जलवायु कार्रवाई

कॉप26: एसडीजी या एनडीसी? कठिन शब्दावली, सरल भाषा में...

यदि आप, संयुक्त राष्ट्र के कामकाज या विभिन्न यूएन एजेंसियों की गतिविधियों के बारे में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपने शब्द समूहों के अनेक संक्षिप्त रूपों, तकनीकी भाषा और शब्दावली का बहुत अधिक इस्तेमाल होते हुए भी देखा होगा. वार्षिक यूएन जलवायु सम्मेलन और उसका संक्षिप्त रूप, यानि कॉप26 इसी की एक बानगी है. जलवायु मुद्दे पर इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, आपको ऐसे ही अनेक अन्य शब्दों से दो-चार होना पड़ सकता है. इसलिये, हमने प्रचलित शब्दावली को सरल बनाने का प्रयास किया है...

यूएन न्यूज़: कॉप26 जलवायु प्रश्नोत्तरी

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन कॉप26 और चर्चा में छाए रहने वाले अन्य बड़े मुद्दों के बारे में आप कितना जानते हैं? यूएन न्यूज़ ने एक जलवायु कार्रवाई प्रश्नोत्तरी (क्विज़) तैयार की है, जोकि आपके लिये, अपने ज्ञान को परखने का अवसर है (प्रश्नों के उत्तर नीचे उपलब्ध हैं)...

विकासशील जगत में जलवायु अनुकूलन, हरित औद्योगिक नीतियाँ अहम

व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) ने सचेत किया है कि विकासशील देशों में जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, अनुकूलन प्रयासों के लिये हरित औद्योगिक नीतियाँ अपनाया जाना बेहद अहम है. जलवायु-सम्बन्धी आपदाओं के कारण, विकासशील देशों को पहले ही, उच्च-आय वाले देशों की तुलना में तीन गुना आर्थिक नुक़सान झेलना पड़ रहा है. 

एक डायनासोर की विश्व नेताओं से अपील: 'विलुप्ति की राह ना चुनें'

ऐसा पहली बार हुआ कि एक उग्र और बातूनी डायनासोर, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के प्रतिष्ठित महासभा हॉल में घुस आया. उन राजनयिकों के लिये विशेष रूप से चेतावनी जारी करते हुए, जो अभी भी सोचते हैं कि जलवायु कार्रवाई केवल पक्षियों के लिये है.

महासभा प्रमुख: एकजुट कार्रवाई से जलवायु संकट का समाधान सम्भव

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जनरल ऐसेम्बली में आयोजित एक उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान, बढ़ते समुद्री जलस्तर समेत उन कटु वास्तविकताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया है, जिनसे मालदीव और अन्य द्वीपीय देशों के लिये विशेष रूप से ख़तरा पैदा हो रहा है. 

'विनाशकारी तापमान वृद्धि' की ओर बढ़ती दुनिया - सुस्पष्ट जलवायु कार्रवाई व संकल्पों का आहवान

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु कार्रवाई के लिये नए और संशोधित संकल्प, पैरिस जलवायु समझौते में तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिये पर्याप्त नहीं हैं. स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले जारी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया इस सदी में, वैश्विक तापमान में कम से कम 2.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की ओर बढ़ रही है.   

2020: वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की सघनता रिकॉर्ड स्तर पर

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के एक नए अध्ययन ‘ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन’ के अनुसार, वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा पिछले साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई और ये रुझान वर्ष 2021 में भी जारी है. वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिये ज़िम्मेदार इन गैसों की मात्रा में बढ़ोत्तरी की वार्षिक वृद्धि दर को, 2011-2020 के औसत से अधिक मापा गया है.  

भारत: यूएन दिवस के अवसर पर, हरित समाधानों व जलवायु कार्रवाई पर ज़ोर

भारत में संयुक्त राष्ट्र ने 24 अक्टूबर को यूएन दिवस के अवसर पर, एक जलवायु कार्रवाई उत्सव का आयोजन किया, जिसमें युवाओं द्वारा विकसित अभिनव, पर्यावरण अनुकूल समाधानों को दर्शाया गया. इस कार्यक्रम में यूएन अधिकारियों के साथ-साथ, युवा जलवायु चैम्पियनों और नीति-निर्धारकों ने भी शिरकत की. 

जलवायु परिवर्तन लक्ष्य प्राप्ति और जीवाश्म ईंधन उत्पादन योजनाओं के बीच गहरी खाई

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और साझीदार संगठनों ने कहा है कि जलवायु महत्वाकांक्षा में बढ़ोत्तरी और कार्बन तटस्थता संकल्पों के बावजूद, देशों की सरकारें, जीवाश्म ईंधन उत्पादन, वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी का लक्ष्य 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये, ज़रूरी मात्रा से दोगुनी मात्रा में उत्पादन की योजनाओं पर काम कर रही हैं. बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है. 

विश्व खाद्य दिवस: खाद्य प्रणालियों में जीवनरक्षक, रूपान्तरकारी बदलावों की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार, 16 अक्टूबर, को ‘विश्व खाद्य दिवस’ के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये, खाद्य प्रणालियों में परिवर्तनशील कार्रवाई की पुकार लगाई है. उन्होंने कहा है कि इन बदलावों के ज़रिये सर्वजन के लिये बेहतर पोषण, बेहतर पर्यावरण और हर इनसान के लिये एक बेहतर ज़िन्दगी सुनिश्चित किये जा सकते हैं.