कृषि

नेपाल: पर्वतीय फ़सलों से जैवविविधता और आर्थिक विकास को बढ़ावा

नेपाल के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और उसके साझीदार संगठन स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर फ़सलों की जैवविविधता संरक्षित करने के प्रयासों में जुटे हैं ताकि खाद्य सुरक्षा और कृषि को सुदृढ़ बनाया जा सके.

कृषि जैवविविधता की सफलता की कहानी

चावल का 90 फ़ीसदी से ज़्यादा उत्पादन और खपत एशिया में है. भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति शुरू होने से पहले धान की एक लाख से ज़्यादा क़िस्में थी जिनमें स्वाद, पोषण, कीट-प्रतिरोधक क्षमता के विविध गुणों का मिश्रण होने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार ढलने की भी क्षमता भी नीहित थी. जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौती के मद्देनज़र ऐसी क़िस्मों को फिर से बढ़ावा देने के प्रयासों में सफलता मिल रही है. 

बांग्लादेश में बांस की खेती को बढ़ावा

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में विशाल शरणार्थी बस्ती की निर्माण परियोजना के लिए 2 करोड़ 40 लाख से अधिक बांसों की कटाई की गई है. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के सहयोग से स्थानीय प्रशासन बांसों के लिए देश में एक टिकाऊ बाज़ार को सृजित करने का प्रयास कर रहा है जिससे शरणार्थियों की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को बांस व्यवसाय के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा. 

'सुरक्षित भविष्य के लिए रोकना होगा मिट्टी का क्षरण'

पृध्वी पर टिकाऊ जीवन और मानव कल्याण के लिए मिट्टी का स्वस्थ होना बेहद अहम है लेकिन विश्व के सभी महाद्वीपों पर मृदा क्षरण होने से खाद्य व जल सुरक्षा और जीवन की कई बुनियादी ज़रूरतों पर ख़तरा बढ़ रहा है. इस वर्ष ‘विश्व मृदा दिवस’ के अवसर पर मिट्टी के क्षरण को रोकने और भविष्य में उसे फिर से स्वस्थ बनाने के प्रति जागरूकता के प्रसार पर ज़ोर दिया जा रहा है.

कृषि में आँकड़ों की महत्ता

टिकाऊ कृषि विकास और सतत खाद्य सुरक्षा व पोषण के लिए अच्छे निर्णय लिया जाना बहुत ज़रूरी हैं. लेकिन कृषि संबंधित फ़ैसलों के लिए प्रामाणिक आंकड़े होना आवश्यक है. छोटे कृषि उत्पादकों सहित सरकारें और व्यवसाय महत्वपूर्ण नीति और निवेश निर्णय अक्सर गुणवत्ता वाले कृषि आंकड़ों के लाभ के बिना ही अक्सर लेते हैं. डेटा के अभाव का परिणाम अक्सर उत्पादकता, कृषि आय में कमी और भुखमरी और ग़रीबी के रूप में होता है.

नेपाल: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए नई परियोजना मंज़ूर

नेपाल में जलवायु परिवर्तनों के असर के प्रति सहनशीलता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के उद्देश्य से बुधवार को तीन करोड़ 90 लाख डॉलर की एक परियोजना को मंज़ूरी दी गई है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित ग्रीन क्लाइमेट फ़ंड (GCF) के बोर्ड ने ताज़ा निर्णय पर जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट से दस लाख नेपाली नागरिकों को लाभ होगा. 

छोटी सी लागत से महिलाओं का बढ़ता हौसला

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम - यूएनडीपी ने भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएँ चलाई हुई हैं. इनके ज़रिए कुछ वित्तीय मदद, तकनीकी सहायता व कारोबार करने का प्रशिक्षण देकर महिलाओं का हौसला बढ़ाया जा रहा है. दिल्ली से एक रिपोर्ट...

कृषि को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (International Fund for Agricultural Development) के अध्यक्ष गिल्बर्ट हॉन्गबो इस सप्ताह भारत का दौरा कर रहे हैं. उनकी यात्रा का लक्ष्य भारत में खाद्य प्रणालियों को टिकाऊ बनाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे साझा प्रयासों को मज़बूती देना है.

यूएन रिपोर्ट: भोजन की बर्बादी रोकने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि मानव उपभोग के लिए पैदा किया जाने वाला एक तिहाई से ज़्यादा भोजन या तो बर्बाद हो जाता है या फिर उसका नुक़सान होता है.  इस रिपोर्ट में ऐसे समाधान भी पेश किए गए हैं जिन्हें अपनाए जाने से असरदार ढंग से भोजन की विशालकाय बर्बादी की रोकथाम के साथ-साथ भुखमरी से निपटने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी.

 

 

तापमान बढ़ने से 2,400 अरब डॉलर का नुक़सान होने का अनुमान

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में कामकाज की उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ने वाला है जिससे आमदनी वाले कामकाज और भारी आर्थिक नुक़सान होगा. ग़रीब देश सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे और कृषि व निर्माण क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे.