जनसंख्या

भारत: 'विषाक्त मर्दानगी मानसिकता को ख़त्म करना ज़रूरी'

भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के प्रतिनिधि और भूटान के लिये डायरेक्टर, श्रीराम हरिदास का मानना है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को समाप्त करने के कार्यक्रमों में, पुरुषों और लड़कों को शामिल करना बेहद महत्वपूर्ण है.

सभी के लिये प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित करने की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के भीषण प्रभावों में – महिलाओं के प्रजनन अधिकारों में भारी गिरावट होना भी देखा गया है.

भारत: कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य रक्षा के लिये सक्रिय युवा छात्राएँ

कोविड-19 महामारी की जानलेवा लहर से जूझ रहे भारत में एक दिन में संक्रमण के लाखों मामले सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है. इन हालात में अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्य व अन्य सहायताकर्मी लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा करने में जुटे हैं. पिछले एक वर्ष में, कठिन हालात में किशोर स्कूली छात्राओं ने भी इस वायरस और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से अपने समुदायों की रक्षा करने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाई है.

ब्रिटेन से सहायता राशि में 85% की कटौती से, महिलाओं व लड़कियों पर गम्भीर प्रभाव

संयुक्त राष्ट्र की यौन व प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी – UNFPA ने गुरूवार को कहा कि ब्रिटेन द्वारा, संयुक्त राष्ट्र के परिवार नियोजन कार्यक्रम को दी जाने वाली सहायता राशि में इस वर्ष 85 प्रतिशत की कटौती करने का जो इरादा ज़ाहिर किया गया है उसके कारण, दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों व उनके परिवारों के लिये भयानक परिणाम होंगे.

'शरीर मेरा है, मगर फ़ैसला मेरा नहीं' महिला सशक्तिकरण पर यूएन रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 57 विकासशील देशों की लगभग आधी महिलाओं को गर्भनिरोधक का उपयोग करने, स्वास्थ्य देखभाल की मांग करने या फिर अपनी कामुकता सहित अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.

सुपरमॉडल नतालिया वोदियानोवा - महिला स्वास्थ्य व सशक्तिकरण के लिये नई पैरोकार

यौन एवँ प्रजनन स्वास्थ्य मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNFPA) ने सुपरमॉडल और सामाजिक सरोकारों से जुड़ीं, नतालिया वोदियानोवा को अपनी नई सदभावना दूत नियुक्त किया है. यूएन जनसंख्या कोष ने कहा है कि नतालिया की मदद से महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाने और माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं का मुक़ाबला करने का प्रयास किया जाएगा.  

कोविड-19: वर्तमान स्थिति पर चिन्तन और भविष्य के आकलन का समय

जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भारत भी कोविड संकट से जूझ रहा है. अपनी विशिष्ट संस्कृति और जनसंख्या समूहों के कारण यहाँ की चुनौतियाँ भी अभूतपूर्व हैं. एक अरब 37 करोड़ की आबादी वाला ये देश दुनिया की सबसे युवा आबादी का भी प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में, कोविड-19 के ख़त्म होने के बाद देश के सकारात्मक पहलुओं को समन्वित करके, किस तरह चुनौतियों से निपटा जाए – 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' पर इन्हीं मुद्दों पर प्रकाश डालता भारत में यूएनएफ़पीए की प्रतिनिधि, अर्जेंटीना मातावेल का ब्लॉग.

लड़कियों व महिलाओं पर कुप्रथाओं के दुष्प्रभाव

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफ़पीए) की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल लाखों लड़कियों को ऐसी प्रथाओं का सामना करना पड़ता है जिससे उन्हें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से नुक़सान पहुँचता है, और उनके परिवारों, दोस्तों व समुदायों को इस स्थिति की जानकारी होती है और उनकी सहमति भी.

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नैरोबी सम्मेलन: महिला सशक्तिकरण से बदलेगी टिकाऊ विकास की तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि सभी के लिए एक टिकाऊ भविष्य का वैश्विक लक्ष्य तब तक हासिल नहीं किया जा सकता जब तक कि महिलाओं, लड़कियों और युवाओं को उनके शरीरों और ज़िंदगियों पर ख़ुद का नियंत्रण स्थापित करने का मौक़ा नहीं मिलता है. आमिना जे मोहम्मद ने केनया की राजधानी नैरोबी में अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या और विकास सम्मेलन (आईसीपीडी) के 25 वर्ष पूरे होने के मौक़े पर आयोजित सम्मेलन में ये बात कही.

प्रवासी संख्या में जनसंख्या वृद्धि की गति से भी तेज़ बढ़ोत्तरी

दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 27 करोड़ 20 लाख हो गई है जिसने विश्व  की जनसंख्या वृद्धि की दर को भी पीछे छोड़ दिया है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) की नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर क्षेत्र में प्रवासियों की संख्या बढ़ने का रुझान सामने आ रहा है.