जलवायु कार्रवाई

कॉप-25: वार्ताओं में प्रगति, जलवायु महत्वाकांक्षाओं पर निराशा

कॉप-25 में चल रही वार्ताएं अंततः रविवार को समाप्त हो गईं. इनमें निजी क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ख़ासी प्रगति हुई है. अलबत्ता, जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ाने के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं हो सकी जिस पर बड़े पैमाने पर निराशा का माहौल भी देखा गया.

कॉप-25: महत्वाकांक्षा भरा संदेश देने की पुकार

स्पेन के मैड्रिड शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) के अंतिम दिन शुक्रवार को देशों के प्रतिनिधिमंडल देर रात तक पारस्परिक सहमति को अंतिम रूप देने के प्रयासों मे जुटे थे. यूएन प्रमुख ने अपने संदेश में सभी देशों से ज़्यादा महत्वाकांक्षी होने और विज्ञान पर आधारित मज़बूत कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है.

हरित भविष्य के लिए कायापलट कर देने वाले बदलाव लाने होंगे

ऐसे में जबकि विश्व में गहराते जलवायु संकट से करोड़ों लोगों का रोज़गार प्रभावित हो रहा है, तो भविष्य में लोगों की आजीविका के साधनों को सुरक्षित रख पाना इस तरह के कायापलट कर देने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा कि हम किस तरह पृथ्वी पर ऊर्जा कैसे हासिल करते हैं और अपने संसाधनों का प्रबंधन किस तरह करते हैं.

जलवायु सम्मेलन में सार्थक नतीजे हासिल करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बांडे ने कहा है कि स्पेन में हो रहे जलवायु सम्मेलन से जलवायु संकट से निपटने के लिए ठोस नतीजों का सामने आना अनिवार्य है. स्पेन की राजधानी मैड्रिड में जारी कॉप-25 सम्मेलन के दौरान विज्ञान की स्पष्टता के बारे में बताते हुए कहा गया है वैश्विक और राष्ट्रीय स्तरों पर तत्काल असरदार जलवायु कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है.

2019 जलवायु सम्मेलन: कॉप-25 बैठक की पांच महत्वपूर्ण बातें

जलवायु परिवर्तन तेज़ रफ़्तार से हो रहा है – औद्योगिक क्रांति के बाद पृथ्वी का औसत तापमान 1.1 डिग्री बढ़ चुका है जिसका लोगों के जीवन पर व्यापक असर हुआ है, और अगर मौजूदा रुझान इसी तरह से जारी रहे तो इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी 3.4 से 3.9 डिग्री सेल्सियस तक हो सकती है. मानवता के लिए इसके विनाशकारी नतीजे होंगे. स्पेन के मैड्रिड शहर में 2 दिसंबर से शुरू हुए वार्षिक यूएन जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) से ठीक पहले यह चेतावनी जारी की गई है.

जलवायु सम्मेलन: हरित अर्थव्यवस्था को आगे बढ़कर अपनाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हरित अर्थव्यवस्था से डरने के बजाय उसे खुलकर अपनाया जाना चाहिए. यूएन प्रमुख ने सोमवार को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में वार्षिक यूएन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP25) के पहले दिन प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दोहराया कि महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई के लिए मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति दर्शाए जाने के साथ-साथ कार्बन की क़ीमत तय किए जाने की ज़रूरत है. 

जलवायु विशेषज्ञों ने पर्वतों के क्षरण से निपटने का संकल्प लिया

संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान संस्था (WMO) और साझेदार संगठनों ने जलवायु परिवर्तन के कारण उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियरों की बर्फ़ पिघलने और जल उपलब्धता का संकट बढ़ने की आशंका के मद्देनज़र गुरुवार को एक नई पहल की घोषणा की है. इस पहल के तहत उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की निगरानी और पूर्वानुमान तकनीकों को बेहतर बनाने पर प्रयास केंद्रित किए जाएंगे. 

गहराई से जुड़े हैं आपदा जोखिम प्रबंधन और जलवायु कार्रवाई के तार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि आपदा जोखिम को कम करने और जलवायु आपदा के नुक़सानों के ख़िलाफ़ मज़बूती हासिल करने के बीच बहुत दमदार आर्थिक दलील है. महासचिव ने आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ये संदेश दिया है. ये दिवस सोमवार 14 अक्तूबर मनाया जा रहा है. 

टिकाऊ और समावेशी विकास में शहरों की अहम भूमिका

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘C-40 वर्ल्ड मेयर्स समिट’ को संबोधित करते हुए ध्यान दिलाया है कि टिकाऊ और समावेशी विकास को हासिल करने के प्रयासों में दुनिया भर में शहर अग्रिम मोर्चे पर खड़े हैं. डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में गुरुवार को शुरू हुई यह शिखर वार्ता दो दिन तक चलेगी जिसमें C-40 गठबंधन के सदस्य शहरों ने टिकाऊ खाद्य नीतियों को लागू करने का संकल्प लिया है ताकि जलवायु आपात स्थिति से निपटा जा सके.

जलवायु संकट से जूझते द्वीपीय देशों को अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत

लघु द्वीपीय विकासशील देशों में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति के लिए तत्काल निवेश की आवश्यकता पर बल दिया गया है. शुक्रवार को ‘स्माल आईलैंड डिवैलपिंग स्टेट्स एक्सीलरेटेड मॉडैलिटीज़ ऑफ़ एक्शन’ (समोआ पाथवे) की समीक्षा के लिए हुई बैठक में जलवायु परिवर्तन से जूझते द्वीपीय देशों प्रभावी मदद के रास्तों पर चर्चा हुई.