जलवायु कार्रवाई

कोविड-19 व जलवायु चुनौतियाँ: निडर और दूरगामी नेतृत्व की पुकार

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और मानवता के अस्तित्व पर मंडराते जलवायु संकट से निपटने का एकमात्र विश्वसनीय रास्ता बहुपक्षवाद पर आधारित निडर, दूरगामी और सहयोगपूर्ण नेतृत्व में निहित है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय चर्चा में यह बात कही है. यूएन प्रमुख ने ज़िंदगियों पर मंडराते ख़तरों, पंगु हो रहे व्यवसायों और क्षतिग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं की पृष्ठभूमि में सचेत किया है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए भी जोखिम पैदा हो गया है. 

कोविड-19: ‘कार्बन उत्सर्जन में अस्थाई गिरावट’ से नहीं रुकेगा जलवायु परिवर्तन

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों पर अभूतपूर्व असर हुआ है जिससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में गिरावट आने की संभावना जताई गई है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने सचेत किया है कि यह एक अच्छी ख़बर है मगर अस्थाई है क्योंकि सामान्य जीवन के फिर शुरू होने के बाद कार्बन उत्सर्जन में फिर से तेज़ी आने की संभावना है.

कोविड-19: पृथ्वी के बाशिन्दों को 'नींद से जगा देने वाली अभूतपूर्व घंटी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को ‘अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी मॉं दिवस’ (International Mother Earth Day) के अवसर पर ध्यान दिलाया है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 एक नींद से जगा देने वाली एक अभूतपूर्व घंटी है लेकिन इससे सबक़ लेते हुए ऐसे विकास की दिशा में संसाधन निवेश करने होंगे जिनसे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिले और टिकाऊ विकास का मार्ग प्रशस्त हो. 

कोविड-19: यूएन जलवायु शिखर वार्ता को स्थगित करने का फ़ैसला

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में नवंबर 2020 में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक जलवायु शिखर वार्ता को स्थगित करने का फ़ैसला किया गया है. जलवायु मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था (UNFCCC) ने कहा है कि बैठक के स्थगित होने से प्रतिनिधियों व पर्यवेक्षकों की सुरक्षा के साथ-साथ सभी पक्षों को महत्वपूर्ण जलवायु मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और तैयारी करने का ज़्यादा समय मिल सकेगा.  

जलवायु परिवर्तन से जंग स्कूली छात्रों के संग

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर व्यापक असर पड़ रहा है. इस विशालकाय चुनौती से निपटने में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों की क्या भूमिका हो सकती है और वे किस तरह नए और अभिनव समाधानों का हिस्सा बन सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की एक पहल इसी दिशा में प्रयासों पर केंद्रित है.

जयपुर साहित्य महोत्सव में जलवायु मुद्दा भी चर्चा में

संयुक्त राष्ट्र ने भारत की गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव की पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन से तत्काल निपटने की अहमियत को फिर दोहराया है. भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर रेनाटा डेज़ालिएन ने जलवायु आपात स्थिति पर एक सत्र के दौरान बताया कि जलवायु संकट पर असरदार कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र अपनी सीमाओं से परे जाकर प्रयासों में जुटा है.

बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों से जलवायु कार्रवाई की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अगर विश्व के प्रमुख औद्योगिक देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं की तो जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए अभिशाप बन कर रह जाएगा. स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि कई छोटे विकासशील देशों और योरोपीय संघ ने वर्ष 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी (नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन की स्थिति) का संकल्प लिया है लेकिन बड़े उत्सर्जक देशों द्वारा कार्रवाई किया जाना अभी बाक़ी है.

कॉप-25: वार्ताओं में प्रगति, जलवायु महत्वाकांक्षाओं पर निराशा

कॉप-25 में चल रही वार्ताएं अंततः रविवार को समाप्त हो गईं. इनमें निजी क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ख़ासी प्रगति हुई है. अलबत्ता, जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ाने के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं हो सकी जिस पर बड़े पैमाने पर निराशा का माहौल भी देखा गया.

कॉप-25: महत्वाकांक्षा भरा संदेश देने की पुकार

स्पेन के मैड्रिड शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) के अंतिम दिन शुक्रवार को देशों के प्रतिनिधिमंडल देर रात तक पारस्परिक सहमति को अंतिम रूप देने के प्रयासों मे जुटे थे. यूएन प्रमुख ने अपने संदेश में सभी देशों से ज़्यादा महत्वाकांक्षी होने और विज्ञान पर आधारित मज़बूत कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है.

हरित भविष्य के लिए कायापलट कर देने वाले बदलाव लाने होंगे

ऐसे में जबकि विश्व में गहराते जलवायु संकट से करोड़ों लोगों का रोज़गार प्रभावित हो रहा है, तो भविष्य में लोगों की आजीविका के साधनों को सुरक्षित रख पाना इस तरह के कायापलट कर देने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा कि हम किस तरह पृथ्वी पर ऊर्जा कैसे हासिल करते हैं और अपने संसाधनों का प्रबंधन किस तरह करते हैं.