मादक पदार्थ

कोविड-19: ड्रग्स की लत के आदी लोगों की सँख्या बढ़ने की आशंका

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण बढ़ती बेरोज़गारी और घटते अवसरों का सबसे ज़्यादा असर निर्धनतम समुदायों पर हो रहा है जो उन्हें धन कमाने के लिए नशीली दवाओं की तस्करी, खेती और मादक पदार्थों (ड्रग्स) के इस्तेमाल की ओर धकेल सकता है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय (UNODC) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी की है जो दर्शाती है कि दुनिया में साढ़े तीन करोड़ से ज़्यादा लोग अब नशे की लत का शिकार हैं.

कम उम्र में शराब व तंबाकू का सेवन है बढ़ती नशाखोरी की वजह

संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड’ (आईएनसीबी) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक 16-19 आयु वर्ग में एल्कोहॉल,  तंबाकू और केनेबिस (भांग) का सेवन बालिग होने पर ग़ैरक़ानूनी नशीली दवाओं के इस्तेमाल की आशंका को बढ़ा देता है.

मामूली अपराधियों का आतंकवाद की ओर रुख़ पैदा कर रहा है ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस के दौरान ये जानकारी सामने आई है कि छोटे-छोटे अपराधी अवसर का लाभ उठाने के लिए आतंकवाद को अपना रहे हैं, जोकि चिंता का विषय है. संयुक्त राष्ट्र अंतरक्षेत्रीय अपराध और न्याय अनुसंधान संस्थान (यूएनआईसीआरआई) के साथ काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय सलाहकार तमारा मकरेंको ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के ख़तरों पर खुली बहस के दौरान इस संबंध में जानकारी को साझा किया.

ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ती समस्याएं

मादक दवाओं के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रतिकूल असर अनुमान से कहीं ज़्यादा गंभीर और व्यापक है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है. रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व में मादक दवाओं और पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाली समस्याओं से साढ़े तीन करोड़ लोग पीड़ित हैं लेकिन हर सात में से एक पीड़ित का ही उपचार हो पाता है.