कामकाज

कामकाज-सम्बन्धी वजहों से हर वर्ष लगभग 20 लाख की मौत - नई रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि कामकाज सम्बन्धी बीमारियों और चोटों की वजह से वर्ष 2016 में 19 लाख लोगों की मौत हुई. यह पहली बार है जब यूएन एजेंसियों ने साझा रूप से इस विषय में अनुमानों को पेश किया है.

कोविड से पुनर्बहाली के दौरान, कम ही महिलाएँ लौट पाएंगी रोज़गार में

संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी – ILO की सोमवार को जारी एक नई अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान जो रोज़गार व आमदनी वाले कामकाज ख़त्म हो गए, संकट से उबरने यानि पुनर्बहाली के प्रयासों के दौरान फिर से रोज़गार व आमदनी वाले कामकाज हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या, पुरुषों की तुलना में कम होगी. 

कोविड-19 के दौर में कामकाजी सुरक्षा का मुद्दा

कोविड-19 महामारी के कारण, दुनिया भर में, अपने घरों से ही काम करने वालों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है, जिसने रोज़गार देने वालों के लिये इस ज़रूरत पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है कि वो कर्मचारियों व कामगारों के लिये सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें. 28 अप्रैल को, कार्यस्थलों पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये विश्व दिवस के अवसर पर, यहाँ प्रस्तुत है एक आकलन कि संयुक्त राष्ट्र, लोगों को, उनके कामकाज के दौरान समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में, रोज़गार देने वालों और सरकारों की, किस तरह मदद कर रहा है...

'कोविड-19: वेतनों पर महामारी की तबाही की अभी तो शुरुआत है'

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के प्रमुख ने आगाह करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी की वैक्सीन आने के बाद भी, दुनिया भर में, लोगों के वेतन व रोज़गारों पर पड़ रहे दबाव नहीं रुकेंगे. संगठन के महानिदेशक गाय रायडर ने बुधवार को यह चेतावनी ऐसे समय जारी की है जब महामारी के कारण दुनिया भर में वेतन और भत्तों में बढ़ोत्तरी को धीमा बना दिये जाने या उलट दिये जाने के बारे में एक अहम रिपोर्ट जारी हो रही है.

महामारी ने बदल दिया कामकाजी ढाँचा

कोविड-19 महामारी और ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र लागू की गई सख़्त पाबन्दियों के कारण बड़ी संख्या में कम्पनियों और कर्मचारियों के कामकाज के ढर्रे में रातों-रात व्यापक बदलाव आया है. कुछ लोगों के लिये घर बैठकर काम करने से जीवन आसान और उत्पादकता में सुधार आया है जबकि अन्य के लिये मानो दिन के 24 घण्टे ही ऑफ़िस के कामकाज में तब्दील हो गए हैं, जिससे यह वैकल्पिक व्यवस्था मानसिक थकावट का सबब भी बन रही है. हारवर्ड बिज़नेस स्कूल में प्रोफ़ेसर जैफ़्री पोल्ज़र और अन्य सहयोगी विशेषज्ञों के अध्ययन के नतीजों पर आधारित एक रिपोर्ट... 

50 करोड़ लोगों को नहीं मिल पाता समुचित मेहनताना

दुनिया भर में 50 करोड़ से भी ज़्यादा ऐसे लोग हैं जिन्हें कामकाज करने के बदले धन मिलने वाली स्थिति में उतना काम नहीं मिल पाता जितना वो करना चाहते हैं या फिर उन्हें ऐसा समुचित कामकाज ही नहीं मिल पाता है जिसमें उन्हें काम के बदले धन मिल सके.

नौनिहालों और माता-पिता को बेहतर माहौल मिलना ज़रूरी

कामकाज और पारिवारिक जीवन के बीच स्वस्थ संतुलन क़ायम करने और दोनों स्थानों पर आनंदपूर्वक जीवन जीने में सहायक नीतियाँ बनाने में अनेक विकसित और धनी देश बहुत पीछे हैं. जबकि स्वीडन, नॉर्वे, आइसलैंड, एस्तोनिया और पुर्तगाल ऐसे देश हैं जहाँ कामकाजी जीवन के साथ परिवारिक जीवन जीने और माता-पिता के लिए छोटे बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना आसान होता है.