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पाकिस्तान में पोलियो की चुनौती में अफ़वाहों से भी मुक़ाबला

इन्सान को अपाहिज बना देने वाली, और कभी-कभी तो जानलेवा साबित होने वाली बीमारी पोलियो दुनिया के ज़्यादातर देशों में ख़त्म की जा चुकी है, मगर पाकिस्तान में ये अब भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है. इसका एक बड़ा कारण ये भी है कि पाकिस्तान की आबादी का एक बड़ा हिस्सा पोलियो से बचाने वाली दवा के टीके लगवाने का विरोध करता है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने पाकिस्तान में पोलियो को जड़ से मिटाने और लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने के लिये एक ताज़ा अभियान शुरू किया है. ये अभियान चलाने वाली टीम के एक सदस्य और स्वास्थ्यकर्मी डेनिस चिमेन्या ने यूएन न्यूज़ के साथ ख़ास बातचीत की...

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन - 10 जुलाई 2020

10 जुलाई 2020 के इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
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सभी को जल व स्वच्छता की सुलभता के लिए शुरू हुई एक नई व्यवस्था
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कोविड -19 महामारी के बीच आपराधिक समूह लगे हैं – 

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ख़त्म हो रहा है एंटीबॉयोटिक्स दवाओं का असर

अगर इंसानों की आदतों और तथ्यों पर ग़ौर करें तो ये कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी. 21वीं सदी के आधा पूरा होने तक एशिया में ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं कि हर साल क़रीब पचास लाख लोगों की मौत एंटीबॉयोटिक्स दवाओं के बेअसर होने की वजह से होने लगेगी.

अरबों लोग अब भी टॉयलेट से वंचित

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया भर में अब भी क़रीब दो अरब 30 करोड़ लोगों को बुनियादी स्‍वच्‍छता सुविधाएं सुलभ नहीं हैं और स्वच्छता को एजेंडा 2030 के तहत प्राथमिकता बनाया जाना ज़रूरी है.