मानवीय राहत

मोज़ाम्बीक़: यूएन महासचिव ने बर्बरतापूर्ण हत्याओं पर जताया शोक

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मोज़ाम्बीक़ में स्थानीय प्रशासन से हाल के दिनों में क्रूर हत्याओं की घटना की जाँच कराने और दोषियों की जवाबदेही तय किये जाने का आग्रह किया है. ये हत्याएँ देश के उत्तरी काबो डेलगाडो प्रान्त में हुई हैं जहाँ हथियारबन्द गुटों ने लगभग 50 लोगों की सिर धड़ से अलग कर हत्या कर दी है. 

भुखमरी प्रभावित इलाक़ों में अकाल की आशंका - तत्काल कार्रवाई का आग्रह

खाद्य असुरक्षा से गम्भीर रूप से पीड़ित (Hot spots) बुरकिना फ़ासो, पूर्वोत्तर नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और यमन, में पीड़ितों तक तत्काल सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें अकाल के गर्त में धँसने से बचाया जा सके. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने शुक्रवार को इस सम्बन्ध में अपनी चेतावनी ज़ाहिर करते हुए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से  त्वरित कार्रवाई का आहवान किया है. 

यमन में बाल कुपोषण का गम्भीर संकट, पूरी पीढ़ी पर मँडराता जोखिम

यमन में भुखमरी के कारण हाल के दिनों में कुपोषण से पीड़ित बच्चो की संख्या अभूतपूर्व दर से बढ़ रही है. यमन को दुनिया में सबसे ख़राब मानवीय संकट के रूप में देखा जाता है और देश में हिंसक संघर्ष और आर्थिक बदहाली को दुष्प्रभावों को दूर करने के लिये पर्याप्त धनराशि का अभाव हालात को और जटिल बना रहा है.   

भूमध्यसागर में फँसे शरणार्थियों को जहाज़ो से सुरक्षित उतारे जाने की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि भूमध्यसागर में बचाव एवँ तलाश अभियान के दौरान बचाए गए लोगों को तटों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिये जल्द से जल्द प्रयास किये जाने होंगे. ग़ौरतलब है कि 400 से ज़्यादा शरणार्थी व प्रवासी तीन जहाज़ों पर मौजूद हैं और उनमें से कुछ लोग कई हफ़्तों से वहाँ फँसे हुए हैं.  अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने शरणार्थियों व प्रवासियों को सुरक्षित ढँग से उतारे जाने के लिये एक क्षेत्रीय समझौते की ज़रूरत को भी रेखांकित किया है.

रोहिंज्या संकट का स्थायी समाधान ढूँढने की आवश्यकता पर बल

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने विस्थापित और राष्ट्रविहीन रोहिंज्या समुदाय के लिये अपील जारी करते हुए कहा है कि म्याँमार और अन्य देशों में रह रहे रोहिंज्या समुदाय के लोगों की पीड़ाओं को ना भुलाकर उनकी मुश्किलों का स्थायी हल निकाला जाना होगा. तीन वर्ष पहले अगस्त 2017 में म्याँमार में दमनकारी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण ली थी. लेकिन उनके समक्ष आज भी चुनौतियाँ हैं जिन्हें कोविड-19 महामारी ने और भी गम्भीर बना दिया है.

अभूतपूर्व समय में असाधारण परिस्थितियों में काम कर रहे राहतकर्मियों की सराहना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘विश्व मानवीय दिवस’ पर अपने सन्देश में उन राहतकर्मियों के प्रति आभार जताया है जो विकराल चुनौतियों के बावजूद कोविड-19 और अन्य संकटों से जूझ रहे लाखों-करोड़ों लोगों की ज़िंदगियों को बचाने और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया है कि ख़ामोशी से काम कर रहे सहायताकर्मी  एक बेहद मुश्किल दौर में असाधारण कार्य कर रहे हैं. 

कोविड-19: 'पीड़ा और मौत के सबब' अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्धों को हटाने की अपील

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक समूह ने आग्रह किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान क्यूबा, ईरान, सूडान सहित अन्य देशों पर लगे प्रतिबन्ध हटाया जाना या उनके असर को कम करना बेहद अहम है. यूएन विशेषज्ञों के मुताबिक प्रभावित देशों में जनता कष्टों का सामना कर रही है और प्रतिबन्ध हटाने या उनमें ढील देने से स्थानीय समुदायों तक अहम राहत सामग्री पहुँचाना सम्भव हो सकेगा. 

कोविड-19: निर्बल देशों में विनाशकारी संकटों से बचने के लिये सहायता बढ़ाने का आहवान

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और उससे उपजी आर्थिक मन्दी के कारण पिछले तीन दशकों में पहली बार वैश्विक ग़रीबी में वृद्धि दर्ज किये जाने की आशंका प्रबल हो गई है. मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) के प्रमुख मार्क लोकॉक ने एक चेतावनी जारी करते हुए इस वर्ष के अन्त तक 26 करोड़ से ज़्यादा लोगों के भुखमरी के कगार पर पहुँच जाने का ख़तरा व्यक्त किया है और जी-20 समूह के देशों से ठोस कार्रवाई करने की पुकार लगाई है.

सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित – सीरिया को मदद की अवधि बढ़ी

तुर्की से सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में मानवीय राहत पहुँचाने की व्यवस्था जारी रखने के लिए एक अहम प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में शनिवार को पारित किया गया है. प्रस्ताव 2533 के ज़रिये बाब अल-हावा सीमा चौकी से होकर अगले एक वर्ष तक भोजन, दवाएँ और अन्य जीवनरक्षक सामग्री  ज़रूरतमन्दों तक भेजी जानी सम्भव हो सकेगी. मानवीय राहत पहुँचाने के लिए बाब अल-हावा एक अहम पड़ाव है जहाँ से इदलिब तक सहायता सामग्री पहुँचाई जा सकती है. 

कोविड-19: पुख़्ता व्यवस्था के अभाव में वैश्विक कार्रवाई लड़खड़ाने की आशंका 

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय राहत एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने 35 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने के लिए एक साझा अपील जारी की है जिसका इस्तेमाल कोविड-19 का जोखिम झेल रहे समुदायों तक पहुंचाने के लिए वैश्विक राहत केंद्रों (Global aid hubs) पर पुख़्ता इंतज़ाम किए जाएंगे. यूएन एजेंसियों ने आगाह किया है कि ज़रूरी राहत सेवाओं के अभाव में असरदार वैश्विक कार्रवाई में बड़ी रुकावट का सामना करना पड़ सकता है.