जलवायु आपदा

जलवायु परिवर्तन: यूएन प्रमुख की चेतावनी, संकल्प पूर्ति में, 2021 बहुत अहम वर्ष

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विश्व, जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते की शर्तों के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि में कमी लाने के सहमत लक्ष्य हासिल करने के रास्ते पर अभी बहुत पीछे है. महासचिव ने,  ये चेतावनी भरी बात, जलवायु संकट से बचने में, ज़्यादा महत्वाकाँक्षी प्रतिबद्धताएँ हासिल करने की अपनी कोशिशों के तहत, सोमवार को कही. 

जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों के लिये वित्तीय संसाधनों की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायुअनुकूलन और बदलवी जलवायु के प्रति सहनक्षमता विकसित करने की योजनाओं के लिये तात्कालिक रूप से वित्तीय संसाधनों का स्तर बढ़ाने का आहवान किया है. यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा है कि इन क्षेत्रों में निवेश के ज़रिये सूखा, बाढ़ और बढ़ते समुद्री जलस्तर जैसे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से वास्तविक और स्थाई रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. 

मानव और ग्रह, टकराव की राह पर, यूएनडीपी की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक ताज़ा और प्रमुख रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर प्राकृतिक दुनिया और पर्यावरण को नुक़सान में कमी लानी है तो, तमाम देशों को अपने विकास रास्तों पर फिर से ग़ौर करना होगा, नहीं तो पूरी मानवता के लिये प्रगति व्यवधान पैदा हो जाने का जोखिम है.

जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020 के अवसर पर विशेष सामग्री

जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020

ऐतिहासिक पेरिस समझौता वजूद में आने के पाँच वर्ष बाद, विश्व नेताओं ने जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिये, और अब तक हुई प्रगति को आगे बढ़ाने के लिये, जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020 में, नए संकल्प व्यक्त किये. कुछ झलकियाँ... (वीडियो)

कोविड-19 महामारी से उबरने में महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई पर ज़ोर

विकासशील देश जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबल करने के लिये ज़्यादा महत्वाकाँक्षी योजनाओं पर काम कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के मुताबिक इन प्रयासों के तहत कोविड-19 से उबरने और हरित पुनर्बहाली की दिशा में आर्थिक स्फूर्ति पैकेजों का सहारा लिया जा रहा है. 

यूएन न्यूज़-हिन्दी बुलेटिन, 4 दिसम्बर 2020

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
-------------------------------------------------------------------

ऑडियो -
20'48"

'नैट-ज़ीरो' की दौड़, और दुनिया इस पर क्यों निर्भर है!

अनेक देशों ने, आने वाले वर्षों में "शून्य उत्सर्जन" का लक्ष्य हासिल करने के मक़सद से, हाल ही में अपने कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के लिये प्रतिबद्धताओं की घोषणा की है. यह शब्द आज दुनिया भर में गूँज रहा है और इसे अक्सर जलवायु परिवर्तन और इससे होने वाली तबाही से निपटने के लिये एक आवश्यक क़दम के रूप में देखा जाता है.

पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने पर खेद

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सचिवालय (UNFCCC) ने अपना ये संकल्प दोहराया है कि वो वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर क़ाबू पाने के लिये हुई ऐतिहासिक सन्धि के अनुरूप संयुक्त राज्य अमेरिका में और अन्य स्थानों पर सक्रिय अपने साझीदारों के साथ मिलकर जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने का काम करता रहेगा. 

पिछले 20 वर्षों के दौरान जलवायु आपदाओं में चिन्ताजनक बढ़ोत्तरी हुई

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि 21वीं शताब्दी के पहले 20 वर्षों में जलवायु आपदाओं में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने सोमवार को एक नई रिपोर्ट जारी करने के मौक़े पर एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लगभग सभी देशों ने उन नुक़सानदेह उत्सर्जनों से निपटने के लिये पर्याप्त क़दम नहीं उठाए हैं जोकि जलवायु ख़तरों से जुड़े हैं और बड़ी संख्या में त्रासदियों के लिये ज़िम्मेदार हैं.  

जयपुर साहित्य महोत्सव में जलवायु संकट मुद्दा

भारत में राजस्थान की अनूठी सांस्कृतिक विरासत की पृष्ठभूमि में जयपुर साहित्य महोत्सव का 13वाँ संस्करण 23 से 27 जनवरी के बीच आयोजित हुआ. इस साहित्य महोत्सव में – अनेक साहित्यकारों, पत्रकारों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित अनेक अंतरराष्ट्री हस्तियों ने शिरकत की.