कृत्रिम बुद्धिमत्ता

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नैतिक जामा पहनाने के लिये, 193 देशों का वैश्विक समझौता

संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के तमाम सदस्य देशों ने गुरूवार को एक ऐसा ऐतिहासिक मसौदा स्वीकृत किया है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) का स्वस्थ विकास विकास सुनिश्चित करने के लिये दरकार साझा मूल्य व सिद्धान्त परिभाषित किये गए हैं.

डिजिटलीकरण व नवाचार से टिकाऊ परिवहन साधनों को मिल रही मज़बूती

डिजिटलीकरण ने आवाजाही व गतिशीलता के लिये नवाचारी समाधानों को आकार दिया है और वाहन ख़रीदने के बजाय अब टैक्नॉलॉजी के ज़रिये उसकी सुलभता ज़्यादा अहम हो गई है. भारत में ‘ओला मोबिलिटी इंस्टीट्यूट’ (Ola Mobility Institute) में शोध विभाग की प्रमुख, ऐश्वर्या रामन का कहना है कि पिछले एक दशक में स्मार्ट फ़ोन की सर्वत्र सुलभता और कम क़ीमत पर डेटा की उपलब्धता ने टिकाऊ परिवहन साधनों की सम्भावनाओं के नए द्वार खोले हैं.

सड़क हादसों में होने वाली मौतें, एआई (AI) की मदद से की जा सकती हैं आधी

संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष दूतों ने गुरूवार को, “सड़क सुरक्षा के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता” (AI) नामक एक नई पहल शुरू करते हुए कहा है कि देशों व निवेशकों को, सड़कें हर किसी के लिये सुरक्षित बनाने की ख़ातिर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास व प्रयोग बढाना होगा.

कृत्रिम बुद्धिमता प्रणालियों से निजता के लिये जोखिम - तत्काल कार्रवाई की मांग

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफ़िशियल इंटैलीजेंस / एआई) की उन प्रणालियों की बिक्री व इस्तेमाल पर स्वैच्छिक रोक लगाए जाने का आग्रह किया है, जिनसे मानवाधिकारों के लिये गम्भीर जोखिम पैदा हो सकते हैं.

स्वास्थ्य देखभाल में एआई के इस्तेमाल पर नई रिपोर्ट – छह दिशानिर्देशक सिद्धान्त पेश

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) के उपयोग से दुनिया भर में लाखों लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है, मगर यह ज़रूरी है कि इसके विकास, तैनाती और इस्तेमाल के केन्द्र में मानवाधिकारों और आचार-शास्त्र को रखा जाए.   

एक ज़िम्मेदार आर्टिफ़िशियल इंटैलिजेंस (AI) - समय की ज़रूरत (ब्लॉग)

भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़िडेन्ट कोऑर्डिनेटर (RCO), रेनाटा डेज़ालिएन का मानना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना, आर्टिफ़िशियल इंटैलिजेंस यानि AI से, सामाजिक व आर्थिक खाई और भी ग़हरी हो सकती है, जिसके भेदभावपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं. 
 

महिलाओं और लड़कियों का विज्ञान से है नाता – यूएन प्रमुख 

बहुत सी महिला वैज्ञानिकों को, वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान प्रयोगशालाएँ बन्द होने और सम्बन्धियों की देखभाल करने की बढ़ी ज़िम्मेदारियाँ सम्भालने सहित, अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार, 11 फ़रवरी, को ‘विज्ञान में महिलाओं व लड़कियों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी में, लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने की पुकार लगाई है.