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लैंगिक भेदभाव

संयुक्त राष्ट्र ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान के लिए समर्थन जारी रखने की पुकार लगाई है.
© UNICEF/Sayed Bidel

अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता - यूएन मानवीय राहत समन्वयक

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवीय राहत अधिकारी ने गुरूवार को आगाह किया है कि यूएन के लिए अफ़ग़ान महिलाओं के काम करने पर तालेबान द्वारा लगाई गई पाबन्दी से, देश में राहत प्रयासों पर विनाशकारी नतीजे होंगे. उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता है और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को, देश में ज़रूरतमन्दों के लिए समर्थन जारी रखना होगा.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि शहरी गतिशीलता प्रणाली और सार्वजनिक स्थान सुरक्षित, समावेशी और लिंग-उत्तरदायी होने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, भारत के शहरों में महिलाओं के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का निर्माण करें.
UNIC India/Rohit Karan

भारत: शहरों में सार्वजनिक परिवहन को, महिलाओं के लिए सुरक्षित व सुलभ बनाना

भारत में शहरों के विकास के साथ-साथ, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक परिवहन सभी के लिए सुरक्षित और सुलभ हो, विशेष रूप से महिलाओं के लिए. ये एक नए, ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनने की दिशा में अहम क़दम है, इसके लिए महिलाओं के विकास से, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ना होगा.

सेनेगल में एक महिला सामूहिक प्रक्रिया सार्डिनेला
संयुक्त राष्ट्र महिला/ब्रूनोडेमोक

निवेश नहीं हुआ तो, लैंगिक समानता प्राप्ति में लग सकते हैं 300 साल

महिला सशक्तिकरण के लिये प्रयासरत यूएन संस्था (UN Women) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) ने बुधवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जो दर्शाती है कि यदि पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में प्रगति की मौजूदा रफ़्तार ही जारी रही, तो इस लक्ष्य को पाने में क़रीब 300 साल लग सकते हैं.

अल सल्वाडोर में कुछ लड़कियाँ, महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा का अन्त करने के लिये अभियान चलाते हुए.
© UNICEF

स्पॉटलाइट: कोविड महामारी में, लिंग आधारित हिंसा का मुक़ाबला करने की पहल

कोविड-19 महामारी से बचने के लिये लागू की गई तालाबन्दियों व अन्य प्रतिबन्धों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र और योरोपीय संघ के एक संयुक्त कार्यक्रम के ज़रिये, लगभग छह लाख 50 हज़ार महिलाओं और लड़कियों को, लिंग आधारित हिंसा के मामलों में सहायता व सेवाएँ मुहैया कराई गईं. ये कार्यक्रम, एक गम्भीर और व्यापाक मानवाधिकार उल्लंघन – लिंग आधारित हिंसा को ख़त्म करने के लिये चलाया गया है.

अफ़ग़ानिस्तान के ननगरहार प्रान्त में ईंट के एक भट्टे पर काम करता 7 साल का एक बच्चा. बाल मज़दूरी भी समाकालीन दासता का एक रूप है.
UNICEF/Noorani

'21वीं सदी की दुनिया में, दासता स्वीकार्य नहीं'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दासता के समकालीन रूपों के प्रभावों की तरफ़ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि इस तरह की घिनौने चलन के लिये 21वीं सदी में कोई जगह नहीं हो सकती. महासचिव ने दासता के उन्मूलन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ये बात कही है, जोकि 2 दिसम्बर को मनाया जाता है.