवीय सहायता

लीबिया: जनता की भलाई व स्थिरता की ख़ातिर, राजनैतिक हल ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि लीबिया में अनेक वर्षों से जारी संघर्ष के कारण मानवीय स्थिति ख़तरनाक हो गई है, लाखों आम लोगों को भारी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ रहा है और वहाँ संघर्ष और भीषण होने के साथ-साथ तबाही भी बढ़ती जा रही है. 

'माली में शांति समझौता लागू करना ही स्थिरता का एक मात्र रास्ता'

संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा विभाग के प्रमुख ज्याँ पियर लैक्रोइ ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि माली में 2015 के शांति समझौते को लागू करना ही देश में स्थिरता स्थापित करने का एक मात्र प्रशस्त करता है. ज्याँ पियर लैक्रोइ ने पश्चिम अफ्रीकी देश माली में ताज़ा स्थिति के बारे में सुरक्षा परिषद को अवगत कराया.

सीरिया को मदद मुहैया कराने की समय सीमा अंतिम क्षणों में बढ़ी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया के सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लाखों आम नागरिकों को मानवीय सहायता पहुँचाने के संयुक्त राष्ट्र के अभियानों को जारी रखने के लिए शुक्रवार देर शाम मंज़ूरी दे दी. लेकिन सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों ने ये मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए सीमा चौकियों की संख्या और समय दायरा कम किए जाने पर निराशा भी व्यक्त की.

2020 में सहायता के ज़रूरतमंदों की होगी रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ 80 लाख लोगों को मदद की ज़रूरत होगी और ये लोग 50 से भी अधिक देशों में मौजूद होंगे. एजेंसी के प्रमुख मार्क लोकॉक ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मदद ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 29 अरब डॉलर की मानवीय सहायता रक़म जुटाने का आहवान किया है.

यमन: हिंसा में कमी और सहायता राशि में वृद्धि से उम्मीदें बंधी

यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा है कि देश में हिंसा में कमी आने के बाद वहां बदहाल हालात में जीवन गुज़ार रहे आम लोगों के लिए आशा बंधने के संकेत मिले हैं. ज़रूरतमंदों के लिए सहायता राशि में 20 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है जिसके बाद बंद पड़े मानवीय राहत कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिए गए हैं लेकिन हिंसा पर पूर्ण विराम लगाने के लिए अभी और ज़्यादा प्रयास करने होंगे.

सीरिया में सैन्य तनाव बढ़ने पर आम लोगों की सुरक्षा की चिंता

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने गुरूवार को कहा है कि सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़े में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के कारण लाखों लोगों को सुरक्षा की ख़ातिर वो इलाक़ा छोड़ना पड़ा है. इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को ही तुर्की ने सीरिया में कुछ हवाई औरर ज़मीनी हमले किए थे.

सीरिया में बच्चे और महिलाएँ अमानवीय हालात में बंदी

संयुक्त राष्ट्र नियुक्त स्वतंत्र जाँचकर्ताओं ने कहा है कि सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में लोग तेज़ हुई हिंसा में फँस गए हैं और देश में दूसरी तरफ़ हज़ारों महिलाओं व बच्चों को अमानवीय हालात मे बंदी बनाकर रखा गया है. 

यमन, वहाँ की जनता और क्षेत्र का ‘भविष्य दांव पर’

यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा है कि हिंसा से बदहाल यमन विघटन के ख़तरे का सामना कर रहा है और उसके पास गँवाने के लिए बहुत ज़्यादा समय नहीं बचा है. यमन में हाल के दिनों में हुई हिंसा और नई चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि देश का भविष्य दांव पर लगा है और इसलिए शांति प्रयासों की सुस्त रफ़्तार को तेज़ किए जाने की आवश्यकता है.

ज़िम्बाब्वे में खाद्य संकट के हालात, मानवीय सहायता की नई अपील

पश्चिम अफ्रीकी देश ज़िम्बाब्वे में सूखा, बाढ़ और आर्थिक जड़ता की वजह से परिस्थितियाँ बहुत ख़राब हो गई हैं. देश में भुखमरी के हालात के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र खाद्य सहायता एजेंसी ने मानवीय सहायता की नई अपील जारी की है ताकि इन प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों से प्रभावित लोगों को भोजन सामग्री मुहैया कराई जा सके. 

सीरिया में तबाही और तकलीफ़ों पर खून क्यों नहीं खौलता?

सीरिया में आठ वर्षों के गृहयुद्ध के दौरान जानलेवा हवाई हमलों और आतंकवादी हमलों ने लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया और लाखों अन्य को ज़ख़्मी छोड़ दिया. ऐसे हालात में संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत कार्यों की डिपुटी कॉर्डिनेटर उर्सुला मुएलर ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद के सामने एक चुभने वाला सवाल रखा – क्या से परिषद ऐसे हालात में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकती जब स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों को युद्ध की एक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, फिर भी इस पर लोगों का ख़ून क्यों नहीं खौलता?