लैंगिक समानता

कोविड-19 के कारण बढ़ी लैंगिक हिंसा के ख़िलाफ़ दोगुने प्रयासों की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि घरेलू हिंसा से लेकर यौन उत्पीड़न,ऑनलाइन उत्पीड़न, बाल विवाह में वृद्धि और लिंग आधारित हिंसा (GBV) ऐसा वैश्विक संकट है, जो महामारी के कारण और ज़्यादा बढ़ गया है. 

कोविड-19: अधिकाँश देश आर्थिक व सामाजिक दुष्प्रभावों से महिलाओं की रक्षा करने में विफल 

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण महिलाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, लेकिन अधिकाँश देश उनके लिये पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक संरक्षा उपाय करने में नाकाम साबित हो रहे हैं. महिला सशक्तिकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र की संस्था (UN Women) की प्रमुख पुमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने सोमवार को यह बात कही है. 

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलैटिन 25 सितम्बर 2020

25 सितम्बर 2020 के इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

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भारत: बिहार में बाढ़ से राहत में लैंगिक संवेदनशीलता

भारत के पूर्वी प्रदेश बिहार में बढ़ती कोविड-19 महामारी और ऊपर से बाढ़ की मार ने लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं. ख़ासतौर पर किशोरियों और महिलाओं के लिये ज़रूरी सेवाओं तक पहुँच बहुत कठिन हो गई है. ऐसे में भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफ़पीए) ने महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता सम्बन्धी विभिन्न आवश्यक सेवाएँ देने का बीड़ा उठाया है.  

बीजिंग सम्मेलन: 25 वर्ष बाद भी उस एक्शन मंच की महत्ता नहीं हुई है कम

महिलाओं की प्रगति और पुरुषों के साथ उनकी बराबरी सुनिश्चित करने के मुद्दे पर हुए ऐतिहासिक बीजिंग विश्व सम्मेलन को 25 वर्ष गुज़र जाने के बाद भी उसकी महत्ता कम नहीं हुई है. महिला प्रगति व सशक्तिकरण के लिये काम करने वाली यूएन संस्था – यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशक फ़ूमज़िले म्लाम्बो न्गक्यूका ने शुक्रवार को ये बात ध्यान दिलाई. 

कोविड-19 से उबरने के प्रयासों में महिलाओं की है केन्द्रीय भूमिका

संयुक्त राष्ट्र उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि युवा महिलाओं को पर्यावरणीय, आर्थिक व नस्लीय न्याय के आपस में जुड़े मोर्चों पर जद्दोजहद करना पड़ रहा है. उप महासचिव ने गुरूवार को गोलमेज़ विचार-गोष्ठि की श्रृंखला दूसरी कड़ी में ये बात कही जिसमें मशहूर महिला अर्थशास्त्रियों ने शिरकत की. 

कोविड-19: महिलाएँ सर्वाधिक प्रभावित, चरम ग़रीबी मिटाने में हुई प्रगति पलटने का जोखिम

वैश्विक महामारी कोविड-19 और उसके सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभाव चार करोड़ 70 लाख महिलाओं को ग़रीबी के गर्त में धकेल सकती है. संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को एक नई रिपोर्ट जारी की है जो दर्शाती है कि कोरोनावायरस संकट के कारण चरम ग़रीबी से निपटने में अब तक हुई दशकों की प्रगति की दिशा उलटने का ख़तरा पैदा हो गया है. यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि कोविड-19 से उबरने के दौरान पुनर्बहाली कार्रवाई और नीतिगत प्रयासों के केन्द्र में महिलाओं को रखना होगा. 

भारत में महिला सशक्तिकरण के लिये ‘दिशा’

भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और आइकिया फाउण्डशन की ‘दिशा’ परियोजना के तहत दस लाख महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है. इसमें संरक्षकों का दल बनाकर, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रैज़िडेंट रैप्रैज़ेटेटिव, शोको नोडा की क़लम से...

कोविड-19: दक्षिणपूर्व एशिया की टिकाऊ व समावेशी पुनर्बहाली का ख़ाका पेश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दक्षिणपूर्व एशिया को वैश्विक महामारी कोविड-19 से असरदार ढँग से उबारने के लिये विषमताओं को दूर करना, डिजिटल खाइयों को पाटना, अर्थव्यवस्थाओं को हरित बनाना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और सुशासन सुनिश्चित करना अहम होगा. यूएन प्रमुख ने गुरुवार को इस क्षेत्र पर केन्द्रित एक नया नीतिपत्र (Policy brief) जारी किया है जिसमें बेहतर पुनर्बहाली के लिये सिफ़ारिशें पेश की गई हैं. 

कोविड-19: उबरने के प्रयासों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी ज़रूरी

ऐसे में जबकि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिये निर्धारित संसाधन भी कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में इस्तेमाल किये जा रहे हैं तो मंगलवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिये 25 वर्ष पहले तय किये गए लक्ष्यों को हासिल करने की रफ़्तार किस तरह तेज़ की जाए. इस चर्चा में सरकारों के प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी नेताओं, कम्पनियों के शीर्ध अधिकारियों और शैक्षिक विशेषज्ञों ने वर्चुअल माध्यमों से शिरकत की.