मानवाधिकार

रोहिंज्या मामले पर आईसीजे का म्याँमार को 'अस्थाई आदेश'

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने  म्याँमार से देश में अल्पसंख्यक रोहिंज्या समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव क़दम उठाने को कहा है.  कोर्ट ने गुरूवार को एक 'अस्थाई आदेश' जारी करके जनसंहार के अपराधों से संबंधित तथ्यों को नष्ट होने से बचाने की व्यवस्था करने का भी आग्रह किया. उन उपायों के बारे में पहली रिपोर्ट चार महीने के भीतर और फिर इस मामले में कोर्ट का अंतिम फ़ैसला आने तक हर छह महीने में रिपोर्ट जारी करके इन उपायों का ब्यौरा कोर्ट को देने का भी आदेश दिया गया है...

म्याँमार: रोहिंज्या व लोकतांत्रिक बदलावों के लिए उम्मीद बची है

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ यैंगही ली ने कहा है कि म्याँमार को अलबत्ता संभवतः जनसंहार के अपराधों सहित अंतरराष्ट्रीय अपराधों के “गंभीर आरोपों” का समाधान निकालना है, फिर भी उन्होंने देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. इन आरोपों में संभावित जनसंहार के आरोप भी शामिल हैं.  

कोलंबिया: 2019 में बड़ी संख्या में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौतें

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने कोलंबिया में वर्ष 2019 में बड़ी संख्या में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौतों पर गहरी चिंता जताई है. कार्यालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी करके ये जानकारी दी है. "सबसे ज़्यादा ऐसे समूहों के लोगों को निशाना बनाया गया जो अपने समुदायों के लोगों के लिए मानवाधिकारों की हिमायत कर रहे थे और उनमें आदिवासी और अफ्रो-कोलंबियन जैसे जातीय समुदाय प्रमुख हैं."

बाल यौन शोषण पर 'गोपनीयता का पर्दा' हटाए जाने का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि वेटिकन स्थित चर्च मुख्यालय को उन लोगों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई करनी होगी जो अपने बचपन के दौरान चर्च पादरियों द्वारा यौन शोषण का शिकार हुए.

तीसरी कमेटी: मानवाधिकार संरक्षण की ज़िम्मेदारी

मादक पदार्थों पर नियंत्रण से लेकर, इंडीजिनस यानी आदिवासी लोगों के अधिकारों और आतंकवाद निरोधक उपायों तक, इन सभी हालात में मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी है - संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति पर. तीसरी समिति को सामाजिक, मानवीय सहायता और सांस्कृतिक मामलों की समिति भी कहा जाता है. इसके सामने जटिल समस्याओं और चुनौतियों की एक लंबी सूची है जिन पर ये समिति नीतियाँ व कार्यक्रम बनाती है.  हर साल सितंबर में जब विश्व नेता यूएन मुख्यालय में एकत्र होते हैं तो उनके विचारों और संकल्पों को हक़ीक़त में बदलने के लिए क्या-क्या किया जाता है, इस बारे में हमारी श्रंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है महासभा की तीसरी समिति के बारे में... 

हर चौथा बच्चा अब भी 'अदृश्य', मगर क्यों!

पिछले एक दशक में विश्व में ऐसे बच्चों के अनुपात में 20 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जिनके जन्म का आधिकारिक पंजीकरण किया जाता है, इसके बावजूद पांच साल से कम उम्र के 16 करोड़ से ज़्यादा बच्चों यानी हर चार में से एक बच्चे का पंजीकरण अब भी नहीं हुआ है. अपनी स्थापना के 73 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.  

म्याँमार: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की अपील

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत यंगी ली ने कहा है कि रोहिंज्या लोगों पर अत्याचारों के आरोप में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नवंबर में गांबिया द्वारा दाख़िल किए गए क़ानूनी मुक़दमे के बाद से ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ ऑनलाइन मंचों पर विद्वेष यानी शत्रुता का माहौल बढ़ गया है. यंगी ली ने म्याँमार सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों से सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

 

मानवाधिकार दिवस: युवाओं की सक्रियता व ऊर्जा पर ध्यान

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2019 के मानवाधिकार दिवस के मौक़े पर ख़ासतौर से युवाओं की सक्रियता व ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी लोगों के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया है.  मानवाधिकार दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को मनाया जाता है.

मानवाधिकार दिवस: युवाओं पर है ध्यान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 2019 के मानवाधिकार दिवस पर जीवन में मानवाधिकार सुनिश्चित करने में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया है.  उन्होंने कहा है...

विकलांगों के समावेशन के लिए तेज़ कार्रवाई की दरकार

संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने विकलांग लोगों के अधिकार सुनिश्चित करने के इरादे से अभूतपूर्व फ़्रेमवर्क पर सहमति बनाई है. लेकिन महत्वाकांक्षा और यथार्थ में अब भी एक बड़ा फ़ासला है और लाखों विकलांगों को अब भी रोज़मर्रा के जीवन में कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ता है.  यूएन उपप्रमुख ने शनिवार को क़तर की राजधानी दोहा में विकलांगता और विकास के विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही.