जलवायु कार्रवाई

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 74वाँ वार्षिक सत्र शुरू

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि महासभा के 74वें सत्र के लिए अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बांडे के पास वर्षों तक यूएन के साथ काम करने का अनुभव है. यूएन महासभा के नए अध्यक्ष ने ग़रीबी उन्मूलन, जलवायु कार्रवाई, गुणवत्तापरक शिक्षा और समावेशन को अपनी प्राथमिकताओं में शुमार करते हुए मंगलवार को परंपरा के अनुरूप हथौड़े की चोट के ज़रिए अपना एक वर्ष का कार्यकाल शुरू किया है.

जलवायु संकल्पों को पूरा करने के कितने पास है दुनिया?

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सितंबर में होने वाली जलवायु शिखर वार्ता की तैयारी ज़ोरों पर है जिसे हाल के दशको में होने वाले सबसे बड़े जलवायु सम्मेलनों में माना जा रहा है. जलवायु आपात स्थिति और उससे उपजती चुनौतियों के बीच इस संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन क्या मौजूदा कार्रवाई पर्याप्त है?

'दशकों में हासिल हुई प्रगति कुछ ही घंटों में ख़त्म हो सकती है'

प्राकृतिक आपदाएँ जिस तरह विकास को नकारती हैं, शायद ही कोई और वजह ऐसा करती हो, ये कहना है संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का जिन्होंने सातवें टोकियो अंतरराष्ट्रीय अफ्रीका विकास सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिभागियों को संबोधित किया. इस सम्मेलन का ये सातवां वर्ष है.

शहरी जीवन की चुनौतियों के टिकाऊ समाधान की तलाश के लिए सम्मेलन

बेहतर योजना और प्रबंधन के सहारे शहरों को समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है और वे विविध समुदायों के बीच समरसता के मॉडल के रूप में तैयार हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को अमेरिका की साल्ट लेक सिटी में 68वीं यूएन सिविल सोसाइटी सम्मेलन में एकत्रित प्रतिनिधियों को अपने वीडियो संदेश के दौरान यह बात कही.  

जलवायु इमरजेंसी से निपटने के लिए 'मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति' की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया भर में लोग जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने और एक हरित व स्वच्छ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान कर रहे हैं. जी-7 नेताओं से वार्ता के दौरान उन्होंने ध्यान दिलाया कि जलवायु आपात स्थिति से निपटने के लिए साधनों की कमी नहीं है लेकिन इस संकट से पार पाने के लिए मज़बूत संकल्प और दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है.

जलवायु परिवर्तन के असाधारण प्रभाव से खाद्य सुरक्षा पर मंडराता ख़तरा

विश्व में 50 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जहां जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्यावरण क्षरण हो रहा है जिससे वहां जीवन प्रभावित हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए सभी देशों से अपील की है कि भूमि के टिकाऊ इस्तेमाल के लिए संकल्प लिए जाने चाहिए ताकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित किया जा सके, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए.

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध दौड़ हमें जीतनी ही होगी - यूएन महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु की आपात स्थिति और बढ़ते वैश्विक तापमान पर चिंता ज़ाहिर करते हुए विश्व नेताओं से आगामी शिखर वार्ता में ठोस जलवायु कार्रवाई के लिए बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा के साथ आने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्रवाई अभी नहीं की गई तो दुनिया को जल्द उसके दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे.

वायु प्रदूषण रोकने के लिए सरकारों का आह्वान

संयुक्त राष्ट्र ने वायु प्रदूषण कम करने और सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के इरादे से  साझेदार संगठनों के साथ मिलकर सरकारों से ‘क्लीन एयर इनिशिएटिव’ से जुड़ने का आह्वान किया है. सितंबर में यूएन जलवायु शिखर वार्ता से पहले सरकारों से वायु की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने की अपील की गई है ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके और 2030 तक जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण नीतियों में एकरूपता लाई जा सके.

युवा तलाश करेंगे जलवायु संकट का समाधान

क्या युवा कंप्यूटर प्रोग्रामर कोडिंग के माध्यम से जलवायु संकट का समाधान ढूंढ सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र में युवा मामलों की विशेष दूत जयाथमा विक्रमानायके ने हाल ही में एक नई प्रतियोगिता “रीबूट द अर्थ” की शुरुआत की है जिसकी मदद से संयुक्त राष्ट्र, शिक्षा जगत, नागरिक समाज और युवाओं के बीच पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देते हुए जलवायु आपात स्थिति का समाधान ढूंढने का प्रयास किया जाएगा.  

समावेशन है टिकाऊ विकास लक्ष्यों की कुंजी

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उच्च-स्तरीय राजनैतिक मंच की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विकास प्रक्रिया में समावेशिता की ज़रूरत पर बल दिया है. उन्होंने कहा कि आधी आबादी के पास जितनी संपत्ति है, उतनी ही संपत्ति सिर्फ़ कुछ ही लोगों के पास होने पर सवाल उठना लाज़िमी है और कि तमाम प्रयासों के बावजूद टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने से अभी दुनिया पीछे है.