कार्बन उत्सर्जन

महत्वाकाँक्षा, निर्णय क्षमता, स्पष्टता – जलवायु कार्रवाई के मन्त्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी की वजह से महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई में देरी नहीं की जा सकती और वर्चुअल वार्ताओं के ज़रिये तेज़ी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र, प्रभावित समुदायों तक मदद पहुँचाने, देशों को पूर्ण समर्थन प्रदान करने और सभी की आवाज़ सुने जाने के लिये संकल्पबद्ध है और महत्वाकाँक्षी कार्रवाई के लिये स्पष्टता व निर्णायक ढंग से आगे बढ़ा जाना होगा. 

खाद्य प्रणालियाँ, एक तिहाई उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार

एक नया अध्ययन दर्शाता है कि विश्व भर में मानव-गतिविधियों के कारण होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की एक-तिहाई से ज़्यादा मात्रा के लिये खाद्य प्रणालियाँ ज़िम्मेदार हैं. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (UNFAO) में जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ फ्रांसेस्को टुबिएलो और इटली में योरोपीय आयोग के साझा शोध केन्द्र के विशेषज्ञों द्वारा, साझा रूप से तैयार की गई यह रिपोर्ट, ‘नेचर फ़ूड’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है. 

भोजन की बर्बादी, जलवायु परिवर्तन को न्योता

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के एक नए अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2019 में बेचा गया, 93 करोड़ टन से ज़्यादा भोजन, कूड़ेदान में फेंक दिया गया. यूएन एजेंसी के अनुसार भोजन की बर्बादी केवल धनी देशों की समस्या नहीं है, और इससे जलवायु परिवर्तन के लिये भी खाद मिलती है. वर्ष 2030 तक टिकाऊ विकास एजेण्डा के तहत, वर्ष 2030 तक, भोजन की बर्बादी में 50 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.

पेरिस समझौते में अमेरिका की वापसी – ‘उम्मीद भरा दिन’ 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते में अमेरिका की वापसी का स्वागत करते हुए, इसे दुनिया के लिये एक उम्मीद भरा दिन क़रार दिया है, जिससे महत्वाकाँक्षी वैश्विक जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. पेरिस समझौते में वैश्विक तापमान में बढोत्तरी को रोकने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में कटौती का महत्वाकाँक्षी लक्ष्य रखा गया है. 

भारत: निम्न कार्बन उत्सर्जन की राह पर अग्रसर, बिहार भी सक्रिय

भारत में बिहार प्रदेश, एक जलवायु अनुकूल व निम्न कार्बन उत्सर्जक नीति बनाने को तत्पर है. इसी उद्देश्य से शुक्रवार को, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) - यूनेप और बिहार के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत यूनेप, इस बदलाव के लिये, बिहार को, तकनीकी सलाह व समीक्षा समेत सभी प्रकार सहायता प्रदान करेगा. 

जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों के लिये वित्तीय संसाधनों की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायुअनुकूलन और बदलवी जलवायु के प्रति सहनक्षमता विकसित करने की योजनाओं के लिये तात्कालिक रूप से वित्तीय संसाधनों का स्तर बढ़ाने का आहवान किया है. यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा है कि इन क्षेत्रों में निवेश के ज़रिये सूखा, बाढ़ और बढ़ते समुद्री जलस्तर जैसे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से वास्तविक और स्थाई रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. 

पेरिस जलवायु समझौता: एक नज़र

अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जोसेफ़ बाइडेन ने पेरिस जलवायु समझौते में, फिर से शामिल होने की घोषणा की है. पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने, वर्ष 2020 में, अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से हटा लिया था. इस सन्दर्भ में, पेरिस जलवायु समझौता एक बार फिर से ज़ोरदार चर्चा में आ गया है. यहाँ प्रस्तुत है - कुछ बुनियादी जानकारी...

 

नई 'जलवायु वास्तविकता' के अनुरूप बदलाव ज़रूरी, अन्यथा गम्भीर क्षति का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन अनुकूलन प्रयासों में प्रगति हुई है, इसके बावजूद बाढ़, सूखा और बढ़ता समुद्री जलस्तर, जैसी अन्य चुनौतियों से असरदार ढँग से निपटने के लिये पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव है. यूएन एजेंसी ने गुरुवार को ‘Adaptation Gap’ नामक  रिपोर्ट को जारी कर सचेत किया है कि पुख़्ता जलवायु कार्रवाई के बग़ैर दुनिया को गम्भीर मानवीय व आर्थिक क्षति झेलनी पड़ेगी.

यूएन व्यवस्था में कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में सार्थक प्रगति

संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था ने वर्ष 2019 में अपने कामकाज से पर्यावरण पर हो रहे असर को कम करने की दिशा में ठोस प्रगति जारी रखी है. मौजूदा प्रयासों के तहत उत्सर्जन में कटौती आँकी गई है और आधुनिक पर्यावरण प्रबन्धन प्रणाली को लागू करने में सफलता मिली है. 

कोविड-19 महामारी से उबरने में महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई पर ज़ोर

विकासशील देश जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबल करने के लिये ज़्यादा महत्वाकाँक्षी योजनाओं पर काम कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के मुताबिक इन प्रयासों के तहत कोविड-19 से उबरने और हरित पुनर्बहाली की दिशा में आर्थिक स्फूर्ति पैकेजों का सहारा लिया जा रहा है.