लड़कियाँ

अफ़ग़ानिस्तान: यूनीसेफ़ का ज़ोर, लड़कियों को तालीम से वंचित ना रखा जाए

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान से मिली इन ख़बरों का स्वागत किया है कि वहाँ शनिवार से सैकण्डरी स्कूल खोले जा रहे हैं. कोविड-19 के कारण, कई महीनों से ये स्कूल बन्द थे. मगर, यूनीसेफ़ ने ज़ोर देकर ये भी कहा है कि लड़कियों को, स्कूलों से बाहर नहीं रखा जाए, यानि उन्हें भी स्कूलों में जाकर शिक्षा हासिल करने का मौक़ा दिया जाए.

यूनीसेफ़: अभूतपूर्व संख्या में, लड़के-लड़कियाँ प्रवासी या विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने शुक्रवार को प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में कहा है कि अभूतपूर्व रूप से, ज़्यादा संख्या में लड़के और लड़कियाँ अपने रहने के स्थाई ठिकानों से विस्थापित हैं और वर्ष 2020 में, लगभग 3 करोड़ 55 लाख लड़के-लड़कियाँ, अपने जन्म वाले देश के बाहर जीवन जी रहे थे.

संघर्षों में फँसे बच्चों की जीवनरक्षक संरक्षा के लिये उपाय ज़रूरी

बाल अधिकारों के लिये काम करने वाली, संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा है कि युद्धक परिस्थितियों में फँस गए बच्चों को सुरक्षा व संरक्षा मुहैया कराना, अन्तरराष्ट्रीय एजेण्डा के केन्द्र में होना चाहिये, और इसमें कोविड-19 का मुक़ाबला करने के प्रयास भी शामिल हैं. 

ब्रिटेन से सहायता राशि में 85% की कटौती से, महिलाओं व लड़कियों पर गम्भीर प्रभाव

संयुक्त राष्ट्र की यौन व प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी – UNFPA ने गुरूवार को कहा कि ब्रिटेन द्वारा, संयुक्त राष्ट्र के परिवार नियोजन कार्यक्रम को दी जाने वाली सहायता राशि में इस वर्ष 85 प्रतिशत की कटौती करने का जो इरादा ज़ाहिर किया गया है उसके कारण, दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों व उनके परिवारों के लिये भयानक परिणाम होंगे.

लैंगिक समानता, 'इस सदी का अधूरा मानवाधिकार संघर्ष' - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को, पीढ़ी समानता फ़ोरम (Generation Equality Forum) में कहा कि महिलाओं के लिये समान अधिकार प्राप्ति का कार्य – “सदी का ऐसा मानवाधिकार संघर्ष है जो अभी अधूरा है”. ये फ़ोरम, मैक्सिको सिटी में सोमवार को शुरू हुआ.

मातृत्व स्वास्थ्य से जुड़े "गम्भीर परिणामों" की रोकथाम की अपील

दुनिया भर में प्रजनन और मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार के लिये समर्पित एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष UNFPA ने,  गर्भावस्था और मातृत्व स्वास्थ्य से जुड़े गम्भीर परिणामों की रोकथाम करने के लिये, वर्ष 2030 तक ढाई अरब डॉलर की रक़म जुटाने की अपील की है. 

संशोधित अफ़ग़ान क़ानून भी, यौन हिंसा की पीड़ित महिलाओं को इन्साफ़ दिलाने में नाकाम

यूएन मानवाधिकार एजेंसी और अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा है कि देश में न्याय व्यवस्था अब भी हिंसा और यौन अपराधों की शिकार महिला पीड़ितों को पर्याप्त सहायता मुहैया कराने में नाकाम है, जब वर्ष 2009 में एक ऐसा क़ानून बनाया गया था जिसे महिलाओं को संरक्षा व सुरक्षा मुहैया कराने के क़ानूनी प्रयास आगे बढ़ाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण क़दम क़रार दिया गया था.

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 27 नवम्बर 2020

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लड़की: समानता का जन्म-सिद्ध अधिकार

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) की भारत में 'तेजस्विनी' परियोजना के तहत आयोजित कन्या नामकरण समारोह, कन्या भ्रूण हत्या को कम करने और भारत में महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा लिंग आधारित हिंसा के ख़िलाफ़ 16 दिनों की सक्रियता मुहिम के मौक़े पर भारत के महाराष्ट्र प्रदेश में, IFAD द्वारा वित्त पोषित ये परियोजना, एक बच्ची को जन्म देने और उसके इर्द-गिर्द नकारात्मक धारणाओं को उलटने की कोशिश कर रही है... देखें ये वीडियो...

एचआईवी से वैश्विक नुक़सान, कोविड-19 के कारण, बहुत ज़्यादा होगा

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि देशों को एचआईवी/एड्स का मुक़ाबला करने के लिये नए महत्वाकाँक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिये ताकि लाखों अतिरिक्त लोगों को कोविड-19 महामारी से सम्बन्धित संक्रमण और मौतों से बचाया जा सके.