कॉप26

2021 पर एक नज़र: जलवायु कार्रवाई, या आँय, बाँय, शाँय?

इस वर्ष, संयुक्त राष्ट्र समर्थित रिपोर्टों और ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) में निरन्तर यह कड़ा सन्देश दोहराया गया: मानव गतिविधियों की वजह से जलवायु परिवर्तन, ना केवल तात्कालिक बल्कि पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिये बहुत बड़ा ख़तरा है. क्या जलवायु संकट से निपटने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों के सार्थक नतीजे सामने आएँगे?

यूनेप और भारत के बीच, जलवायु कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिये समझौता

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) और भारत के बीच, दक्षिण एशिया में जलवायु कार्रवाई के लिये बेहतर सामंजस्य बैठाने और अधिक निकटता से कार्य करने के लिये एक समझौता हुआ है. इसे ‘मेज़बान देश समझौता’ कहा जा रहा है.

कॉप26: अन्तिम चरण की वार्ता का दौर खिंचा, निर्धारित अवधि से लम्बा

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में संयुक्त राष्ट्र का 26वाँ वार्षिक जलवायु सम्मलेन (कॉप26) शुक्रवार को समाप्त होना था, मगर निर्धारित समय पर ख़त्म होने के बजाय अन्तिम चरण की वार्ताओं का दौर अभी जारी है. 

कॉप26: संकल्पों पर पानी फेरती है अरबों डॉलर की जीवाश्म ईंधन सब्सिडी; जलवायु वार्ता में तेज़ी लाए जाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने देशों की सरकारों से, कार्बन उत्सर्जन में कटौती, अनुकूलन और वित्त पोषण के विषय में, नपे-तुले अन्दाज़ में ज़्यादा महत्वाकांक्षा दर्शाने पर बल दिया है. स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में कॉप26 सम्मेलन के दौरान महासचिव ने गुरूवार को प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट किया कि आम सहमति वाले, सबसे निचले स्तर के उपाय पर्याप्त नहीं हैं. 

जलवायु कार्रवाई पर सहयोग के लिये, चीन-अमेरिका के बीच समझौते का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, बुधवार को, चीन और अमेरिका के बीच, जलवायु कार्रवाई में, और ज़्यादा निकट सहयोग करने के लिये हुए एक समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने इस समझौते को, सही दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम क़रार दिया है.

कॉप26: जीवाश्म ईंधन से मुक्त वाहनों के युग पर चर्चा; जलवायु सम्मेलन के निष्कर्ष का मसौदा पेश

एक ऐसी दुनिया जहाँ बेचे जाने वाली हर कार, बस और ट्रक, बिजली-चालित व किफ़ायती हो, जहाँ जहाज़ केवल टिकाऊ ईंधन का इस्तेमाल करें, और जहाँ विमान हरित हाइड्रोजन के सहारे उड़ान भर सकें, ये विज्ञान की एक कल्पना सी प्रतीत होती है, मगर ग्लासगो में हो रहे कॉप26 सम्मेलन के दौरान, अनेक देशों की सरकारों व व्यवसायों ने कहा है कि उन्होंने इसे वास्तविकता में बदलने के लिये काम शुरू कर दिया है. 

कॉप26: जलवायु संकट से सर्वाधिक प्रभावितों में महिलाएँ, चुकाती हैं एक बड़ी क़ीमत

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में कॉप26 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को, जलवायु परिवर्तन से महिलाओं पर होने वाले असर व जलवायु कार्रवाई में उनकी ज़रूरतों को समाहित किये जाने के मुद्दे पर चर्चा हुई. प्राकृतिक संसाधनों की देखरेख में महिलाओं व लड़कियों के ज्ञान की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, और उनमें निवेश के ज़रिये, पूर्ण समुदायों तक लाभ पहुँचाया जा सकता है. इस बीच, एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि कॉप26 में विश्व नेताओं की घोषणाओं के बावजूद, दुनिया विनाशकारी तापमान वृद्धि की ओर बढ़ रही है.

कॉप26: निर्बल देशों का कड़ा सन्देश, जलवायु वित्त पोषण के वादे निभाएँ विकसित देश

भीषण बाढ़, वनों में विनाशकारी आग और बढ़ता समुद्री जलस्तर, ये ऐसी वास्तविकताएँ हैं जिनका सामना अनेक विकासशील व द्वीपीय देशों को करना पड़ रहा है, और जिनसे अनगिनत लोगों के जीवन व आजीविका पर असर पड़ा है. ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) के दूसरे सप्ताह की शुरुआत पर, सोमवार को जलवायु अनुकूलन, क्षति व हानि पर चर्चा केन्द्रित रही और जलवायु जोखिमों को झेल रहे देशों ने विकसित देशों से जलवायु कार्रवाई के लिये वित्तीय सहायता के वादों को पूरा करने का आग्रह किया. 

कॉप26: आदिवासी जन, प्रदर्शन और 'प्रकृति पर युद्ध समाप्ति' की पुकार

दुनिया भर के अनेक शहरों में लाखों लोगों ने ज़्यादा बड़ी व त्वरित जलवायु कार्रवाई की मांग करते हुए, प्रदर्शन किये हैं, तो वहीं, यूएन जलवायु सम्मेलन कॉप26 में शिरकत करने वाले कुछ देशों ने, प्रकृति पर आधारित समाधानों में और ज़्यादा संसाधन निवेश करने, व कृषि के ज़्यादा हरित तरीक़े अपनाए जाने की प्रतिज्ञाएँ व्यक्त की हैं.

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 5 नवम्बर 2021

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