जलवायु

युवाओं का सम्मेलन: वयस्कों पर दबाव डालने का मंच

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की युवा मामलों पर विशेष दूत जयथमा विक्रमानायके ने कहा है कि ये बहुत अहम है कि दुनिया की लगभग एक अरब 80 करोड़ की युवा आबादी को जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ लड़ाई और अंततः पृथ्वी ग्रह का भविष्य तय करने में निर्णायक भूमिका मिले. 

 

भूमि को बंजर होने से बचाने के लिए मंथन

6 सितंबर 2019 के इस साप्ताहिक अंक में...

भूमि प्रबंधन पर कॉप 14 सम्मेलन दिल्ली में, ज़मीन को बंजर होने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंथन,

अनेक स्थानों पर अशांति और युद्ध के हालात में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता

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'अगर पृथ्वी को बचाना है तो भूमि को बचाएं, अर्थव्यवस्था में जान फूँकें'

भूमि को बंजर होने से बचाकर उपजाऊ बनाने में ज़्यादा संसाधन निवेश करने से ना सिर्फ़ पृथ्वी ग्रह को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी, बल्कि वर्तमान के कुछ सबसे बड़े मुद्दों का समाधान तलाश करने की भी शुरुआत हो सकती है. दुनिया भर में मरुस्थलीकरण के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहीम चियाओ ने नई दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के ज़रिए पत्रकारों से बातचीत में ये बात कही है. इस विषय पर 14 वां वैश्विक सत्र 2 से 13 सितंबर तक राजधानी दिल्ली में हो रहा है.

 

बहामास में डोरियन तूफ़ान की तबाही के बीच सहायता कार्य तेज़

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और उसके साझेदारों ने डोरियन तूफ़ान से बहामास में भारी तबाही होने की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वो इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने वाले हर एक व्यक्ति के लिए चिंतित हैं. डोरियन तूफ़ान ने बहामास और अबाको दो कैरीबियाई द्वीपों को बुरी तरह प्रभावित किया है. 

भूमि प्रबंधन पर संयुक्‍त राष्ट्र सम्‍मेलन - कॉप-14 भारत में शुरू

भूमि को जलवायु परिवर्तन के ख़तरों से बंजर होने से बचाने के लिए कान्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप का 14वां सम्मेलन भारत में सोमवार को आरंभ हुआ. 2 से 13 सितंबर तक राजधानी दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा में होने वाले इस सम्मेलन में लगभग 196 देश शिरकत कर रहे हैं जो बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के तरीक़ों पर मंथन करेंगे.

तापमान बढ़ने से 2,400 अरब डॉलर का नुक़सान होने का अनुमान

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में कामकाज की उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ने वाला है जिससे आमदनी वाले कामकाज और भारी आर्थिक नुक़सान होगा. ग़रीब देश सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे और कृषि व निर्माण क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे.

क़ुदरती हादसों से खरबों का नुक़सान

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले क़रीब 20 वर्षों के दौरान भूकम्प और सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से क़रीब 13 लाख लोगों की जान जा चुकी है.

टूट रहा है भरोसा, कैसे बचाएं…

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है आज के दौर में दुनिया भर में भरोसा टूटा हुआ नज़र आता है. तमाम देशों के राष्ट्रीय संस्थानों में लोगों का भरोसा, देशों के बीच आपसी भरोसा और नियम और क़ानून पर आधारित एक वैश्विक व्यवस्था में भरोसा, सभी चकनाचूर हुआ नज़र आता है.