कोरोनावायरस

हिंसक संघर्ष के दौरान यौन हिंसा – रोकथाम ही ‘एकमात्र उपाय’

संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हिंसक संघर्ष के दौरान यौन हिंसा में जीवित बचे पीड़ित, लम्बे समय तक जिन विनाशकारी दुष्परिणामों को भुगतने के लिये मजबूर हैं, उनसे निपटने का सर्वोत्तम और एकमात्र इलाज, ऐसे मामलों की पूर्ण रोकथाम है. हिंसक संघर्ष में यौन हिंसा के मुद्दे पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए बताया कि यौन हिंसा को एक क्रूर युद्ध-नीति के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है.  

कोविड-19: महामारी का अन्त अभी दूर, मगर आशावान होने की वजह भी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि अनेक देशों में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्शाती है कि दुनिया अभी, महामारी पर पूर्ण रूप से क़ाबू पाने से दूर है. मगर उन्होंने स्पष्ट किया है कि न्यायसंगत टीकाकरण और साबित हो चुके सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के ज़रिये, कोरोनावायरस को नियन्त्रण में किया जा सकता है, जैसाकि बहुत से देशों ने करके दिखाया है.  

कोविड-19: निम्न आय वाले देशों को कुल वैक्सीन ख़ुराकों का केवल 0.2 प्रतिशत मिला

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोविड-19 वैक्सीन की अधिकांश ख़ुराकें अब तक धनी देशों में स्थानीय आबादी के लिये ही सम्भव हो पाई हैं. कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के लिये विश्व भर में 70 करोड़ से ज़्यादा ख़ुराकें दी जा चुकी हैं, जिनमें से 87 फ़ीसदी अपेक्षाकृत धनी देशों में दी गई हैं जबकि निम्न आय वाले देशों को केवल 0.2 प्रतिशत ख़ुराकें ही मिल पाई हैं.

कोविड सम्बन्धित क़र्ज़ पर मुद्रा कोष और विश्व बैंक के उपायों का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 के असर से उबरने की कोशिश में लगी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के सामने, क़र्ज़ राहत और अन्य वित्तीय दबाल के हालात में मदद करने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह की विकास समिति द्वारा उठाए गए क़दमों का स्वागत किया है. उन्होंने इन विश्व संगठनों के क़दमों को, “आशा के संकेत और नवीनीकृत बहुपक्षवाद क़रार दिया है.”

कोवैक्स: 100 से ज़्यादा देशों व अर्थव्यवस्थाओं में वैक्सीन ख़ुराकें वितरित

कोविड-19 वैक्सीन के न्यायसंगत ढंग से वितरण के लिये संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में स्थापित, ‘कोवैक्स’ पहल के तहत अब तक, 100 से ज़्यादा देशों व अर्थव्यवस्थाओं में साढ़े तीन करोड़ से ज़्यादा ख़ुराकें वितरित की जा चुकी हैं. इस व्यवस्था के तहत टीकों की पहली खेप 24 फ़रवरी को घाना पहुँची थी और उसके बाद से अब तक, 42 दिनों में, वैक्सीन वितरण का दायरा व्यापक स्तर पर बढ़ाया गया है.

कोविड-19: विषमताओं पर पार पाने के लिये पाँच अहम समाधान 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोविड-19 महामारी द्वारा उजागर विषमताओं को दूर करने के लिये पाँच महत्वपूर्ण उपायों को पेश किया है. उन्होंने बुधवार को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर वैक्सीन, परीक्षण और उपचार की न्यायसंगत सुलभता, बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल में निवेश, सामाजिक संरक्षा व समावेशी पड़ोस सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों को मज़बूती प्रदान किये जाने का आहवान किया है.   

कोविड-19: ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के फ़ायदे, जोखिम से कहीं ज़्यादा सकारात्मक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अधिकारी ने कहा है कि कोविड-19 वायरस की ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के लाभ अब भी व्यापक रूप में सकारात्मक ही हैं, और रक्त के थक्के जमने के बहुत कम लेकिन अत्यन्त गम्भीर मामलों की तुलना में, कहीं ज़्यादा लाभप्रद भी हैं.

कोविड-19: 'वैक्सीन पासपोर्ट' की प्रभावशीलता पर अभी और स्पष्टता की ज़रूरत

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को आगाह करते हुए कहा है कि ज़रूरी नहीं है कि कोविड-19 की वैक्सीन का टीका लगवाने से, इस महामारी के संक्रमण को पूरी तरह रोका ही जा सके, और यात्राएँ शुरू करने की अनुमति के लिये वैक्सीन पासपोर्ट जारी करना, भी कोई प्रभावशाली रणनीति नज़र नहीं आती है.

समावेशी व टिकाऊ भविष्य के लिये खेलकूद की ताक़त पर ध्यान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने खेलकूद में व्यस्त व शामिल सर्वजन से आग्रह किया है कि वो जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने, भेदभाव और पूर्वाग्रह का मुक़ाबला करने, और वैश्विक खेलकूद घटनाओं द्वारा सकारात्मक विरासत छोड़ा जाना सुनिश्चित करने में मदद करें.

कोविड-19: दुनिया भर में टीकाकरण के लिये, कोवैक्स के सामने पाँच प्रमुख चुनौतियाँ

संयुक्त राष्ट्र समर्थित कोवैक्स योजना का उद्देश्य, वर्ष 2021 के अन्त तक, दुनिया के निर्धनतम देशों की लगभग एक चौथाई यानि 25 प्रतिशत आबादी तक, कोरोनावायरस की वैक्सीन की लगभग दो अरब खुराकें पहुँचाना है. इस ऐतिहासिक प्रयास में कामयाबी हासिल करने के रास्ते में, कौन सी मुख्य चुनौतियाँ हैं जिन पर पार पाने की ज़रूरत है?