कृषि

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन 16 अक्टूबर 2020

इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
बहुतायत वाली दुनिया में करोड़ों लोगों को अब भी मयस्सर नहीं है, एक वक़्त की भरपेट भोजन ख़ुराक.
नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता World Food Program कैसे कर रहा है भुखमरी का मुक़ाबला, एक इंटरव्यू.

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ग्रामीण महिलाओं को भविष्य के संकटों के मद्देनज़र मज़बूत करने की दरकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ग्रामीण महिलाएँ कृषि, खाद्य सुरक्षा और भूमि व प्राकृतिक संसाधनों के प्रबन्धन में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं मगर फिर भी वो भेदभाव का सामना करती हैं, उनके साथ व्यवस्थागत नस्लभेद होता है और वो ढाँचागत ग़रीबी में जीवन जीती हैं. 

खेतों में आग: बदली-बदली सी है फ़िजाँ, बदलनी होंगी आदतें भी

वर्ष 2019 में, भारत की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास, इतना धुँधलका छा गया था कि विमानों की उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा, हज़ारों स्कूल बन्द करने पड़े और देश की राजधानी में लोगों को या तो घरों के भीतर ही रहने या फिर फ़ेस मास्क पहनने की सलाह दी गई. सवाल है कि आख़िर ऐसी नौबत क्यों आई?

 वैश्विक खाद्य उत्पादन में पारिवारिक किसानों की भूमिका पर केंद्रित नई मुहिम

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में लाखों-करोड़ों पारिवारिक किसानों का दुनिया में अधिकाँश खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ा है. क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा में इन किसानों की अहम भूमिका के प्रति समझ बढ़ाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (UNFAO) और अन्य साझीदार संगठनों ने बुधवार को एक मुहिम शुरू की है. 

कोविड-19: अनिश्चितता से निपटने के लिए कमर कस रहे हैं वैश्विक खाद्य बाज़ार

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण खाद्य बाज़ारों में अगले कई महीनों तक अनिश्चितता क़ायम रहने की आशंका है लेकिन इसके बावजूद कोरोनावायरस संकट से प्रभावित अन्य सैक्टरों की तुलना में कृषि-खाद्य (Agri-food) सैक्टर इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर ढँग से तैयार दिख रहे है. 

नेपाल: पर्वतीय फ़सलों से जैवविविधता और आर्थिक विकास को बढ़ावा

नेपाल के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और उसके साझीदार संगठन स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर फ़सलों की जैवविविधता संरक्षित करने के प्रयासों में जुटे हैं ताकि खाद्य सुरक्षा और कृषि को सुदृढ़ बनाया जा सके.

कृषि जैवविविधता की सफलता की कहानी

चावल का 90 फ़ीसदी से ज़्यादा उत्पादन और खपत एशिया में है. भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति शुरू होने से पहले धान की एक लाख से ज़्यादा क़िस्में थी जिनमें स्वाद, पोषण, कीट-प्रतिरोधक क्षमता के विविध गुणों का मिश्रण होने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार ढलने की भी क्षमता भी नीहित थी. जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौती के मद्देनज़र ऐसी क़िस्मों को फिर से बढ़ावा देने के प्रयासों में सफलता मिल रही है. 

बांग्लादेश में बांस की खेती को बढ़ावा

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में विशाल शरणार्थी बस्ती की निर्माण परियोजना के लिए 2 करोड़ 40 लाख से अधिक बांसों की कटाई की गई है. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के सहयोग से स्थानीय प्रशासन बांसों के लिए देश में एक टिकाऊ बाज़ार को सृजित करने का प्रयास कर रहा है जिससे शरणार्थियों की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को बांस व्यवसाय के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा. 

'सुरक्षित भविष्य के लिए रोकना होगा मिट्टी का क्षरण'

पृध्वी पर टिकाऊ जीवन और मानव कल्याण के लिए मिट्टी का स्वस्थ होना बेहद अहम है लेकिन विश्व के सभी महाद्वीपों पर मृदा क्षरण होने से खाद्य व जल सुरक्षा और जीवन की कई बुनियादी ज़रूरतों पर ख़तरा बढ़ रहा है. इस वर्ष ‘विश्व मृदा दिवस’ के अवसर पर मिट्टी के क्षरण को रोकने और भविष्य में उसे फिर से स्वस्थ बनाने के प्रति जागरूकता के प्रसार पर ज़ोर दिया जा रहा है.

कृषि में आँकड़ों की महत्ता

टिकाऊ कृषि विकास और सतत खाद्य सुरक्षा व पोषण के लिए अच्छे निर्णय लिया जाना बहुत ज़रूरी हैं. लेकिन कृषि संबंधित फ़ैसलों के लिए प्रामाणिक आंकड़े होना आवश्यक है. छोटे कृषि उत्पादकों सहित सरकारें और व्यवसाय महत्वपूर्ण नीति और निवेश निर्णय अक्सर गुणवत्ता वाले कृषि आंकड़ों के लाभ के बिना ही अक्सर लेते हैं. डेटा के अभाव का परिणाम अक्सर उत्पादकता, कृषि आय में कमी और भुखमरी और ग़रीबी के रूप में होता है.