खेतीबाड़ी

कृषि मिट्टी में प्लास्टिक सर्वव्यापी, टिकाऊ विकल्पों के लिये और ज़्यादा शोध की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (FAO) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि खेतीबाड़ी की ज़मीनों में, प्लास्टिक प्रदूषण की मौजूदगी सर्वव्यापी हो गई है जिसके कारण खाद्य सुरक्षा, जन स्वास्थ्य, और पर्यावरण के लिये जोखिम उत्पन्न हो रहा है.

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 26 नवम्बर 2021

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

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डेढ़ अरब लोगों का गुज़ारा, नमक की अधिकता वाली अनुपजाऊ ज़मीनों पर निर्भर

दुनिया भर के सभी महाद्वीपों में सिंचाई योग्य भूमि का 20 से 50 प्रतिशत हिस्सा इतना नमकीन हो गया है कि वो पूरी तरह से उपजाऊ नहीं बचा है, जिसके कारण, उन ज़मीनों में अपनी फ़सलें उगाने वाले लगभग डेढ़ अरब लोगों के लिये गम्भीर चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं.

दुनिया का पेट भरने में, ग्रामीण महिलाओं की अहम भूमिका रेखांकित करता दिवस

लैंगिक समानता व महिलाओं की बेहतरी के लिये सक्रिय संयुक्त राष्ट्र संस्था – यूएन वीमैन का कहना है कि वैसे तो ग्रामीण इलाक़ों में महिलाएँ व लड़कियाँ, खाद्य प्रणालियों में बहुत अहम व ज़रूरी भूमिका निभाती हैं मगर, फिर भी उन्हें पुरुषों के समान अधिकार व शक्ति हासिल नहीं है, इसलिये उन्हें आमदनी भी कम होती है. इसके अलावा, महिलाओं व लड़कियों को उच्च स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ता है.

वनों के लिये 'संभालें या बिगड़ने दें' लम्हा

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि प्राकृतिक दुनिया के साथ हमारे सम्बन्ध बहाल करने के प्रयासों में, वनों की केन्द्रीय भूमिका है. ये बात, उन्होंने सोमवार को, वनों पर संयुक्त राष्ट्र के फ़ोरम में कही.

भोजन और खाद्य सुरक्षा में 'दालों' की महत्ता, विश्व दिवस

संयुक्त राष्ट्र, बुधवार को, 'विश्व दालें दिवस' मना रहा है जिसके तहत, ना केवल पोषण के स्रोत के रूप में दालों की महत्ता को रेखांकित करने, बल्कि ज़मीन की उर्वरता बढ़ाने और फ़सलों के कीड़ों का असर कम करने में, उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी बढाई जाती है.

दक्षिण एशिया में कृषि मुहिम

संयुक्त राष्ट्र का अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD), ग़रीबी और भुखमरी समाप्त करने के लिये, 40 से अधिक वर्षों से, सरकारों के साथ मिलकर, दूर-दूराज़ के गाँवों तक पहुँच बनाने की कोशिशों में सक्रिय है. संगठन का कहना है कि दक्षिण एशिया उनके मिशन के लिये बेहद महत्वपूर्ण है. संगठन, इस समय, बाँग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका में काम कर रहा है ताकि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने में मदद मिल सके, और ग्रामीण आजीविका में सुधार हो सके – और कोई भी पीछे न रह जाए. एक वीडियो रिपोर्ट...

विद्युत मोहन: यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ-2020

भारत के युवा इंजीनियर विद्युत मोहन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ((UNEP) का - यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ 2020 चुना गया है. विद्युत मोहन ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जिसके ज़रिये, खेतीबाड़ी के कूड़े-करकट को पर्यावरण अनुकूल ईंधन में तब्दील किया जा सकता है, जिससे ना केवल प्रदूषण को रोकने में मदद मिलती है, बल्कि उससे आमदनी भी होती है. देखिये, इस वीडियो में...

युवा पृथ्वी चैम्पियन: स्वच्छ ऊर्जा की चाह पूर्ति के वाहक, विद्युत मोहन

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने, भारत के एक युवा इंजीनियर विद्युत मोहन को, एक ऐसी अदभुत तकनीक ईजाद करने के लिये पुरस्कृत किया है, जिससे ना केवल ऊर्जा पैदा होती है, बल्कि हवा को भी साफ़-सुथरा रखने में मदद मिलती है और अन्ततः जलवायु परिवर्तन में भी कमी होती है.

भारत: प्रदर्शनकारी किसानों के लोकतान्त्रिक अधिकारों का सम्मान हो

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत में किसानों को शान्तिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने का आधिकार है और उनकी स्वतन्त्रताओं का सम्मान किया जाना चाहिये.