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भारत: रेलवे पटरियों के पास रहने वाले लाखों लोगों को घरों से बेदख़ल करने पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने भारत की राजधानी दिल्ली में रेलवे पटरियों के किनारे रहने वाले लगभग ढाई लाख लोगों को अपने घरों से बेदख़ल करने के भारतीय सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर चिन्ता व्यक्त की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के क़दम से प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय अधिकार सन्धियों के तहत देशों के दायित्वों का उल्लंघन होगा.

2020 तक 14 लाख शरणार्थियों को आसरे की ज़रूरत होगी

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - यूएनएचसीआर ने कहा है कि 60 से अधिक मेज़बान देशों में फैले 14 लाख से अधिक विस्थापितों को साल 2020 तक तत्काल रूप में पुनर्वास की ज़रूरत पड़ेगी. साथ ही यूएनएचसीआर ने अतिसंवेदनशील होने के कारण एलजीबीटीआई (LGBTI) शरणार्थियों को और ज़्यादा सुरक्षा देने की मांग की.

नौनिहालों और माता-पिता को बेहतर माहौल मिलना ज़रूरी

कामकाज और पारिवारिक जीवन के बीच स्वस्थ संतुलन क़ायम करने और दोनों स्थानों पर आनंदपूर्वक जीवन जीने में सहायक नीतियाँ बनाने में अनेक विकसित और धनी देश बहुत पीछे हैं. जबकि स्वीडन, नॉर्वे, आइसलैंड, एस्तोनिया और पुर्तगाल ऐसे देश हैं जहाँ कामकाजी जीवन के साथ परिवारिक जीवन जीने और माता-पिता के लिए छोटे बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना आसान होता है.