लोकतन्त्र

म्याँमार: आम जन के साथ एकजुटता और उनकी रक्षा ज़रूरी, यूएन विशेषज्ञ का आग्रह

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ टॉम एण्ड्रयूज़ ने ध्यान दिलाया है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का यह दायित्व है कि म्याँमार में, अपने ही देश की सेना द्वारा किये जा रहे हमलों का सामना कर रहे लोगों की रक्षा की जाए. यूएन न्यूज़ के साथ उनकी ख़ास बातचीत का यह दूसरा हिस्सा है, जिसमें विशेष रैपोर्टेयर ने म्याँमार के पड़ोसी देशों से, सुरक्षा की ख़ातिर भाग रहे लोगों को शरण देने का आग्रह किया है.

म्याँमार में हिंसा तत्काल रोकनी होगी - यूएन एजेंसियाँ

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र की टीम ने देश में आम नागरिकों के विरुद्ध हिंसा पर विराम लगाए जाने की अपनी पुकार फिर दोहराई है. म्याँमार में, एक फ़रवरी को, सैन्य तख़्तापलट के बाद व्यापक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है. 

म्याँमार: हिंसक झड़पों के कारण हज़ारों लोग विस्थापित

म्याँमार के सुरक्षा बलों और क्षेत्रीय हथियारबन्द गुटों के बीच झड़पों में देश के अनेक हिस्सों में अब तक 17 आम नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है. मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिये संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने बुधवार को म्याँमार के मौजूदा हालात पर एक अपडेट जारी कर बताया है कि हिंसा की वजह से हज़ारों लोग विस्थापित हुए हैं. 

म्याँमार की सेना, देश के भविष्य के लिये ख़तरा - यूएन दूत की चेतावनी

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने कहा है कि देश की सेना अपने ही नागरिकों के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई है, जिससे देश के भविष्य पर जोखिम मंडरा रहा है. विशेष दूत ने म्याँमार में वार्षिक 'सैन्य बल दिवस' की पूर्व संध्या पर, शुक्रवार को जारी अपने बयान में म्याँमार मे हालात पर चिन्ता जताई है.  

म्याँमार में ‘हालात बिगड़ने की आशंका’, आपात बैठक बुलाए जाने का आग्रह

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने मौजूदा हालात पर चर्चा के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से सभी हितधारकों की एक आपात बैठक बुलाए जाने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि इस वार्ता में उन सांसदों को भी आमन्त्रित किया जाना होगा जो फ़रवरी मे सैन्य तख़्ता पलट से पहले चुनावों में लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए थे.

बोलीविया में, विपक्षी हस्तियों की गिरफ़्तारी के बाद, क़ानूनी प्रक्रिया पर अमल करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बोलीविया में, पूर्व अन्तरिम राष्ट्रपति ज्यानीन आनेस और अनेक पूर्व मन्त्रियों को गिरफ़्तार किये जाने के एक दिन बाद, तमाम निर्धारित क़ानूनी प्रक्रियाओं का पालन किये जाने की महत्ता की तरफ़ ध्यान दिलाया है.

म्याँमार: शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा की कड़े शब्दों में निन्दा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्याँमार में शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा की कठोर शब्दों में निन्दा की है और चिकित्साकर्मियों, नागरिक समाज, श्रम संगठनों व पत्रकारों पर लगाई गई पाबन्दियों पर गहरी चिन्ता जताई है. फ़रवरी महीने में सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने के बाद से ही म्याँमार में व्यापक स्तर पर देश के अनेक शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं.

म्याँमार: यंगून में शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित छोड़ दिये जाने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को, म्याँमार के यंगून शहर में उन सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित रिहा कर दिये जाने देने की माँग की है, जो सुरक्षा बलों की घेराबन्दी में फँस गए थे. ख़बरों के अनुसार, शहर के सानचाउंग इलाक़े में शान्तिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को, कई घण्टों तक इलाक़ा छोड़कर नहीं जाने दिया गया था. 

म्याँमार: हिंसा, विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा परिषद की दृढ़ता व एकजुटता पर बल

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीना श्रेनर बर्गनर ने आगाह किया है कि देश में राजनैतिक संकट के बीच स्थानीय लोगों ने सुरक्षा परिषद और यूएन के सदस्य देशों से, तख़्तापलट के लिये ज़िम्मेदार सैन्य नेतृत्व के ख़िलाफ़ कार्रवाई का इन्तज़ार है, लेकिन यह उम्मीद धूमिल होती जा रही है. उन्होंने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए ज़ोर देकर कहा कि म्याँमार के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की एकता और दृढ़ता पहले से कहीं ज़्यादा अहम है.

म्याँमार: सेना से प्रदर्शनकारियों की 'हत्याएँ' और 'क्रूर बल प्रयोग' रोकने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने गुरूवार को कड़े शब्दों में कहा है कि म्याँमार में सेना को, शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अपना “क्रूर और हिंसक दमन” रोकना होगा. मानवाधिकार उच्चायुक्त का ये सख़्त बयान ऐसी ख़बरों को बीच आया है कि 1 फ़रवरी को सेना द्वारा तख़्तापलट किये जाने के बाद 54 लोग मारे जा चुके हैं, इनमें से 38 लोगों की मौत, बुधवार को केवल एक दिन में हुई है.